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Second Hand Car: खरीदनी है सेकंड हैंड कार तो इन बातों का जरूर रखें ध्यान

Mon, 08 Aug 2022 12:59 AM IST
स्वाति शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सैकेंड हैंड कारों का है बड़ा मार्केट - फोटो : istock
चार पहिया वाहन का होना आजकल लक्जरी से ज्यादा जरूरत का मामला बन गया है। परिवार के साथ कहीं बाहर आने-जाने में इससे बहुत सुविधा होती है। एक तो बेवजह का टैक्सी आदि का किराया बचता है, दूसरे सर्दी, बारिश या तेज धूप से भी सुरक्षा मिलती है। यही कारण है कि सामान्य मिडिल क्लास व्यक्ति भी एक सिम्पल कार खरीदने की इच्छा रखता है। नई कार लेना हर किसी की सामर्थ्य में हो यह जरूरी नहीं। तो सेकेंड हैंड कार एक अच्छा विकल्प हो सकती है। कम कीमत में आप चार पहिया वाहन के मालिक भी बनते हैं और बचत भी कर लेते हैं। आजकल कई बड़े ब्रांड और कंपनियां अपने सेकेंड हैंड चार पहिया वाहनों की बिक्री कर रही हैं। साथ ही कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स भी यूज़्ड कारों की खरीद-बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। यहां अपनी पसंदीदा कार खरीदी या बेची जा सकती है। अगर आप पहली बार सेकेंड हैंड चार पहिया वाहन खरीदने जा रहे हैं तो मन में सवाल आना वाजिब है। सवाल यह है कि बेस्ट कार को कैसे चुनें? जानिए कुछ ऐसे बिंदुओं को जो सेकेंड हैंड कार खरीदते समय ध्यान में रखना चाहिए। ये सही चुनाव में आपकी मदद करेंगे। 
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किफायती दाम में अपनी कार
फ़ायदे का सौदा है यूज़्ड कार

सेकेंड हैंड कार या गाड़ी आपकी चार पहिये की चाहत को किफायती दाम में तो पूरा करती ही है, इसका एक फायदा यह भी है कि कुछ साल चलाकर ही आप इसकी पूरी लागत वसूल कर सकते हैं। इसके बाद आप चाहें तो नई गाड़ी भी खरीद सकते हैं या फिर से गाड़ी बदल सकते हैं। सेकेंड हैंड या यूज़्ड कारों के प्रति लोगों में रुझान पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ा है क्योंकि इस सेगमेंट में अच्छी गाड़ियां मिल जाती हैं और पूरे परिवार के लिए एक सुविधाजनक सवारी हो जाती है। इतना ही नहीं कॉलेज जाने वाले युवा, नई नौकरी में आये लोग या शौकिया कार चलाना सीखने वाले लोग भी बड़ी संख्या में सेकेंड हैंड कारें खरीद रहे हैं। ये उनको अपनी गाड़ी होने का एहसास देती है वो भी कम से कम ईएमआई या लोन में। दूसरी ओर एक वर्ग वह भी है जो लगभग हर एक-दो साल में गाड़ी बदलने का शौक रखता है। इस वजह से भी अच्छी सैकेंड हैंड गाड़ियां बाजार में उपलब्ध होती हैं। 
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इन बातों का रखें ख्याल - फोटो : pixa
इन बातों का रखें ख्याल

सतर्कता रखना है जरूरी
 

सबसे पहली चीज है प्रामाणिकता और विश्वास। कोशिश करें कि गाड़ी किसी बड़े ब्रांड की यूज़्ड कार सर्विस से लें। इससे आपके साथ धोखाधड़ी या नुकसान होने की गुंजाईश कम से कम होगी और आपको गाड़ी के मेंटेनेंस या सर्विसिंग के लिए भी दूसरी जगह भागना नहीं पड़ेगा। दूसरा बेस्ट ऑप्शन है किसी परिचित की गाड़ी खरीदना। ऐसा व्यक्ति जिसे आप रोज उसी गाड़ी को चलाते देखते हैं और आप गाड़ी की कंडीशन को हर तरह से परख कर देख सकते हैं। यदि आप ऑनलाइन किसी प्लेटफॉर्म से गाड़ी खरीद रहे हैं तो सबसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। हमेशा गौर करें कि जो व्यक्ति गाड़ी बेच रहा है उसका प्रोफ़ाइल और बातें मेल खाती हैं या नहीं। उदाहरण के लिये एक व्यक्ति आपसे कहता है कि वह बिजनेसमैन है और नई गाड़ी लेने के लिए पुरानी गाड़ी बेच रहा है तो उससे उसका पूरा व्यवसाय, पता आदि पूछकर वहीं जाकर गाड़ी देखें। अगर आपको लगता है कि व्यक्ति अपने बारे में जो बता रहा है, वैसा है नहीं, तो तुरंत सतर्क हो जाएँ। 
 

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कार बेचने वाले की हर बात पर विश्वास न करें - फोटो : Pixabay
रिस्क न लें 

