अमेरिकी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री ने संकेत दिया है कि नई टैरिफ नीति के कारण वाहनों की कीमतों में बढ़ोतरी होगी। टेस्ला को छोड़कर, सभी प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों जैसे फोर्ड और जनरल मोटर्स के कनाडा, मैक्सिको और चीन में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं, जिससे वे सीधे प्रभावित होंगे।
अमेरिकी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री ने संकेत दिया है कि नई टैरिफ नीति के कारण वाहनों की कीमतों में बढ़ोतरी होगी। मैक्सिको और कनाडा से आने वाले उत्पादों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ और चीन से आने वाले उत्पादों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने के कारण वाहन निर्माता कंपनियों के लिए उत्पादन को समायोजित करना मुश्किल हो जाएगा। टेस्ला को छोड़कर, सभी प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों जैसे फोर्ड और जनरल मोटर्स के कनाडा, मैक्सिको और चीन में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं, जिससे वे सीधे प्रभावित होंगे।
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Ram 2500 Pickup Truck
- फोटो : Ram Trucks
बढ़ती लागत से कम होगा मुनाफा
डेट्रॉयट फ्री प्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ऑटोमोबाइल सेक्टर सिर्फ सीमित समय तक इन अतिरिक्त लागतों को सहन कर पाएगा। उन्होंने भविष्यवाणी की है कि ये टैरिफ इंडस्ट्री और अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव डालेंगे और नौकरियों में कटौती होगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, टेलीमेट्री इनसाइट्स के वाइस प्रेसिडेंट सैम अबूएलसमिद ने बताया कि कनाडा और मैक्सिको में बनने वाले इंजनों पर अब अतिरिक्त टैरिफ लगेगा, भले ही वाहन अमेरिका में असेंबल किए जाएं। इससे इंजन और अन्य कंपोनेंट्स की कीमतों में भारी बढ़ोतरी होगी।
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Mercedes-Benz G 580 Electric SUV
- फोटो : Mercedes-Benz
अबूएलसमिद ने स्पष्ट किया कि इस टैरिफ संकट का सीधा असर छोटे ऑटो पार्ट्स निर्माताओं पर पड़ेगा, जो इतनी अधिक लागत वहन नहीं कर पाएंगे और अपने प्लांट को अमेरिका शिफ्ट करना उनके लिए असंभव होगा। इससे कई कंपनियां दिवालिया हो सकती हैं और हजारों लोगों की नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं। उन्होंने कहा, "अगर यह टैरिफ लंबे समय तक बना रहता है, तो एक साल के भीतर मंदी और बेरोजगारी दर में बढ़ोतरी तय है।"
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Fourth Generation BMW X3
- फोटो : BMW
अमेरिकी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया
ऑटो इंडस्ट्री पर बढ़ते टैरिफ के प्रभाव को देखते हुए होंडा पहली कंपनी बन गई है, जिसने मैक्सिको से अपना उत्पादन हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कंपनी अब अपनी अगली पीढ़ी की सिविक कार का निर्माण इंडियाना में करेगी।
वहीं, स्टेलांटिस ने कहा है कि इस टैरिफ से यूरोपीय और एशियाई वाहन निर्माता कंपनियों को फायदा मिलेगा। इसका कारण यह है कि स्टेलांटिस के जीप, डॉज, क्राइसलर और रैम जैसे ब्रांड मैक्सिको और कनाडा में बनाए जाते हैं, जिससे उन पर टैरिफ का सीधा असर पड़ेगा।
फरवरी में फोर्ड के सीईओ जिम फार्ले ने कहा था कि मैक्सिको और कनाडा पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगने से अमेरिकी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में भारी उथल-पुथल मच जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि इससे पूरी इंडस्ट्री को उत्पादन और सप्लाई चेन में बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।