Car
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उपभोक्ताओं की पसंद में बदलाव
पिछले कुछ वर्षों में लोगों की खरीदारी की सोच बदली है। अब ग्राहक सिर्फ नई गाड़ी ही नहीं देख रहे, बल्कि वैल्यू फॉर मनी, आसान फाइनेंस और डिजिटल सुविधा की वजह से सेकंड हैंड कारों की तरफ भी बढ़े हैं। इस साल भारत में पुरानी कारों की बिक्री 60 लाख यूनिट से ज्यादा पहुंचने की संभावना है।
पांच साल पहले तक हर एक नई कार के मुकाबले एक से भी कम पुरानी कार बिकती थी, लेकिन अब ये रेशियो बढ़कर 1.4 हो गया है। मतलब, हर 10 नई कारों के साथ अब लगभग 14 पुरानी कारें भी बिक रही हैं। इसके पीछे वजह है कि लोग जल्दी-जल्दी अपग्रेड करने लगे हैं। और सेकंड हैंड गाड़ियों की औसत उम्र भी अब घटकर करीब 3.7 साल हो गई है।
हालांकि भारत अब भी अमेरिका (2.5), ब्रिटेन (4.0) और जर्मनी (2.6) जैसे विकसित देशों से पीछे है। जिसका मतलब है कि पुरानी कारों के बाजार में आगे और भी जबरदस्त बढ़ोतरी की गुंजाइश है।
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