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गंगा के बढ़ते जलस्तर से संकट गहराया: बेगूसराय में दर्जनों गांव का मुख्यालय से संपर्क टूटा, ग्रामीणों में दहशत

Fri, 04 Sep 2026 04:35 PM IST
मुंगेर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला मुंगेर

सार

बेगूसराय के बलिया प्रखंड के दियारा इलाके में गंगा का जलस्तर बढ़ने और लगातार बारिश से बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। कई गांवों में पानी घरों तक पहुंच गया है, सड़कें जलमग्न होने से संपर्क टूट गया है। चलिए तस्वीरों के जरिए देखते हैं कैसे हैं मौजूदा हालात?
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मूसलाधार बारिश ने बाढ़ की भयावहता और बढ़ा दी है। - फोटो : अमर उजाला

बेगूसराय व बलिया में गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच रुक-रुककर हो रही मूसलाधार बारिश ने बाढ़ की भयावहता और बढ़ा दी है। बलिया प्रखंड के दियारा इलाके में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं।

भवानंदपुर पंचायत के शिवनगर, साहपुर, मसूदनपुर और भवानंदपुर समेत कई गांवों में बाढ़ का पानी घरों में घुस चुका है। सैकड़ों परिवारों के सामने अब घर बचाने के साथ-साथ अपनी जान और मवेशियों को सुरक्षित रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।

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गांव की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। - फोटो : अमर उजाला

शिवनगर के चारों तरफ पानी, गांव के आगे-पीछे बह रही गंगा
शिवनगर स्थित मध्य विद्यालय के परिसर में चार फीट से अधिक पानी जमा हो गया है। गांव की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार, शिवनगर के आगे और पीछे दोनों तरफ गंगा की मुख्य धारा बहने लगी है। ऐसे में गांव के लोग लगातार बढ़ते पानी को देखकर सहमे हुए हैं और सुरक्षित एवं ऊंचे स्थानों की ओर जाने की तैयारी कर रहे हैं।

सबसे बड़ी परेशानी पशुपालकों के सामने है। कई टोलों में मवेशियों को बांधने तक के लिए सुरक्षित जमीन नहीं बची है। मजबूरी में लोगों को पानी के बीच अपने पशुओं को रखना पड़ रहा है।

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प्रखंड क्षेत्र की प्रमुख सड़कों पर भी फैल गया है। - फोटो : अमर उजाला

तीन से पांच फीट पानी में डूबीं सड़कें, दर्जनों गांवों का संपर्क भंग
बाढ़ का पानी प्रखंड क्षेत्र की प्रमुख सड़कों पर भी फैल गया है। कई जगहों पर तीन से पांच फीट तक पानी जमा होने से सड़कें पूरी तरह जलमग्न हो गई हैं। शिवनगर, साहपुर, भवानंदपुर, मीरअलीपुर, ताजपुर, गोखलेनगर विष्णुपुर, शादीपुर, सहबेकपुर, शैयदपुर, नगरगामा, अशर्फा, नौरंगा, पहाड़पुर, कमालपुर, सोनदीपी, परमानंदपुर, हसनपुर, किशनपुर, कस्बा, हुसैना, लालदियारा, सोनवर्षा, मिर्जापुर समेत कई गांवों का प्रखंड और अनुमंडल मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह भंग हो गया है।

नाव की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। जरूरी सामान, दवा और अन्य जरूरतों के लिए भी लोगों को पानी के बीच जोखिम उठाना पड़ रहा है।

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गंगा के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि - फोटो : अमर उजाला

एसडीओ ने नाव और टेंपो से पहुंचकर देखे बाढ़ के हालात
गंगा के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि को देखते हुए बलिया के प्रशिक्षु आईएएस अधिकारी सह एसडीओ अजय कुमार यादव ने गुरुवार को दियारा क्षेत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने नाव और टेंपो के माध्यम से मीरअलीपुर, मसूदनपुर और साहपुर पहुंचकर जमीनी स्थिति का जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए।

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जन-जीवन प्रभावित। - फोटो : अमर उजाला
एक-दो दिन में 2016 की बाढ़ का स्तर छू सकता है पानी

निरीक्षण के बाद एसडीओ अजय कुमार यादव ने कहा कि गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। आने वाले एक-दो दिनों में जलस्तर वर्ष 2016 में आई बाढ़ के स्तर तक पहुंचने की आशंका है। उन्होंने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से अपील की कि वे स्थिति और गंभीर होने का इंतजार न करें और समय रहते अपने परिवार तथा मवेशियों के साथ सुरक्षित एवं ऊंचे स्थानों पर चले जाएं।
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सड़कों में भरा पानी। - फोटो : अमर उजाला
चेचियाही ढाला बनेगा बाढ़ पीड़ितों का सहारा
प्रशासन की ओर से बाढ़ पीड़ितों के लिए चेचियाही ढाला पर राहत व्यवस्था शुरू करने की तैयारी है। एसडीओ के अनुसार, गुरुवार शाम से यहां रहने, भोजन और रोशनी की व्यवस्था की जाएगी। पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था भी की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित परिवारों तक हर संभव राहत पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
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स्कूल में भरा पानी। - फोटो : अमर उजाला
रील बनाने या गंगा में नहाने की गलती पड़ी भारी तो बचाना मुश्किल
बाढ़ के बीच गंगा की तेज धारा लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। एसडीओ ने लोगों को विशेष रूप से चेतावनी देते हुए कहा कि बढ़े जलस्तर के बीच गंगा में नहाने, छलांग लगाने या रील बनाने से पूरी तरह बचें। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के लिए कुछ सेकंड का रोमांच किसी परिवार की जिंदगी भर की त्रासदी बन सकता है।

