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युवा दिवस विशेष: 'फीचर फोन की तरह है मौजूदा ऑटो सेक्टर, जरूरत स्मार्टफोन बनने की'

Sat, 11 Jan 2020 06:12 PM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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National Youth Day - फोटो : Social Media
12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस है। स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन के तौर पर मनाए जाने वाले इस विशेष मौके पर उनका एक प्रेरणास्रोत कथन 'उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाए', युवाओं के लिए बेहद प्रासंगिक हो जाता है। देश के नौजवानों को इससे प्रेरणा लेने की जरूरत है और इसी को मूलमंत्र मानते हुए ऑटो सेक्टर से जुड़े कई युवा अपनी रचनात्मक सोच के जरिये हमारे-आपके जीवन को आसान बना रहे हैं। आइए इस मौके पर जानते हैं उनके संघर्ष और विचारों के बारे में...
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Elon Musk - फोटो : Social Media

एलन मस्क, Tesla और SpaceX, फाउंडर एंड सीईओ

इलेक्ट्रिक कारों के बादशाह और टेक वर्ल्ड में आयरन मैन के नाम से मशहूर एलन मस्क मंगल ग्रह पर अपने इलेक्ट्रिक साइबर ट्रक (Cyber Truck) को पहुंचाने का माद्दा रखते हैं। 28 जून 1971 को दक्षिण अफ्रीका प्रिटोरिया में जन्मे स्टार्टअप किंग के नाम से मशहूर एलन मस्क मात्र 30 साल की उम्र में 20 अरब रुपये की संपत्ति के मालिक थे। Forbes की 400 सूची में मस्क 2880 करोड़ डॉलर की संपत्ति के साथ 23वें स्थान पर हैं, वहीं इनोवेटिव लीडर्स की लिस्ट में वे पहले नंबर पर हैं।

1999 में उन्होंने ऑनलाइन पब्लिशिंग कंपनी जिप-2 कंपनी बनाई और कंप्यूटर बनाने वाली कंपनी Compaq को 20 करोड़ डॉलर में बेच दी। उन्होंने 2002 में स्पेसएक्स कंपनी बनाई और 2004 में वह टेस्ला के चेयरमैन बन गए। स्पेस टूरिज्म का सपना देखने वाले मस्क 2022 में अपनी कंपनी स्पेस एक्स के फॉल्कन हैवी रॉकेट को मंगल पर भेजने की तैयारी कर रहे हैं।

पिछले साल उन्होंने यह कह कर सनसनी मचा दी थी कि वे टेस्ला के सारे पेटेंट सार्वजनिक कर रहे हैं और उनकी तकनीक को कोई भी इस्तेमाल कर सकता है, उनका कहना था “तकनीक को छिपाने का कोई फायदा नहीं और उसके दरवाजे सबके लिए खोलकर ही दुनिया का भला हो सकता है”।   

एलन मस्क का कहना है...

”अगर तुम सुबह उठो और सोचो कि भविष्य अच्छा होने वाला है, तभी यह दिन अच्छा है, अन्यथा बेकार है”
“मुझे लगता है कि दुनिया की सबसे अच्छी सलाह यही हैः लगातार सोचो कि कैसे और बेहतर कर सकते हो, और खुद से सवाल पूछो”।
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tarun mehta and swapnil jain ather energy with sachin bansal - फोटो : Social Media

तरुण मेहता और स्वप्निल जैन, Ather Energy, फाउंडर्स

2013 में जब भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर बहस चल रही थी, उस समय एक स्टार्टअप बड़ी संजीदगी से इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन सेक्टर में क्रांतिकारी बदलाव लाने की तैयारी कर रहा था। आईआई मद्रास से ग्रेजुएट 29 साल के तरुण मेहता स्वप्निल जैन ने अशोक लेलैंड और जनरल मोटर्स में कुछ साल नौकरी करने के बाद 2013 में Ather Energy नाम से एक इलेक्ट्रिक वाहनों का स्टार्टअप शुरू किया।

