उज्ज्वल बिहार महासत्संग मुंगेर में आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर
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‘योग और ध्यान केवल प्रदर्शन नहीं, यह आत्मदर्शन है’
अपने संबोधन में श्री श्री रविशंकर ने कहा कि योग की शक्ति प्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि आत्मदर्शन और आत्मशुद्धि के लिए होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मनुष्य को ज्ञान के पथ पर चलना चाहिए, क्योंकि यह सभी समस्याओं का समाधान है। ध्यान से शरीर को शक्ति मिलती है और बुद्धि में तीव्रता आती है। उन्होंने कहा कि परमात्मा की कृपा से कुछ भी दुर्लभ नहीं होता। अगर श्रद्धा हो, तो सब कुछ सहज ही प्राप्त हो सकता है।
स्वस्थ और प्रसन्नचित रहने के पांच मूल मंत्र बताए
महासत्संग में उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को एक संतुलित और प्रसन्नचित्त जीवन के लिए पांच मूल मंत्र दिए। इनमें हर परिस्थिति में प्रसन्नचित्त रहना, जो जैसा है उसे उसी रूप में स्वीकार करना, दूसरों के विचारों को अपने ऊपर हावी न होने देना, नफरत करने वाले को अपने मन से बाहर करना और वर्तमान में जीने की आदत डालना शामिल हैं। उन्होंने कहा कि जब हम दूसरों की भूलों में उलझ जाते हैं, तो अपना उद्देश्य खो बैठते हैं। हमें अपने जीवन की दिशा स्वयं तय करनी चाहिए।