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कोरोना वायरस: आखिर इस देश ने महिलाओं को क्यों दिया घर पर सजने-संवरने का आदेश

Thu, 02 Apr 2020 10:55 AM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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फाइल फोटो - फोटो : PTI
कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप से हर देश परेशान हैं। इसके संकट को कम करने के लिए हर देश अपने ओर से कोई न कोई जरूरी कदम उठा रहा है। इसी बीच कोरोना वायरस को लेकर मलयेशिया की सरकार ने अजीबोगरीब सलाह दी है। मलयेशिया के महिला और परिवार कल्याण मंत्रालय ने लॉकडाउन को ध्यान में रखते हुए घर से काम कर रहीं महिलाओं को शांति बनाए रखने की सलाह दी है। इसके साथ ही सरकार ने एक पोस्टर जारी करते हुए कहा है कि महिलाओं को घर पर भी हमेशा की तरह सजने-संवरने के साथ अच्छे कपड़े पहनने चाहिए। हालांकि सरकार के इस सलाह की अब चौतरफा आलोचना हो रही है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
मलयेशिया सरकार ने लॉकडाउन को ध्यान में रखकर सोशल मीडिया पर लिखा है कि महिलाओं के लिए इतनी लंबी छुट्टियां और घर से काम करना मुश्किल हो सकता है क्योंकि अक्सर उनका ध्यान भटक जाता है। अगर उनके पार्टनर से घर के काम में कोई गलती हो जाती है तो उसे ज्यादा तूल ना दें। जब सरकार के इस सलाह की आलोचना होने लगी तो उसने पोस्ट को हटा लिया।
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घरेलू हिंसा - फोटो : pixabay
मंत्रालय ने एक पोस्टर के जरिए सोफे पर आराम करते हुए एक शख्स की तस्वीर के साथ लिखा था कि अगर आप अपने पार्टनर को कुछ गलत करते हुए देखती हैं तो नजअंदाज करें। शिकायत ना कर आप उनसे मजाकिया अंदाज का इस्तेमाल करते हुए कार्टून की आवाज में बोल सकती हैं। वहीं, कुछ पोस्ट में महिलाओं से कहा गया कि वे अपने पतियों से घर के काम में मदद मांगते वक्त तंज वाले लहजे का इस्तेमाल ना करें। यदि आपको गुस्सा आए तो 20 तक उल्टी गिनती गिने और समझदारी से काम लेते हुए शांत रहें।

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कोरोना वायरस और दुनिया - फोटो : पीटीआई
मंत्रालय के द्वारा जारी इस एडवाइजरी की महिला संगठनों ने आलोचना की है। 'ऑल वुमेन्स ऐक्शन सोसाइटी' ने कहा कि मेक-अप करने और अच्छा दिखने के अलावा महिलाओं के पास और भी बहुत काम होते हैं। महिलाएं भी इंसान हैं, कोई सामान नहीं। 
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कोरोना वायरस - फोटो : सोशल मीडिया
महिला संगठन ने लिखा कि लॉकडाउन में घर से काम करते हुए अनुशासन में रहना, ऑफिस रूटीन फॉलो करना और ठीक तरह से ड्रेसिंग करना एक तरीका हो सकता है लेकिन लुक और मेकअप पर जोर देने की सलाह गैर-जरूरी है। मंत्रालय को इस तरह के महिला विरोधी बयान देने के बजाय घरेलू हिंसा पीड़ितों पर ध्यान देना चाहिए। इस समय सबसे ज्यादा खतरे में महिलाएं ही हैं।
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