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Bihar Flood: औरंगाबाद में उफनाई पुनपुन नदी; रिहायशी इलाकों में घुसा बाढ़ का पानी, घर में कैद हुए लोग

Tue, 17 Sep 2024 08:20 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद

सार

Bihar Flood: औरंगाबाद में उफनाई पुनपुन नदी; रिहायशी इलाकों में घुसा बाढ़ का पानी, घर में कैद हुए लोग
Bihar Flood: Water of overflowing Punpun river in Aurangabad entered residential areas, people trapped
 
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बाढ़ के पानी से अस्त व्यस्त हुआ लोगों का जीवन - फोटो : अमर उजाला
पिछ्ले चार दिनों से लगातार हो रही बारिश से पुनपुन नदी अपने अंतिम छोर वाले बिहार की राजधानी पटना के ग्रामीण इलाकों में जहां खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। वहीं, इस नदी का बढ़ा हुआ पानी अपने उद्गम वाले इलाके औरंगाबाद के नबीनगर और आसपास के क्षेत्रों में भी कहर बरपा रहा है। पिछले चार दिनों यानी शनिवार से हो रही बारिश से नवीनगर प्रखंड में पुनपुन नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा और नदी उफान मार रही है। पुनपुन नदी के बाढ़ के पानी से नबीनगर क्षेत्र के कई रिहायशी इलाके जलमग्न हो गए हैं। भारी बारिश से नदी में आई बाढ़ से नबीनगर शहर के कई वार्ड पानी में डूबे हुए हैं। इस कारण लोगों के लिए घर से निकलना मुश्किल हो गया है।

शहर के वार्ड नंबर 6, 12 और 13 के लोग बाढ़ के पानी के भराव से काफी परेशान हैं। वहीं, नबीनगर-टंडवा मुख्य पथ पूरी तरह से बाढ़ की चपेट में आ गया है। इस कारण इस पथ पर आवागमन प्रभावित हुआ है। बाढ़ से उफन रही पुनपुन नदी ने नबीनगर में तट का अतिक्रमण करने वालों से भी बदला लिया है और अतिक्रमण वाले तटवर्ती इलाके में भी बाढ़ का पानी घुस आया है। इस वजह से नबीनगर-टंडवा मुख्य पथ पर बस स्टैंड के पास पथ पर ही पानी भर जाने से लोगों को आवागमन में भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
 
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बाढ़ के पानी से अस्त व्यस्त हुआ लोगों का जीवन - फोटो : अमर उजाला
गौरतलब है कि पूर्व में पुनपुन नदी को अतिक्रमण मुक्त कराने की मुहिम चलाई गई थी, लेकिन वह फाइलों में ही दफन होकर रह गई। संभवतः फाइलों में ही पुनपुन नदी को अतिक्रमण मुक्त करा लिया गया। इसी वजह से पुनपुन नदी के बाढ़ के पानी के तटवर्ती इलाकों में घुसने की समस्या जस की तस बनी हुई है। कुल मिलाकर यह कहा जाए तो पुनपुन नदी ने खुद ही अतिक्रमण मुक्त कराने को लेकर नबीनगर नगर पंचायत से लेकर हर स्तर के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई की पोल खोल दी है। इस मामले में अधिकारी भी उदासीन बने हुए हैं। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि निचले स्तर पर बने घरों और दुकानों से पानी भी निकाला नहीं जा सकता है, क्योंकि पानी की निकासी का कोई विकल्प ही नहीं है। यहां का पानी तभी निकलेगा जब पुनपुन नदी का जलस्तर घटेगा। जब तक नदी का जलस्तर नहीं घटेगा तब तक बाढ़ का पानी जमा रहेगा।
 
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बाढ़ के पानी से अस्त व्यस्त हुआ लोगों का जीवन - फोटो : अमर उजाला
जानकारी के मुताबिक, अभी बाढ़ का पानी आधा फुट तक ही पहुंचा है। नदी का जलस्तर जिस हिसाब से बढ़ रहा है, उस हिसाब से अन्य जगहों में भी पानी घुसने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। इसे लेकर अभी से ही लोग चिंता करने लगे हैं। वहीं, पुनपुन नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि से इलाके के किसान भी बाढ़ की आशंका से व्यथित दिख रहे हैं। किसानों का कहना है कि अगर पुनपुन नदी के जलस्तर में इसी तरह वृद्धि होती रही तो हम लोगों की धान की फसल डूबकर नष्ट हो जाएगी। उन्होंने कहा कि इस बार मॉनसून का साथ मिलने से धान की फसल काफी अच्छी है। अगर इसी तरह नदी का जल स्तर बढ़ता रहा तो फसल डूबने से हम लोगों के मुंह का निवाला भी छिन जाएगा।

वहीं, लगातार बारिश से व्यवसायियों में भी उदासी देखी जा रही है। व्यवसायियों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण व्यवसाय पर भी बुरा असर दिख रहा है। बारिश से आम जनमानस से लेकर पशु-पक्षी सभी प्रभावित दिख रहे हैं। आम जनजीवन अस्त व्यस्त सा हो गया है। उल्लेखनीय है कि पुनपुन नदी नबीनगर प्रखंड में ही टंडवा के पास झारखंड की सीमा से निकली है। यहां से निकलकर यह नदी पटना में फतुहा के पास गंगा नदी में विलीन हो जाती है।
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बाढ़ के पानी से अस्त व्यस्त हुआ लोगों का जीवन - फोटो : अमर उजाला
इस बीच औरंगाबाद के जिलाधिकारी श्रीकांत शास्त्री ने नबीनगर प्रखंड के विभिन्न बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया है। उन्होंने जल भराव वाले कई इलाकों का निरीक्षण कर ग्रामीणों से बात की है। साथ ही अधिकारियों को सजग रहकर कार्य करने और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का लगातार निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी संबंधित पदाधिकारियों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में किसी प्रकार की कोई समस्या न हो इसके लिए समय से पहले पूरी तरह तैयारी करने के भी निर्देश दिए है। इस दौरान आपदा प्रभारी रत्ना प्रियदर्शनी, संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचलाधिकारी, आरडबल्यूडी के कार्यपालक अभियंता एवं लघु सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता भी मौजूद रहे।
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