केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा कि केंद्र सरकार मवेशियों को सड़क पार करने और खतरनाक दुर्घटनाओं का कारण बनने से रोकने के लिए भारत में राजमार्गों पर बाहु बल्ली केटल फेंस (बाहु बल्ली मवेशी बाड़) लगाने की योजना बना रही है। गडकरी ने कहा, बहु बल्ली मवेशी बाड़ 1.20 मीटर ऊंची होगी और इसे एक व्यापक समाधान के रूप में शुरू करने के लिए नेशनल हाईवे-30 के सेक्शन 23 पर लगाया जाएगा।
इस बात की जानकारी गडकरी ने अपने ट्विटर हैंडल से साझा की। उन्होंने आगे कहा, "यह इंस्टॉलेशन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छत्तीसगढ़ यात्रा से पहले एक प्रदर्शन के रूप में काम करेगा।"
बाड़ की तस्वीरें साझा करते हुए, गडकरी ने कहा कि बांस का इस्तेमाल करके बने मवेशी बाड़, मवेशियों को दुर्घटना से बचाने के लिए एक प्रभावी और पर्यावरण-अनुकूल समाधान प्रदान करती है। उन्होंने कहा, "बांस को क्रेओसोट तेल से उपचारित किया जाता है और इस पर एचडीपीई लगाया जाता है, जिससे यह स्टील का एक मजबूत विकल्प बन जाता है।" सुरक्षा और लॉन्ग लाइफ करने के लिए बाड़ को क्लास-1 की फायर रेटिंग हासिल है। गडकरी ने कहा, बहु बल्ली मवेशी बाड़ का मकसद सभी राजमार्गों को टिकाऊ बनाना और वन्यजीवों और मवेशियों को कम से कम नुकसान पहुंचाना है।
अन्य खबरों में, महाराष्ट्र में चंद्रपुर और यवतमाल जिलों को जोड़ने वाले विदर्भ में वाणी-वरोरा हाईवे पर सरकार द्वारा 200 मीटर का बांस क्रैश बैरियर लगाया गया था।
नितिन गडकरी ने कहा कि बैंबू क्रैश बैरियर का इंदौर के पीथमपुर में नेशनल ऑटोमोटिव टेस्ट ट्रैक्स (NATRAX) जैसे विभिन्न सरकारी संस्थानों में कठोर परीक्षण किया गया और सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई)रुड़की में में आयोजित फायर रेटिंग टेस्ट के दौरान इसे क्लास 1 का दर्जा दिया गया।
इसके अलावा, बैरियर को इंडियन रोड कांग्रेस द्वारा भी मान्यता दी गई थी। मंत्री ने कहा कि बांस बैरियर की रिसाइकल वैल्यू 50-70 प्रतिशत है, जबकि स्टील बैरियर की रिसाइकल वैल्यू 30-50 प्रतिशत है।