अगर गाड़ी दिखाने या बेचने के लिए कोई आपको ऐसी जगह बुला रहा है जहाँ आवाजाही कम है या आपके घर से वह जगह बहुत दूर है, तो इससे बचें। उसे किसी ऐसी जगह पर बुलाएँ जो आप दोनों के डेस्टिनेशन से करीब हो और पूरी तरह सुनसान न हो। अपने साथ किसी न किसी को लेकर जरूर जाएँ। पिछले कुछ सालों में ऐसे केसेस बहुत हुए हैं जहाँ गाड़ी खरीदने या बेचने के लिए लोगों को सुनसान जगह पर बुलाया गया और उनको नुकसान पहुंचा कर लुटेरे गाड़ी ले भागे। इसलिए किसी की भी बात पर एकदम विश्वास करने की रिस्क बिलकुल न लें। अगर वह व्यक्ति कोई अच्छी गाड़ी अकल्पनीय दामों में दे रहा है, तब तो और भी सतर्क रहें। 
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अच्छी तरह करें चैक - फोटो : istock
जानकार का साथ है अच्छा 

सबसे अच्छा विकल्प यह है कि आप अपने किसी परिचित मैकेनिक को अपने साथ ले जाएँ। गाड़ी के चुनाव में उससे बेहतर राय किसी से नहीं मिलेगी। वह आपको सारी टैक्निकल बातें स्पष्ट बता पायेगा। यदि आप किसी परिचित मैकेनिक को नहीं ले जा पाते तो भी किसी ऐसे व्यक्ति को ले जाएँ जो इस मामले में जानकारी रखता हो और आपको गाइड कर सके।  खासकर अगर यह आपकी पहली गाड़ी है तो। गाड़ी खरीदने के पहले आप भी उसके बारे में बेसिक जानकारी इकट्ठी जरूर करें। इससे आपको टैक्निकल बातें समझने में मदद भी मिलेगी और निर्णय लेने में भी। यहां यह भी याद रखें आप जिसे भी अपने साथ ले जा रहे हैं उसके साथ मिलकर पूरी गाड़ी को अच्छी तरह चैक करें। इसमें गाड़ी के पेंट से लेकर पहियों और इंटीरियर से लेकर अंदर के सारे इलेक्ट्रिकल कनेक्शन आदि भी शामिल हैं। साथ ही इंजन नंबर और वीआईएन नंबर (व्हीकल आइडेंटिफिकेशन नंबर) को भी जांचें कि वह सब जगह समान है या नहीं। सभी फिल्टर्स को भी ध्यान से देखें। 
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कागजों की पूरी तरह जाँच करें - फोटो : Pixabay
कागजात को ध्यान से पढ़ें

डॉक्युमेंट्स वह महत्वपूर्ण हिस्सा है जो आपकी गाड़ी को पल भर में अच्छी से बुरी बना सकता है। ओरिजनल डॉक्युमेंट के बिना आपकी गाड़ी न केवल अवैध साबित हो सकती है बल्कि आप किसी बड़ी समस्या में भी फंस सकते हैं। इसलिए गाड़ी के इंश्योरेंस से लेकर रजिस्ट्रेशन तक सभी कुछ अच्छे से देख कर डील फाइनल करें। हमेशा ओरिजनल डॉक्युमेंट्स ही मांगें, सॉफ्ट कॉपी नहीं। यदि कहीं असमंजस हो तो किसी विशेषज्ञ से राय भी ली जा सकती है। अगर कोई व्यक्ति डॉक्युमेंट्स देने में आनाकानी करता है, बाद में देने की बात कहता है या सॉफ्ट कॉपी रखने की बात करता है तो एकदम मना कर दीजिये। 
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टेस्ट ड्राइव जरूर लें - फोटो : pixabay
टेस्ट ड्राइव और चैकिंग

गाड़ी को अच्छी तरह चलाकर उसके ब्रेक्स, क्लच, गियर, हॉर्न वगैरह सबकुछ चैक करें। टेस्ट ड्राइव गाड़ी की परफॉर्मेंस को जानने का सबसे अच्छा जरिया है। गाड़ी का स्टार्ट होना, क्लच गियर के इस्तेमाल के बाद रफ्तार पकड़ना और बिना रुके अच्छे से चलना काफी महत्वपूर्ण है। यह भी ध्यान दें कि गाड़ी किसी प्रकार की कोई आवाज़ तो नहीं कर रही या चलते वक्त वह कहीं अटक तो नहीं रही या उसमें कोई झटके आदि तो नहीं लग रहे हैं। गाड़ी को 40-50 की स्पीड पर कम या बिना ट्रैफिक वाली जगह पर चलाकर देखें। इससे आपको गाड़ी की हालत समझ में आएगी। 
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सोच समझकर चुनें अपनी कार - फोटो : pixabay
यह बातें भी रखें ध्यान में 

* लोन लेने संबंधी सभी आवश्यक दस्तावेज पूरी तरह क्लियर हों 
* रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी हो और इसका दस्तावेजीकरण हो 
* गाड़ी बेचने के बाद इंश्योरेंस पॉलिसी आपके नाम पर स्थानांतरित हो 
* गाड़ी या उसके मालिक के नाम पर कोई पुराना लोन तो नहीं चल रहा इसकी तस्दीक करें इसके लिए फॉर्म 32 व 35 की जांच करें
* गाड़ी का ओरिजनल बिल, चाबियाँ और फायनेंस कम्पनी का नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट अवश्य लें 
* गाड़ी की सर्विस बुक भी लें 
* अगर गाड़ी बाई-फ्यूल यानी दो प्रकार के ईंधन से चलने वाली हो तो उसका सर्टिफिकेट व पीयूसी भी लें 
* नो क्लेम बोनस भी ट्रांसफर जरूर करवाएं 
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