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Used Car Buying Tips: सेकेंड हैंड कार खरीद रहे हैं? डील फाइनल करने से पहले जान लें ये छह जरूरी टिप्स

Thu, 28 Aug 2025 06:47 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत में सेकेंड हैंड कार खरीदने का सोच रहे हैं? कीमत से लेकर वारंटी और पेपरवर्क तक, यहां जानें 6 खास टिप्स जो आपकी डील को बेहतर और सुरक्षित बनाएंगे।
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Second Hand Cars - फोटो : FREEPIK
आजकल कार कंपनियां नई-नई गाड़ियां लॉन्च कर रही हैं, लेकिन लोगों का झुकाव सेकेंड हैंड (यूज्ड) कारों की तरफ भी लगातार बढ़ रहा है। कोरोना महामारी के बाद से लोगों की सोच बदली है और बहुत से लोग अब प्री-ओन्ड कारों को बेहतर विकल्प मानते हैं। वजह साफ है- कम दाम में अच्छी कार, ज्यादा वैरायटी और जेब पर हल्का बोझ। यही कारण है कि भारत में यूज्ड कार मार्केट तेजी से बढ़ रहा है। और आने वाले वर्षों में यह और भी बड़ा हो जाएगा।

हालांकि, सेकेंड हैंड कार खरीदते समय कुछ फायदे भी हैं और कुछ नुकसान भी। अगर सही तरीके से ध्यान दिया जाए तो यह एक शानदार डील साबित हो सकती है। लेकिन अगर गलती हो गई तो सिरदर्द भी बन सकती है। यहां हम आपको बता रहे हैं सेकेंड हैंड कार खरीदते वक्त किन 6 बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

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Second Hand Cars - फोटो : Freepik
कीमत है सबसे बड़ा फायदा
नई कार शोरूम से बाहर निकलते ही अपनी वैल्यू खोने लगती है। पहले ही साल में उसकी कीमत करीब 20 प्रतिशत तक गिर जाती है। ऐसे में अगर आप एक साल पुरानी कार खरीदते हैं तो सीधे-सीधे 20 प्रतिशत तक की बचत हो सकती है। ज्यादातर लोग नई कार पहले साल बहुत कम चलाते हैं, तो अगर वे बेच दें तो आपको बढ़िया डील मिल सकती है। लेकिन, सिर्फ दाम देखकर फैसला ना करें। कार की अच्छे से जांच जरूर करें।

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Second Hand Cars - फोटो : Freepik
मनचाहा वेरिएंट सस्ते में
अक्सर नई कार का टॉप मॉडल लेना महंगा पड़ता है। लेकिन सेकेंड हैंड मार्केट में यही टॉप वेरिएंट आपको काफी कम दाम पर मिल सकता है। अगर ढूंढने की मेहनत करें तो कभी-कभी ऐसी कार भी मिल जाती है जो कम चली हो और टॉप स्पेक वेरिएंट हो। और वो भी उस दाम में जिसमें नई कार का बेस मॉडल आता है। 

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Second Hand Cars - फोटो : Audi India
कम लोन और कम इंश्योरेंस प्रीमियम
पुरानी कार सस्ती होने की वजह से आपको ज्यादा लोन लेने की जरूरत नहीं पड़ती। इसका मतलब है कम ईएमआई और कम ब्याज। ध्यान रहे कि पुरानी कार पर लोन की ब्याज दर आमतौर पर थोड़ी ज्यादा होती है। लेकिन दूसरी तरफ, पुरानी कार का इंश्योरेंस प्रीमियम नई कार की तुलना में काफी कम होता है। क्योंकि उसकी वैल्यू (IDV) घट चुकी होती है।

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Second Hand Cars - फोटो : AI
पेपरवर्क की झंझट नहीं
अगर आप किसी डीलरशिप से कार खरीद रहे हैं तो गाड़ी की पूरी जांच-पड़ताल और पेपरवर्क डीलर ही कर देता है। इससे आपका सिरदर्द कम हो जाता है। लेकिन, अगर आप किसी व्यक्ति से सीधे कार खरीद रहे हैं तो कागजी कार्रवाई खुद ही करनी होगी।

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Second Hand Cars - फोटो : Freepik
हर जगह वारंटी नहीं मिलती
अगर आप कार किसी कंपनी की आधिकारिक डीलरशिप से खरीदते हैं और गाड़ी अभी वारंटी पीरियड में है, तो आपको डबल फायदा मिल सकता है। कंपनी की ओरिजिनल वारंटी और डीलर की दी हुई वारंटी। लेकिन, अगर आप कार किसी निजी व्यक्ति से खरीद रहे हैं तो वारंटी ट्रांसफर नहीं होती। 

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Car Showroom - फोटो : Freepik
लिमिटेड चॉइस का नुकसान
नई कार मार्केट में आपको ढेरों वेरिएंट और कलर ऑप्शन मिलते हैं, लेकिन सेकेंड हैंड मार्केट में विकल्प सीमित (लिमिटेड चॉइस) होती है। मसलन, अगर आप किसी खास कार का टॉप मॉडल चाहते हैं, जैसे ह्यूंदै क्रेटा का टॉप स्पेक वेरिएंट, तो हो सकता है कि वो मार्केट में उपलब्ध ही न हो।

यानी, सेकेंड हैंड कार लेना आपके लिए फायदेमंद सौदा हो सकता है बशर्ते आप सही जांच-पड़ताल और होशियारी से फैसला करें। 

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