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Cyrus Mistry: रियर सीट बेल्ट पहनना अनिवार्य होता तो बच सकती थी सायरस मिस्त्री की जान, जानें क्या है कानून

Mon, 05 Sep 2022 10:04 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Cyrus Pallonji Mistry with Ratan Tata - फोटो : PTI
यह कानून है, फिर भी शायद ही कोई इसका पालन करता है, और ऐसे कानून की चर्चा भी तभी होती है जब किसी प्रमुख व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। टाटा संस के पूर्व चेयरमैन सायरस मिस्त्री की हुई आकस्मिक मृत्यु ने रियर सीटबेल्ट के इस्तेमाल पर एक बार फिर चर्चा शुरू कर दी है।

कार की पिछली सीट पर यात्रियों द्वारा सीट बेल्ट पहनना, जो कि कानूनन करना चाहिए, टाटा संस के पूर्व अध्यक्ष सायरस मिस्त्री को बचा सकता था। मिस्त्री की रविवार को एक भीषण सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। 

मिस्त्री अपने दोस्त जहांगीर पंडोले के साथ कार में पीछे बैठे थे, और ऐसा लगता है कि उन्होंने सीट बेल्ट नहीं पहनी हुई थी। दुर्घटना के दौरान तेज रफ्तार कार के डिवाइडर से टकराने के बाद वे बहुत तेज स्पीड से सामने फेंका गए होंगे। हादसे में मिस्त्री और पंडोले दोनों की मौत हो गई। 
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सीट बेल्ट
हालांकि पिछली सीटों पर बैठे यात्रियों द्वारा सीट बेल्ट नहीं पहनने पर केंद्रीय मोटर वाहन नियम (सीएमवीआर) के नियम 138 (3) के तहत 1,000 रुपये का जुर्माना लगता है, लेकिन ज्यादातर लोग या तो इस अनिवार्य नियम से अनजान हैं या बस उन्हें अनदेखा कर देते हैं।

यहां तक कि ट्रैफिक पुलिसकर्मी भी सीट बेल्ट नहीं लगाने पर पीछे की सीटों पर बैठे यात्रियों पर शायद ही कभी जुर्माना लगाते हैं।

इंटरनेशनल रोड फेडरेशन में प्रेसिडेंट एमेरिटस केके कपिला ने कहा कि पीछे की सीट पर सीट बेल्ट लगाने की प्रथा बड़े शहरों और महानगरों में भी बहुत कम है और भारत के छोटे शहरों में लगभग शून्य है। 
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cyrus mistry car accident - फोटो : Agency
प्रारंभिक जांच के अनुसार, मिस्त्री ने सीट बेल्ट नहीं पहनी हुई थी और तेज गति से चल रहा वाहन और चालक का "गलत निर्णय" दुर्घटना का कारण बना।

सरकार मोटर वाहनों में सवार लोगों की सुरक्षा बढ़ाने के उपाय कर रही है। और अब सरकार इस अक्तूबर से यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए कार निर्माताओं के लिए 8 यात्रियों तक वाले मोटर वाहनों में कम से कम छह एयरबैग प्रदान करना अनिवार्य करने का इरादा रखती है।

एयरबैग एक वाहन अधिभोगी-संयम प्रणाली है, जो टक्कर के दौरान चालक और वाहन के डैशबोर्ड के बीच खुलकर एक कवच बनाती है, जिससे गंभीर चोटों को रोका जा सकता है। 

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Nitin Gadkari - फोटो : For Reference Only
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पिछले साल पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि ऑटोमोबाइल उद्योग के विरोध के बावजूद सरकार मोटर वाहनों के लिए कम से कम छह एयरबैग का नियम लाएगी जो 8 यात्रियों को ले जा सकते हैं।

गडकरी ने कहा था कि छोटी कारों, जो ज्यादातर निम्न मध्यम वर्ग के लोगों द्वारा खरीदी जाती हैं, में भी पर्याप्त संख्या में एयरबैग होने चाहिए और उन्होंने हैरानी जताई थी कि वाहन निर्माता सिर्फ अमीर लोगों द्वारा खरीदी गई बड़ी कारों में ही आठ एयरबैग दे रहे हैं।

उन्होंने कहा था, "ज्यादातर, निम्न-मध्यम वर्ग के लोग छोटी अर्थव्यवस्था वाली कार खरीदते हैं और अगर उनकी कार में एयरबैग नहीं होंगे और जब दुर्घटनाएं होती हैं, तो इसका परिणाम मृत्यु हो सकता है। इसलिए, मैं सभी कार निर्माताओं से वाहन के सभी प्रकार और सेगमेंट में कम से कम छह एयरबैग प्रदान करने की अपील करता हूं।" 
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Seat Belt - फोटो : सांकेतिक
इस साल की शुरुआत में, मोटर वाहनों में सवारों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए, गडकरी ने कहा था कि सरकार ने वाहन निर्माताओं के लिए कार में सामने वाले सभी यात्रियों के लिए तीन-बिंदु सीट बेल्ट प्रदान करना अनिवार्य कर दिया है।

उन्होंने कहा कि यह नियम कार की पिछली पंक्ति में बीच की सीट के लिए भी लागू होगा।

चूंकि ओवरस्पीडिंग भारतीय सड़कों पर मौत की सबसे बड़ी वजहों में से एक है, इसलिए सरकार ने विभिन्न श्रेणियों की सड़कों के लिए अलग-अलग गति सीमाएं भी तय की हैं।

इस समय, सड़क परिवहन मंत्रालय द्वारा अधिसूचित अधिकतम गति सीमा कारों के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों पर 100 किमी प्रति घंटे और एक्सप्रेसवे पर 120 किमी प्रति घंटे है। 
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दु्र्घटनाग्रस्त कार - फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, 'भारत में आकस्मिक मृत्यु और आत्महत्या 2021' के तहत, अधिकांश (59.7 प्रतिशत) सड़क दुर्घटनाएँ तेज रफ्तार के कारण होती हैं, जिसमें 87,050 मौतें होती हैं और 2.28 लाख लोग घायल होते हैं।

वर्ष 2021 में पूरे भारत में सड़क दुर्घटनाओं में 1.55 लाख से अधिक लोगों की जान चली गई, खतरनाक या लापरवाह ड्राइविंग या ओवरटेकिंग ने 25.7 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाओं में योगदान दिया, जिससे 42,853 लोगों की मौत हुई और 91,893 लोग घायल हुए। 
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हादसे के बाद क्षतिग्रस्त कार - फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा परिषद के सदस्य कमल सोई ने कहा कि भारत में सड़कों पर सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त सड़क सुरक्षा मानक हैं, समस्या उन मानकों को लागू करने की है।

उन्होंने कहा, "सड़क निर्माण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार है, जिसके कारण सड़कें खराब और असुरक्षित होती हैं, जिससे कई दुर्घटनाएं और मौतें होती हैं।"
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