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Road Accidents: इस भारतीय राज्य में 2025 में अब तक हुईं 13,000 से अधिक सड़क दुर्घटनाएं, लगभग 7,700 मौतें दर्ज

Wed, 28 May 2025 02:10 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

उत्तर प्रदेश में इस साल 1 जनवरी से 20 मई के बीच सड़क हादसों की संख्या 13,000 से ज्यादा रही, जिनमें लगभग 7,700 लोगों की जान चली गई। ये आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं और राज्य में सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाते हैं।
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Road Accidents - फोटो : Amar Ujala
उत्तर प्रदेश में इस साल 1 जनवरी से 20 मई के बीच सड़क हादसों की संख्या 13,000 से ज्यादा रही, जिनमें लगभग 7,700 लोगों की जान चली गई। ये आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं और राज्य में सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाते हैं। अगर पिछले वर्षों से तुलना करें तो 2024 में कुल 46,052 सड़क दुर्घटनाएं हुई थीं, जिनमें 24,118 मौतें और 34,665 लोग घायल हुए थे। वहीं 2023 में ये संख्या थोड़ी कम थी। जब 44,534 हादसों में 23,652 लोगों की मौत हुई थी और 31,098 लोग घायल हुए थे।

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Road Accidents - फोटो : Amar Ujala
दोपहर और शाम के समय सबसे ज्यादा खतरा
एक नई राज्य स्तरीय रिपोर्ट के अनुसार, दोपहर और शाम के समय सड़क हादसों की संख्या सबसे ज्यादा पाई गई है। रिपोर्ट में बताया गया कि कुल हादसों में से 60 प्रतिशत से अधिक घटनाएं दोपहर 12 बजे से शाम 6 बजे के बीच और शाम 6 बजे से रात 9 बजे के बीच हुईं। ये विश्लेषण उत्तर प्रदेश सड़क सुरक्षा और जागरूकता सेल द्वारा किया गया है। जिसमें iRAD (इंटीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट्स डेटाबेस), eDAR (ई-डिटेल्ड एक्सीडेंट रिकॉर्ड) और राज्य के अपने रोड सेफ्टी डैशबोर्ड से लिए गए आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है।

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Road Accidents - फोटो : Amar Ujala
सबसे जानलेवा साबित हो रही दोपहर
रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि दोपहर का समय सबसे खतरनाक साबित हो रहा है। इस साल 1 जनवरी से 20 मई के बीच दोपहर के वक्त 4,352 हादसे हुए, जिनमें 2,238 लोगों की जान गई। इसकी वजहें बताई गई हैं- जैसे भीषण गर्मी, ड्राइवरों की थकान, तेज रफ्तार और इस समय सड़क पर वाहनों की अत्यधिक भीड़।

शाम के समय यानी 6 बजे से 9 बजे के बीच 3,254 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 1,945 लोगों की मौत हुई। यह समय दफ्तर से लौटते लोगों की भारी भीड़ और सूरज ढलने के बाद कम होती रोशनी की वजह से और खतरनाक हो जाता है। 
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Road Accidents - फोटो : Amar Ujala
सुबह और देर रात भी सुरक्षित नहीं
सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच भी 2,629 हादसे हुए, जिनमें 1,447 मौतें दर्ज की गईं। यह समय तुलनात्मक रूप से थोड़ा सुरक्षित माना गया है, लेकिन स्कूल और ऑफिस जाने वाले लोगों की आवाजाही के कारण इसमें भी खतरा बना रहता है।

रात 9 बजे से सुबह 3 बजे तक 2,585 दुर्घटनाएं हुईं और इनमें 1,699 लोगों की जान गई। इस दौरान सड़कें अपेक्षाकृत खाली होती हैं, जिससे ड्राइवर तेजी से वाहन चलाते हैं। ऊपर से नींद की कमी और थकावट हादसों को और भी घातक बना देती है।

सबसे कम हादसे तड़के 3 बजे से सुबह 6 बजे के बीच दर्ज किए गए जो कि सिर्फ 506 है। लेकिन इस दौरान हुई मौतों की संख्या 392 रही, जो कि बेहद खतरनाक ट्रेंड को दिखाती है। इस समय की मृत्यु दर करीब 77 प्रतिशत रही, जो सभी समयों में सबसे ज्यादा है।

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Road Accidents - फोटो : Amar Ujala
थकान और नींद की कमी बनीं बड़ी वजहें
अध्ययन में यह भी सामने आया कि जो ड्राइवर नींद पूरी नहीं लेते, या लंबे समय तक गाड़ी चलाने वाले मालवाहक ड्राइवर होते हैं, वे इन जानलेवा हादसों के सबसे बड़े कारण बनते हैं। रिपोर्ट में साफ कहा गया कि दिन के समय भले ही हादसे ज्यादा होते हों। लेकिन रात और सुबह के समय होने वाले हादसे कहीं ज्यादा जानलेवा होते हैं।

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Road Accidents - फोटो : Amar Ujala
सरकार की प्रतिक्रिया और सख्त कदम
इन खतरनाक आंकड़ों को देखते हुए उत्तर प्रदेश की सड़क सुरक्षा इकाई ने सिफारिश की है कि खतरनाक समयों में विशेष रूप से पुलिस तैनात की जाए, स्पीड मॉनिटरिंग के लिए आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया जाए, और सीसीटीवी की मदद से नियमों के उल्लंघन पर तुरंत कार्रवाई हो।

यह रिपोर्ट न सिर्फ सड़क सुरक्षा की असलियत दिखाती है। साथ ही यह भी बताती है कि अब सिर्फ जागरूकता से नहीं, बल्कि कड़े नियमों और सख्ती से ही इन हादसों को रोका जा सकता है। 

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