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200 साल पुराने इस मंदिर में होती है मेंढक की पूजा, हैरान कर देगा इसके पीछे का रहस्य

Sun, 21 Apr 2019 05:55 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला
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मेंढक मंदिर - फोटो : Twitter
भारत में ऐसे कई मंदिर हैं, जो अपने आप में अजूबा हैं। अब तक तो आपने ऐसे ही मंदिरों के बारे में सुना और देखा होगा, जहां अलग-अलग देवताओं की पूजा होती है। लेकिन क्या आपने कभी ऐसे मंदिर से बारे में सुना है, जहां मेंढक की पूजा होती है।   
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भगवान शिव - फोटो : Social media
यह अनोखा मंदिर उत्तरप्रदेश के लखीमपुर-खीरी जिले के ओयल कस्बे में स्थित है। यह भारत का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां मेंढक की पूजा होती है। बताया जाता है कि यह जगह ओयल शैव संप्रदाय का प्रमुख केंद्र था और यहां के शासक भगवान शिव के उपासक थे। इस कस्बे के बीच मंडूक यंत्र पर आधारित प्राचीन शिव मंदिर भी है। 
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मेंढक मंदिर - फोटो : Social media
यह क्षेत्र 11वीं सदी से 19वीं सदी तक चाहमान शासकों के आधीन रहा था। चाहमान वंश के राजा बख्श सिंह ने ही इस अनोखे मंदिर का निर्माण कराया था। 

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मेंढक मंदिर - फोटो : Social media
कहते हैं कि इस मंदिर की वास्तु परिकल्पना कपिला के एक महान तांत्रिक ने की थी। तंत्रवाद पर आधारित इस मंदिर की वास्तु संरचना अपनी विशेष शैली के कारण लोगों का मनमोह लेती है। 
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मेंढक मंदिर - फोटो : Social media
बताया जाता है कि ये मंदिर करीब 200 साल पुराना है। मान्यता है कि सूखे और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा से बचाव के लिए इस मंदिर का निर्माण कराया गया था। मेंढक मंदिर में दीपावली के अलावा महाशिवरात्रि पर भी भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। 

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