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बिहार में बाढ़ की मार: शेखपुरा में हरोहर नदी का रौद्र रूप, घरों में घुसा पानी, बच्चों को स्कूल जाने में कठिनाई

Sun, 22 Sep 2024 06:24 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शेखपुरा

सार

बिहार में बाढ़ की मार: शेखपुरा में हरोहर नदी का रौद्र रूप, घरों में घुसा पानी, बच्चों को स्कूल जाने में कठिनाई
Sheikhpura flood: Harohar river takes terrible form, water enters houses, school children facing difficulties
 
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रिहायशी इलाका हुआ जलमग्न - फोटो : अमर उजाला
शेखपुरा के घाटकुसुम्भा प्रखंड में हरोहर नदी ने अपना रौद्र रूप धारण कर लिया है, जिससे कई घरों और स्कूलों में बाढ़ का पानी घुस गया है। निचले इलाकों में बसे लोग पलायन करने को विवश हो गए हैं। जबकि स्कूल खुले रहने के कारण बच्चों को पानी में घुसकर स्कूल जाना पड़ रहा है, जिससे किसी अप्रिय घटना का खतरा बना हुआ है।
 
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बच्चों को स्कूल जाने में हो रही काफी दिक्कत - फोटो : अमर उजाला
नदी का उफान और प्रशासन की नजर
घाटकुसुम्भा की हरोहर नदी, गंगा नदी की सहायक है, जो गंगा पर दबाव पड़ने पर उफान पर आ जाती है। इस स्थिति ने लोगों का मुख्यालय से संपर्क तोड़ दिया है। जिला प्रशासन ने स्थिति पर नजर रखने के लिए अधिकारियों को दौरा करने का निर्देश दिया है। रविवार को डीएम आरिफ अहसन ने प्रखंड की पंचायतों का दौरा कर स्थिति का अवलोकन किया और संबंधित विभागों को अलर्ट मोड़ पर रहने का आदेश दिया।
 
बाढ़ के समाधान में निराशा का सामना 
स्थानीय लोग बताते हैं कि हर साल आने वाली बाढ़ उनके लिए बदकिस्मती लेकर आती है। वर्षों से शासन-प्रशासन की अनदेखी के चलते लोग जलमग्न घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेते हैं। मानसून के आने से पहले ही उन्हें राशन जुटाने और ऊंचे स्थानों की तलाश करने की चिंता सताने लगती है।
 
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कहीं भी जाने के लिए नाव ही एकमात्र सहारा - फोटो : अमर उजाला
पानापुर पंचायत की बाढ़ की सबसे अधिक शिकार 
घाटकुसुम्भा प्रखंड में पानापुर, जितपारपुर, और प्राणपुर गांव के लोग हरोहर, सोमे और सोता नदी से घिरे हैं। इन गांवों में नाव के सहारे ही जीवन यापन होता है। सोमे नदी पर पुल न होने के कारण चार महीने नाव और आठ महीने चचरी पुल का सहारा लेना पड़ता है। हर साल बाढ़ के कारण इन गांवों के कई घर नदी में समा जाते हैं, जिससे ग्रामीणों का जीवन कठिन हो जाता है।
 
बाढ़ के पानी के बढ़ने से कई गांव टापू में तब्दील हो जाते हैं। बिना यातायात के साधनों के, लोग जरूरी काम के लिए नाव पर सवार होकर आधे से एक घंटे की दूरी तय कर प्रखंड और जिला मुख्यालय पहुंचते हैं। बीमार और गर्भवती महिलाओं को भी नाव पर लाया जाता है। बाढ़ के दिनों में गांव चारों ओर से पानी में घिरकर टापू बन जाता है, जिससे जीवन यापन बेहद मुश्किल हो जाता है।
 
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उफान पर है नदी - फोटो : अमर उजाला
ऊंचे स्थानों पर अस्थायी बसेरा
पानापुर पंचायत के लोग बाढ़ के समय बांध और कच्ची सड़क पर शरण लेने को मजबूर होते हैं। पन्नी लगाकर अपने पशुओं के साथ दर्जनों परिवार बाढ़ से तबाही का सामना करते हैं। यहां के लोग बताते हैं कि उंची सड़कों और सोमे नदी पर बने पुल पर ही उनकी जिंदगी गुजरती है। बाढ़ ने एक बार फिर इस क्षेत्र के लोगों को मुसीबत में डाल दिया है, और उनकी परेशानियों का हल खोजने के लिए प्रशासन को सक्रियता से काम करना होगा।
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