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चांद पर क्यों नहीं मिटते इंसानों के पैरों के निशान? बड़ा गहरा है रहस्य

Tue, 13 Aug 2019 07:32 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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चांद की सतह पर इंसान के पैर के निशान - फोटो : Social media
ये तो सब जानते हैं कि चांद पर जाने वाले पहले व्यक्ति नील आर्मस्ट्रांग हैं, जबकि अंतरिक्ष यात्री यूजीन सेरनन आखिरी व्यक्ति थे, जिन्होंने साल 1972 में चंद्रमा की सतह पर अपने कदमों के निशान छोड़े थे। इस बात को अब 46 साल बीत चुके हैं, लेकिन उनके पैरों के निशान आज भी चांद की धरती पर मौजूद होंगे। इसके पीछे एक गहरा रहस्य छुपा हुआ है। 
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चंद्रमा की सतह - फोटो : Social media
चांद पृथ्वी का इकलौता प्राकृतिक ग्रह है। इसके निर्माण के पीछे भी एक अनोखी कहानी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि आज से करीब 450 करोड़ साल पहले एक उल्का पिंड पृथ्वी से टकराया था, जिसकी वजह से पृथ्वी का कुछ हिस्सा टूट कर अलग हो गया और वही हिस्सा बाद में जाकर चांद बना। 

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चंद्रमा - फोटो : Social media
वैज्ञानिकों के मुताबिक, चंद्रमा का सिर्फ 59 फीसदी हिस्सा ही पृथ्वी से दिखता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि अगर चांद अंतरिक्ष से गायब हो जाए तो पृथ्वी पर दिन मात्र छह घंटे का रह जाएगा। 

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चंद्रमा की सतह - फोटो : Social media
आपको यह भी जानकर हैरानी होगी कि चांद के रोशनी वाले हिस्से का तापमान 180 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, जबकि अंधेरे भाग का तापमान -153 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। 
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चांद की सतह पर इंसान के पैर के निशान - फोटो : Social media
बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मार्क रॉबिन्सन बताते हैं, 'चंद्रमा मिट्टी की चट्टानों और धूल की एक परत से ढंका हुआ है। साथ ही मिट्टी के कण भी इस परत में मिश्रित होते हैं, इसलिए चांद की सतह पर से पैर के हट जाने के बाद भी पैरों के निशान बने रहते हैं। 
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चांद की सतह पर इंसान के पैर के निशान - फोटो : Social media
मार्क रॉबिन्सन का कहना है कि चंद्रमा पर मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों के पैर के निशान लाखों सालों तक वैसे ही रहेंगे, क्योंकि चांद पर वायुमंडल नहीं है।
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