रैली निकालते हुए
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फिर शुरू हुई आवाज की तलाश
इसके बाद बिहार सरकार ने गीत को गाने के लिए आवाज़ की तलाश शुरू की। आखिरकार, चयन हुआ बिहार की बेटी अनुराधा सिंह का, जिनकी आवाज में मिट्टी की सोंधी महक थी। अनुराधा ने इस गीत को इतनी भावनात्मक गहराई से गाया कि यह गीत न सिर्फ बिहारवासियों के दिलों में जगह बना गया, बल्कि हर साल 22 मार्च को पूरे राज्य में गूंजने लगा।
पहली बार 2012 में गीत के माध्यम से बिहार की गौरव गाथा को जाना
2012 में पहली बार "बिहार गौरव गाथा" का उद्घाटन हुआ और यह इतना लोकप्रिय हुआ कि अब यह बिहार दिवस का आधिकारिक गीत बन गया। स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी कार्यक्रमों में इसे बजाया जाता है और हर बार लोग इसके साथ भावुक हो जाते हैं। यह गीत सिर्फ बिहार की उपलब्धियों का बखान नहीं करता, बल्कि यह हर बिहारी के दिल में गर्व और आत्मसम्मान की भावना भर देता है। गीत की पंक्तियां आज भी बिहार के विकास और स्वाभिमान की आवाज़ बनकर गूंजती हैं। "बिहार गौरव गाथा" सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि बिहार की आत्मा और उसके संघर्ष की कहानी है, जो हर साल 22 मार्च को करोड़ों दिलों में नया उमंग और जोश भर देती है।
बिहार दिवस 2025 की दिखेगी झलक
इस वर्ष बिहार दिवस की थीम "सशक्त बिहार, समृद्ध बिहार" रखी गई है। इस थीम के तहत राज्य सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण, ग्रामीण विकास और शिक्षा पर विशेष फोकस किया है।
आज ये है कार्यक्रम
पटना के गांधी मैदान और श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। स्कूलों और कॉलेजों में बिहार की सांस्कृतिक धरोहर पर निबंध और वाद-विवाद प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प और ग्रामीण उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए पटना, गया और मुजफ्फरपुर में विशेष प्रदर्शनियां लगाई गई है।
बिहार के प्रगति व सामाजिक इतिहास को याद करने का है दिन
बिहार दिवस न केवल इतिहास को याद करने का दिन है, बल्कि यह राज्य की प्रगति, सामाजिक सुधार और आर्थिक विकास पर विचार करने का अवसर भी प्रदान करता है। मुख्यमंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्तियों द्वारा इस दिन प्रदेशवासियों को संबोधित किया जाता है।
राज्य सरकार की पहल
बिहार सरकार इस अवसर पर कई विकास परियोजनाओं का शुभारंभ करती है। इस बार कृषि क्षेत्र में नवाचार, शिक्षा में डिजिटल परिवर्तन और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की योजनाओं की घोषणा की गई है। बिहार दिवस सिर्फ सरकारी आयोजनों तक सीमित नहीं है। आम जनता भी इस दिन को बड़े उत्साह से मनाती है। स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। बिहार दिवस सिर्फ इतिहास को याद करने का मौका नहीं, बल्कि यह दिन बिहार की उन्नति और विकास के संकल्प को दोहराने का भी प्रतीक है।
...रंजन सिन्हा, गया