शुरुआत में उन्हें आईआईटी मद्रास से 65 हजार डॉलर और फ्लिपकार्ट के फाउंडर बिन्नी बंसल से 10 लाख डॉलर का प्राथमिक निवेश मिला। उनकी सोच थी एक ऐसा इलेक्ट्रिक स्कूटर बनाया जाए, जो पेट्रोल स्कूटर्स के मुकाबले पावरफुल हो। साल 2016 में उन्होंने 75 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाला पहला इलेक्ट्रिक स्कूटर बाजार में उतारा और सनसनी मचा दी। 2018 में कंपनी ने दो स्कूटर लॉन्च किए और इस साल 450X नाम से सुपर स्कूटर लॉन्च करने की तैयारी कर रही है।

तरुण मेहता स्वप्निल जैन न केवल फोर्ब्स की फोर्ब्स की 2018 की 30 Under 30 सूची में शामिल हुए, वहीं 2019 की 40 UNDER 40 लिस्ट में दोनों को जगह मिली। आज उनकी कंपनी में 700 से ज्यादा लोगों की टीम है और उनकी कंपनी में Hero Motocorp ने 32.31 फीसदी की हिस्सेदारी हासिल कर 205 करोड़ का निवेश किया है। अब तक कंपनी में 800 करोड़ से ज्यादा का निवेश हो चुका है। कंपनी के 130 शहरों में एक हजार से ज्यादा डीलर हैं और कंपनी की निर्माण क्षमता 30 हजार स्कूटर साला से ज्यादा है।

तरुण मेहता का कहना है...

“ग्राहक अब पहले से ज्यादा समझदार हो रहे हैं और वे किफायती प्रोडक्ट्स की बजाय ज्यादा विचारशील प्रोडक्ट्स चुन रहे हैं”।

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Rahul Sharma, Revolt - फोटो : Social Media

राहुल शर्मा, Revolt Intellicorp, को-फाउंडर

कभी माइक्रोमैक्स ने देश के मोबाइल मार्केट में सस्ते हैंडसेट लाकर तहलका मचाया था। लेकिन चीनी कंपनियों के आने बाद कंपनी पिछड़ती चली गई और स्मार्टफोन बाजार पर माइक्रोमैक्स की पकड़ ढीली होती चली गई। उसी दौरान माइक्रोमैक्स के को-फाउंडर रहे राहुल शर्मा ने अपनी दिशा बदली और भविष्य के इलेक्ट्रिक वाहन सेगमेंट पर अपना ध्यान फोकस किया। वे भारत का Tesla बनने की कुव्वत रखते हैं।

कनाडा की सस्केचेवान यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग कर चुके राहुल शर्मा की कंपनी ने पिछले साल इन-हाउस डिजाइन की हुई देश की पहली इलेक्ट्रिक बाइक्स RV400 और RV300 लॉन्च करके देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर में सनसनी मचा दी। खास बात यह थी कि यह देश की पहली ऑर्टिफिशियल इटेलिजेंस वाली बाइक थी, जो एक बार की चार्जिंग में 150 किमी तक चल सकती थी। शर्मा कहते हैं कि एलन मस्क और स्टीव जॉब्स, जिन्होंने कुछ अलग करके बाजार में तहलता मचा दिया, वे उन्हें अपना आदर्श मानते हैं। वे टेस्ला की तरह भारतीय दोपहिया बाजार में कुछ करना चाहते हैं।

एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था, 
"मौजूदा ऑटोमोबाइल बाजार फीचर फोन की तरह है, और उनके पास टेक दुनिया और ऑटोमोबाइल से जुड़ा टैलेंट है। वह कहते हैं कि आपको मोबाइल फोन (कारों और बाइक के लिए) का उदाहरण लेना होगा। फीचर फोन बाजार में, आप अपने फोन को बेच देते हैं, जिससे आपका रिश्ता समाप्त हो जाता है। लेकिन स्मार्टफोन बाजार में, यह शुरू होता है क्योंकि आप एप्स को अपग्रेड कर सकते हैं, आप वीडियोज बेच सकते हैं।"
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Bhavish Agarwal, Ola Cabs - फोटो : Social Media

