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E20: गडकरी ने कहा- हमने पुरानी कारों पर परीक्षण किया, ई20 ईंधन की 'गलत सूचना' पर 'पेट्रोलियम लॉबी' को फिर घेरा

Sat, 23 Aug 2025 01:19 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक बार फिर "पेट्रोलियम लॉबी" पर हमला बोला है। उनका कहना है कि इथेनॉल के इस्तेमाल को लेकर जो दावे किए जा रहे हैं कि E20 पेट्रोल से गाड़ियों के इंजन खराब हो रहे हैं, वे पूरी तरह गलत हैं।
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नितिन गडकरी, केंद्रीय मंत्री - फोटो : ANI
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक बार फिर "पेट्रोलियम लॉबी" पर हमला बोला है। उनका कहना है कि इथेनॉल के इस्तेमाल को लेकर जो दावे किए जा रहे हैं कि E20 पेट्रोल से गाड़ियों के इंजन खराब हो रहे हैं, वे पूरी तरह गलत हैं। एक मीडिया संस्थान को दिए इंटरव्यू में गडकरी ने साफ कहा कि "यह झूठ है। हमने पुरानी कारों पर भी ट्रायल किए हैं। ब्राजील में तो 27 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाया जाता है, लेकिन वहां कोई शिकायत नहीं होती। हमने तकनीकी स्तर पर हर चीज को परखा है।"

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तेल भरवाते समय इन बातों का रखें ध्यान - फोटो : Adobe Stock
सोशल मीडिया पर उठे सवाल
इससे पहले, इस महीने की शुरुआत में एक कार्यक्रम में गडकरी ने कहा था, "20 प्रतिशत इथेनॉल मिले पेट्रोल से क्या देश में किसी कार को कोई समस्या आई है? अगर आई है तो उसका नाम बताइए।" उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने अपनी शिकायतें साझा कीं और खबरें आने लगीं कि E20 पेट्रोल डालने से गाड़ियां खराब हो रही हैं।

कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने यह भी आरोप लगाया कि "स्वच्छ ईंधन" (क्लीन फ्यूल) के विचार को खारिज करने के लिए पेट्रोलियम लॉबी झूठा प्रचार कर रही है। यहां तक कि सरकार ने जागरूकता बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और रेडियो जॉकी (आरजे) की मदद से प्रचार भी किया।

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E20 पेट्रोल से पुरानी गाड़ी पर हो रहा असर - फोटो : AI
तय समय से पांच साल पहले पूरा हुआ लक्ष्य
दिलचस्प बात यह है कि भारत ने इस साल जुलाई में ही 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया, जबकि यह लक्ष्य 2028-29 तक रखा गया था। गडकरी ने इसे प्रदूषण कम करने और आयात बिल घटाने की बड़ी रणनीति बताया। उन्होंने कहा, "हमारी नीति आयात कम करना, प्रदूषण घटाना और सस्ती ऊर्जा देना है। इथेनॉल बहुत अच्छा ईंधन है। क्या लोगों को अपनी सेहत सुधारनी नहीं चाहिए?"

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पेट्रोल पंप (सांकेतिक सस्वीर) - फोटो : AI
किसानों को फायदा, लेकिन चिंता भी
गडकरी ने इंटरव्यू में बताया कि इथेनॉल उत्पादन का सीधा फायदा किसानों को मिल रहा है। बिहार और यूपी में मक्का (कॉर्न) की पैदावार तीन गुना हो गई है। मक्का की कीमत भी पिछले चार वर्षों में 14-15 हजार रुपये प्रति टन से बढ़कर 24-25 हजार रुपये प्रति टन हो गई है।

हालांकि, उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी अधिक इथेनॉल की मांग पूरी करने के लिए खाद्य फसलों का इस्तेमाल होने लगेगा। चूँकि इथेनॉल सिर्फ गन्ने की शीरे से ही नहीं बल्कि मक्का, चावल और अतिरिक्त अनाज से भी बनाया जाता है। इसलिए इससे खाद्यान्न आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।

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E20 पेट्रोल डिस्पेंसर (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : AI
तेल मंत्रालय ने भी इंजन खराब होने की आशंका को खारिज किया
तेल मंत्रालय ने भी इस महीने की शुरुआत में एक बयान जारी करके कहा कि E20 ईंधन गाड़ियों की फ्यूल एफिशिएंसी (माइलेज) या इंजन पर बुरा असर नहीं डालता। मंत्रालय का कहना है कि कुछ लोग कार मालिकों में डर फैलाकर इस कार्यक्रम को "पटरी से उतारने" की कोशिश कर रहे हैं। 

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Petrol Pump - फोटो : AdobeStock
मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से बीमा (इंश्योरेंस) पर कोई असर नहीं पड़ता। मंत्रालय ने कहा था, "यह अफवाह फैलाई जा रही है कि बीमा कंपनियां E20 की वजह से हुए नुकसान का दावा नहीं मानेंगी। यह पूरी तरह झूठ है। एक बीमा कंपनी के ट्वीट को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया ताकि लोगों में डर और भ्रम पैदा हो। हकीकत यह है कि E20 के इस्तेमाल से भारत में किसी भी वाहन का बीमा अमान्य नहीं होता।"  

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