सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने राज्य सरकारों और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को नेशनल हाईवे (राष्ट्रीय राजमार्ग) पर दुर्घटना स्थलों पर सुधारात्मक उपाय करने के लिए कहा है। ये उपाय पुलिस रिपोर्टों के शुरुआती विश्लेषण के आधार पर किए जाएंगे, न कि उस समय तक इंतजार के बाद जब तक सड़क के ऐसे हिस्सों को ब्लैक स्पॉट घोषित नहीं कर दिया जाता। पीटीआई ने बताया कि MoRTH का यह निर्देश इसलिए आया है क्योंकि नेशनल हाईवे के किसी एक हिस्से को ब्लैक स्पॉट घोषित करने की प्रक्रिया में समय लगता है। और इस प्रक्रिया के बीच में और भी दुर्घटनाएं हो सकती हैं, जिनमें बहुमूल्य जीवन नष्ट हो जाते हैं या कई लोग घायल हो जाते हैं।
विज्ञापन
2 of 4
Road Accident
- फोटो : अमर उजाला
दुनिया में भारत उन अग्रणी देशों में से एक है, जहां हर साल खतरनाक रूप से ज्यादा संख्या में सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। इनमें से ज्यादातर दुर्घटनाएं देश भर में नेशनल हाईवे पर होती हैं। जिससे लाखों लोगों की मौतें होती हैं और इससे भी ज्यादा लोगों को गंभीर रूप से जानलेवा चोटें आती हैं। एक अध्ययन के अनुसार, 2018 में भारत में सड़क दुर्घटनाओं के कारण 150,785 लोगों की मौत हुई थी और 2021 में यह बढ़कर 153,792 हो गई। 2010 में यह संख्या 1.3 लाख थी। राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहनों की बढ़ती संख्या के साथ देश भर में मौतों की संख्या बढ़ रही है।
विज्ञापन
3 of 4
Black Spot
- फोटो : सोशल मीडिया
जबकि यातायात नियमों के उल्लंघन या लापरवाही से गाड़ी चलाने को अक्सर कई सड़क दुर्घटनाओं का कारण बताया जाता है। कई मामलों में खराब सड़क बुनियादी ढांचे को भी ऐसे हादसों के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है। यदि राष्ट्रीय राजमार्ग पर किसी खंड में सीमित समय के दौरान लगातार दुर्घटनाएं होती हैं, तो इसे ब्लैक स्पॉट घोषित कर दिया जाता है। आमतौर पर, राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगभग 500 मीटर के खंड, जहां तीन वर्षों के दौरान कम से कम पांच दुर्घटनाएं हुई हैं, जिसमें कम से कम 10 लोगों की मौत हुई है, उन्हें दुर्घटना ब्लैक स्पॉट के रूप में नामित किया जाता है। पिछले कुछ वर्षों में, NHAI ने देश भर में राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पर कई ब्लैक स्पॉट की पहचान की है और उन्हें ठीक किया है। हालांकि, यह एक निरंतर प्रक्रिया है और यह पहचान और फिक्सिंग प्रक्रिया जारी है।
MoRTH का ताजा निर्देश सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए आया है। साथ ही दुर्घटना स्थलों पर समस्याओं को ठीक करने के लिए तेज कार्रवाई सुनिश्चित करने और ऐसे हादसों को कम करने के प्रयासों के बीच आया है।