सहरसा शहर के पटेल मैदान के पास लगभग 50 साल पुराने हवाई अड्डे का रनवे, जहां कभी-कभार नेताओं के हवाई जहाज उतरते और उड़ान भरते हैं, अब युवाओं की सैर और रेस का मैदान बन चुका है। यहां प्रतिदिन सुबह के वक्त लोग सैर के लिए आते हैं और युवा साइकिल और बाइक पर रेस लगाते हैं। हवाई अड्डे के इस दृश्य के बारे में सुनने में भले ही अटपटा लगे, लेकिन सहरसा के इस हवाई अड्डे की यही सच्चाई है।
जानकारी के मुताबिक, दरभंगा और पूर्णिया जैसे आसपास के जिलों से जहां हवाई सेवाएं संचालित हो रही हैं। वहीं, सहरसा हवाई अड्डे को लेकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता इसे उपेक्षित बनाए हुए है। क्षेत्र के लोग पटना और दरभंगा से रोज हवाई यात्रा करते हैं, लेकिन इस हवाई अड्डे को विकसित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। अगर इसे विकसित किया जाए तो यहां से भी विमान सेवाओं की शुरुआत हो सकती है, जो कोसी जैसे पिछड़े इलाके के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। खासकर स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य महत्वपूर्ण मामलों को लेकर हवाई सेवा की जरूरत महसूस की जा रही है।