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अनोखी परंपरा: आखिर छत्तीसगढ़ के इस गांव में क्यों मनाई जाती है एक हफ्ते पहले दिवाली, ये है वजह

Fri, 21 Oct 2022 02:21 PM IST
ज्योति मेहरा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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diwali - फोटो : istock
Dhamtari News: दिवाली आने में अब कुछ ही दिन बचे हैं। देशभर में दिवाल का त्योहार बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है। पांच दिन के इस त्योहार के आने से कुछ समय पहले ही बाजारों में एक अलग तरह की चहल-पहल देखने को मिलती है। लेकिन क्या आपको पता है, कि हमारे देश में एक शहर ऐसा भी है, जहां दिपावली का त्योहार एक सप्ताह पहले ही मनाया जाता है। इतना ही नहीं आपको जानकर हैरानी होगी कि दिवाली ही नहीं छत्तीसगढ़ के इस गांव में हर त्योहार एक सप्ताह पहले ही मनाया जाता है। अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि, आखिर इस अजीब सी परंपरा के पीछे क्या वजह है? तो चलिए आज इस परंपरा के बारे में जानते हैं। दरअसल, ये परंपरा  छत्तीसगढ़ के सेमरा गांव में मनाई जाती है। इसके अलावा आपको ये परंपरा देश के किसी भी कोने में देखने को नहीं मिलेगी। 
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diwali - फोटो : istock
दिवाली मानने की अनोखी परंपरा
खुशियों के इस पर्व दिवाली को भगवान राम की लंका पर जीत की खुशी में मनाया जाता है। इस साल भी 24 अक्टूबर को देशभर में दिवाली का त्योहार मनाया जाएगा। इस दिन हर घर में जगमगाते दिए अंधकार को पीछे धकेल देते हैं और हमारे जीवन में नई रोशनी लाते हैं। 
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diwali - फोटो : istock
ऐसे में आज हम आपको एक अनोखी दिवाली के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां दिवाली के पहले ही दिवाली मनाई जाती है। इस गांव में 18 अक्टूबर को लक्ष्य पूजा और 19 को गोवर्धन पूजा के साथ दिवाली का आरंभ हो चुका है। 

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diwali - फोटो : istock
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में बेहद अनोखी अंदाज में दिवाली मनाई जाती है। जिले के सेमरा गांव में दिवाली के एक सप्ताह पहले ही त्यौहार को मनाने की परंपरा पिछले 5 दशकों से चली आ रही है। केवल दिवाली ही नहीं बल्कि होली और हरेली पोला त्यौहार भी एक सप्ताह पहले ही मनाया जाता है।
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diwali - फोटो : istock
हर बार की तरह इस साल भी गांव के हर आंगन में खूबसूरत रंगोली बनाई गई है। लोगों ने मिट्टी के दिए से पूरा गांव जगमगा दिया है। वहीं बच्चों-बड़ों सभी ने पटाखों की आवाज से आसमान में शोर मचा दिया है।
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diwali - फोटो : istock
परंपरा के पीछे का रहस्य
गांव के एक शख्स ने इस सवाल के जवाब में बताया कि, हमारे गांव में सिदार देव हैं, जिन्होंने गांव को एक बड़ी विपत्ति से मुक्त किया था। इसके बाद गांव के एक पुजारी को सपना आया था, जिसके अनुसार सिदार देव ने गांव में कभी आपदा विपत्ति नहीं आने का आश्वासन दिया और कहा कि इसके लिए आप लोगों को सबसे पहले मेरी पूजा करनी होगी। यही कारण है कि यहां हर साल 7 दिन पहले ही त्यौहार मनाया जाता है।
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