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दियारा क्षेत्र में तेजी से बिगड़ते हालात की तस्वीर पेश कर रहे हैं। - फोटो : अमर उजाला
बाढ़ का संदेश साफ अब लापरवाही की नहीं, सतर्कता की जरूरत
गंगा का बढ़ता जलस्तर, गांवों में घुसता पानी, डूबी सड़कें और मुख्यालय से टूटता संपर्क दियारा क्षेत्र में तेजी से बिगड़ते हालात की तस्वीर पेश कर रहे हैं। प्रशासन राहत की तैयारी में जुटा है, लेकिन ग्रामीणों के लिए आने वाले एक-दो दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

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गंगा ने शहर में दी दस्तक, चार वार्डों में घुसा पानी
नगर निगम के लभरचक, कमरुद्दीनपुर, मुसनटोल और कैलाशपुर में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। पानी बढ़ने की रफ्तार तेज होते ही इलाके में अफरातफरी मच गई। कई परिवार पहले ही बांध पर शरण ले चुके हैं। बाकी परिवार भी धीरे-धीरे घर छोड़ने लगे हैं। जरूरी सामान बचाने की जद्दोजहद के बीच लोगों के सामने सबसे बड़ी चिंता बच्चों, बुजुर्गों और मवेशियों को सुरक्षित निकालने की है।

बांध पर बना अस्थायी आशियाना
घर में पानी घुसा तो लोगों ने बांध का रुख किया। लेकिन बांध पर भी जिंदगी मुश्किल है। न पक्का ठिकाना है और न ही पर्याप्त सुविधाएं। खुले आसमान के नीचे परिवार बैठे हैं और बगल में बंधे मवेशी भी इस आपदा के बीच असुरक्षित हैं।

बारिश और धूप से बचने के लिए लोग प्लास्टिक शीट की मांग कर रहे हैं। भोजन, पीने का पानी, दवा और पशुओं के चारे की चिंता लगातार बढ़ रही है।

तेघड़ा में इंसान के साथ मवेशियों को बचाने की जंग
तेघड़ा के बाढ़ प्रभावित इलाकों में पानी फैलने के बाद परिवार सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की तलाश में निकल रहे हैं। कई लोग अपने पशुओं को भी साथ लेकर जा रहे हैं। सवाल सिर्फ घर बचाने का नहीं है, बल्कि वर्षों से परिवार का सहारा रहे पशुओं को बचाना भी लोगों की मजबूरी है। राहत शिविरों और जरूरी सुविधाओं को लेकर भी प्रभावित लोगों में चिंता बनी हुई है।

साहेबपुरकमाल में गांवों पर सैलाब का शिकंजा
साहेबपुरकमाल में गंगा का उफान कई इलाकों के लिए मुसीबत बन गया है। सलेमाबाद, ज्ञान टोल, बहलोरिया छर्रा पट्टी, श्रीनगर, रघुनाथपुर और हीराटोल में बाढ़ का पानी पहुंचने से सैकड़ों घर प्रभावित हुए हैं।

कहीं घर के आंगन में पानी है तो कहीं कमरों तक पानी पहुंच चुका है। कई परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर निकल चुके हैं, जबकि कुछ लोग मजबूरी में घरों की छतों पर टिके हुए हैं।

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बाढ़ से बिगड़ रहे हालात। - फोटो : अमर उजाला

चूल्हे पर पानी, छत पर परिवार!
बाढ़ ने सबसे जरूरी चीजों के लिए भी संकट खड़ा कर दिया है। घर में पानी घुसने से खाना बनाना मुश्किल हो गया है। पीने के पानी की समस्या भी बनी हुई है। बच्चों और बुजुर्गों को लेकर परिवार डरे हुए हैं। छत पर बैठे लोगों की नजर बार-बार पानी के स्तर पर जा रही है। हर इंच बढ़ता पानी उनके डर को और गहरा कर रहा है।

अगर पानी और बढ़ा तो?
सबसे बड़ा डर यही है। प्रभावित इलाकों में पानी लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में राहत और बचाव व्यवस्था पर दबाव बढ़ना तय है। बाढ़ पीड़ितों की मांग है कि प्रशासन तत्काल नाव, भोजन, शुद्ध पेयजल, दवा, प्लास्टिक शीट और पशुचारा उपलब्ध कराए तथा जरूरत वाले इलाकों में पर्याप्त राहत शिविर बनाए।

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