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चॉक को तराशकर स्कल्पचर बना देता है ये शख्स, अमिताभ बच्चन भी कर चुके हैं तारीफ

Wed, 12 Aug 2020 08:42 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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स्कल्पचर - फोटो : सोशल मीडिया
बेंगलुरु के रहने वाले सचिन सांघे पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। लेकिन अपना ज्यादातर समय चॉक पर आर्ट वर्क कर के गुजराते हैं। सचिन के द्वारा तैयार किए गए स्कल्पचर को देखकर ऐसा लगता है कि जैसे ये किसी सांचे में ढालकर बनाए गए हैं। देवी-देवताओं की आकृति से लेकर सेलिब्रिटी के पोट्रेट को सचिन छोटी सी चॉक पर उकेर देते हैं।
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स्कल्पचर - फोटो : सोशल मीडिया
माइक्रो स्कल्पचर कलाकार सचिन सांघे ने पेंसिल की नोक पर अमिताभ बच्चना का चेहरा उकेरा और आठ घंटे की मेहनत का फल बताते हुए ट्विटर पर शेयर कर दिया। पेंसिल की नोंक पर अपना चेहरा देखकर अमिताभ बच्चन भी दंग रह गए और उन्होंने सचिन के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा कि अरे बाप रे...अद्भुत है यह! बहुत-बहुत धन्यवाद। सचिन ने इंडियन सेलिब्रिटी समेत 200 से अधिक चॉक के मिनिएचर बनाए हैं।
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स्कल्पचर - फोटो : सोशल मीडिया
स्कूल समें पढ़ाई के समय ही लगा शौक
सचिन हाई स्कूल में पढ़ते समय हमेशा ब्लैकबोर्ड पर नोट्स लिखते थे। इसी दौरान उनका चॉक से खास रिश्ता जुड़ गया। उन्होंने अपने ज्योमेट्री टूल्स की मदद से चॉक पर कारीगरी करना शुरू कर दी। समय के साथ-साथ उनकी यह कला और बेहतर होने लगी। लेकिन इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाई के वजह से वो इस काम से दूर हो गए। नौकरी लग जाने के बाद सचिन ने फिर से अपने कला पर ध्यान देना शुरू कर दिया।

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स्कल्पचर - फोटो : सोशल मीडिया
सबसे पहले भगवान महावीर का स्कल्पचर
सचिन ने सबसे पहले चॉक पर कलाकारी की शुरुआत अक्षर और नाम उकेरने से की थी। फिर वो इसे अपने सगे-संबंधियों को गिफ्ट दे देते थे। सचिन का जब हाथ अच्छे से सध गया, तो उन्होंने सबसे पहले भगवान महावीर की मुर्ति बनाई थी। चॉक मुर्ती कला के साथ सचिन माइक्रो मुर्ति कला में भी प्रवीण होते चले गए।
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स्कल्पचर - फोटो : सोशल मीडिया
ताजमहल का स्कल्पचर बनाने में 80 घंटे लगे
सचिन ने बताया कि इंटरनेट की सुविधा ना होने की वजह से सीखने का कोई जरिया नहीं था। साधारण चॉक स्कल्पचर बनाने में पांच से छह घंटे, तो वहीं मुश्किल स्कल्पचर में 130 घंटे का समय लग जाता था। ताजमहल का स्कल्पचर तैयार करने में 80 घंटे लगे थे। यह काम करते हुए सचिन को 15 वर्ष हो चुके हैं।
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