सुप्रीम कोर्ट द्वारा राजमार्ग प्रशासन प्रणाली कैसे "सिर्फ कागजों पर है" चल रही है, इस पर आलोचनात्मक टिप्पणी के लगभग एक महीने बाद, सड़क परिवहन मंत्रालय हरकत में आया है। मंत्रालय ने सभी संबंधित अधिकारियों को अतिक्रमण और अनधिकृत कब्जे का पता लगाने के लिए सड़क खंडों का निरीक्षण करने का निर्देश दिया है। मंत्रालय ने एक निर्देश में, अधिकारियों के लिए ऐसे अतिक्रमणों को हटाने के लिए राजमार्ग प्रशासकों को निर्देश देना "अनिवार्य" कर दिया है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश पारित करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने देखा था कि राजमार्ग प्रशासन के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत हाईवे का सर्वेक्षण करने के लिए कोई मशीनरी नहीं बनाई गई है। ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या कोई अनधिकृत ढांचे या राजमार्ग भूमि का अनधिकृत कब्जा है। सरकार के हलफनामे को देखने के बाद अदालत ने कहा था कि "ऐसा आभास होता है कि मशीनरी सिर्फ कागजों पर ही उपलब्ध है"।
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अमरोहा हाईवे
- फोटो : संवाद
हालिया मंत्रालय के आदेश में कहा गया है, "यह सुनिश्चित करने के लिए कि नेशनल हाईवे अनधिकृत कब्जे से मुक्त रहें, यह फैसला लिया गया है कि मंत्रालय और उसकी कार्यान्वयन एजेंसियों के निरीक्षण अधिकारियों के लिए नेशनल हाईवे के निरीक्षण के दौरान अनधिकृत कब्जे का पता लगाना और निरीक्षण नोट में अनधिकृत कब्जे की सीमा, तथ्य को सामने लाना अनिवार्य होगा। साथ ही नामित राजमार्ग प्रशासनों को अनधिकृत कब्जों को हटाने का निर्देश देना होगा।"
राष्ट्रीय राजमार्ग (भूमि और यातायात) अधिनियम के तहत, राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के सभी परियोजना निदेशकों, राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना विकास निगम (एनएचआईडीसीएल) के महाप्रबंधकों और उप महाप्रबंधकों और राज्य लोक निर्माण विभागों (पीडब्ल्यूडी) के कार्यकारी अभियंताओं को नामित किया है, जो नेशनल हाईवे के प्रभारी हैं।
अधिनियम के मुताबिक, राजमार्ग प्रशासन अतिक्रमण की रोकथाम और उन्हें हटाने, हटाने की लागत की वसूली और जुर्माना लगाने, राजमार्ग और यातायात तक पहुंच के अधिकार को विनियमित करने के लिए जिम्मेदार हैं।