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Coronavirus: क्या 5G टेस्टिंग के कारण आई है कोरोना वायरस की दूसरी लहर? जानिए वायरल पोस्ट की सच्चाई

Sat, 01 May 2021 04:04 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
वैश्विक महामारी कोरोना वायरस की दूसरी लहर से भारत में भयावह स्थिति बनी हुई है। देश के तकरीबन हर राज्य में इस समय अस्पतालों में बेड्स की कमी और कोरोना से हो रही मौत के कारण श्मशान में लाशों की कतार लगी हुई हैं। हालांकि, इस महामारी को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं। कुछ इसी तरह इन दिनों सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि दुनियाभर में लोग 5G टेस्टिंग के कारण मर रहे हैं और इसे कोरोना वायरस का नाम दिया जा रहा है। तो आइए जानते हैं इस दावे की सच्चाई...
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वायरल पोस्ट की सच्चाई - फोटो : WHO
वायरल हो रहे इस पोस्ट की सच्चाई सामने लाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अपनी वेबसाइट पर विस्तार से जानकारी दे रखी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, 5G मोबाइल नेटवर्क की रेडियो तरंगों से कोविड-19 का संक्रमण नहीं फैलता है, क्योंकि कोरोना वायरस उन देशों में भी फैला है, जिनके पास 5G मोबाइल नेटवर्क नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस मामले से जुड़ा एक वीडियो भी यूट्यूब पर साझा किया है।

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वायरल पोस्ट की सच्चाई - फोटो : UNICEF
बता दें कि संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की वेबसाइट पर भी वायरल पोस्ट से जुड़ी जानकारी उपलब्ध है। UNICEF ने भी दावा किया है कि 5G को लेकर गलत सूचना फैलाई जा रही है। 5G मोबाइल इंटरनेट से ना ही वायरस फैला है और ना इसके कारण किसी की जान जा रही है।

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वायरल पोस्ट की सच्चाई - फोटो : PIB Fact Check
पीआईबी फैक्ट चेक ने भी 5G टेस्टिंग के कारण हो रही मौत के दावे को फर्जी बताया है। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से जुड़ी लत और एकदम फर्जी सूचनाएं साझा करना काफी खतरनाक हो सकता है। पीआईबी ने लोगों से अपील की है कि इस तरह के किसी भी दावे पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
 
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वायरल पोस्ट की सच्चाई - फोटो : सोशल मीडिया
आपको बता दें कि वैज्ञानिकों ने भी इस तरह के फर्जी दावों की निंदा की थी। वैज्ञानिकों के मुताबिक, कोविड-19 और 5-जी तकनीक के बीच कोई संबंध नहीं है और ये जैविक रूप से संभव भी नहीं है।
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