भाविश अग्रवाल, ओला कैब्स, सीईओ

मोबाइल एप बेस्ड कैब सर्विस ओला की कामयाबी का ईनाम एक ऐसे शख्स को जाता है, जिसने माइक्रोसॉफ्ट की शानदार नौकरी छोड़ कर एक ऐसे बिजनेस में कदम रखा, जिसकी उस समय उम्मीद करना ही बेमानी था। इंटरनेट महंगा होता था और स्मार्टफोन इक्का-दुक्का हाथों में ही नजर आते थे। गली-गली में प्राइवेट कैब ऑपरेटर्स बैठे थे। लेकिन भाविश ने व्हाइट कॉलर नौ से पांच बजे वाली जॉब करने की बजाय एक ऐसे बिजनेस को चुना, जिससे हर रोज लाखों लोग सफर कर रहे हैं और इससे कई लोगों को रोजगार भी मिल रहा है।

25 अगस्त 1985 को पंजाब के लुधियाना शहर में जन्मे भाविश ने आईआईटी मुंबई के कंप्यूटर साइंस व इंजीनियरिंग ग्रेजुएट (बीटेक) किया और माइक्रोसॉफ्ट ने में काम करना शुरू कर दिया। लेकिन उनमें आंत्रेप्रेन्योर था और उन्होंने एक सफर से मिले कड़वे अनुभव के बाद खुद की कंपनी खड़ी करने की पहल की।

तीन दिसंबर 2010 को उन्होंने मुंबई से Ola Cabs की शुरुआत की। टेक्नोलॉजी बैकग्राउंड से होने के चलते भाविश ने कैब सर्विसेज और टेक्नोलॉजी को एक साथ जोड़ने के बारे में सोचा और उसे साबित कर दिखाया। खास बात यह रही कि अमेरिकी कैब सर्विस उबर भारत में 2013 में आई, जिसने बंगलुरू से अपनी सर्विस की शुरुआत की। आज उबर को भारत में कड़ी टक्कर केवल ओला से ही मिल रही है। कभी पर्सनल कार न खरीदने का प्रण करने वाले भाविश की कैब कंपनी आज 10 रुपये से 17 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से ओला अपनी कैब सर्विस देती है और रोजाना 70 से भी ज्यादा शहरों में 1.50 लाख से ज्यादा लोग इस सर्विस का फायदा ले रहे हैं।
 

भाविश अग्रवाल का कहना है

“सपने तो हर कोई देखता है, लेकिन कुछ ही लोग जोखिम उठाने के लिए तैयार रहते हैं। जब आप जोखिम उठाने के लिए आगे बढ़ते हैं, तो कई लोग कई सलाह भी देंगे। लेकिन याद रखिये सपने उन्हीं के सच होते हैं जो सुनते सबकी हैं लेकिन करते मन की हैं…”
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deepanshu malviya, amit singh Shuttl - फोटो : Social Media

दीपांशु मालवीय और अमित सिंह, Shuttl, फाउंडर्स

देश में ओला और उबर के आने के बाद लोगों को पहली बार मोबाइल एप के जरिए कैब बुक करने का एक्सपीरियंस मिला। लेकिन बसों के लिए अभी भी धक्के खाने पड़ते थे। 2006 में आईआईटी कानपुर से मैटेरियल्स एंड मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग से बीटेक कर चुके दीपांशु मालवीय और अमित सिंह ने 2015 में अपने कुछ दोस्तों के साथ मिंल कर एक ऐसी स्टार्टअप Shuttl एप बनाई जिसके जरिये दिल्ली और गुरुग्राम में चलने वाली एसी बसों में सीटों की ऑनलाइन बुकिंग आसानी से की जा सकती थी।

अमित बताते हैं कि मुंबई में नौकरी करने के दौरान उन्हें बसों में सीट ‘रोकने’ करने का खासा अनुभव था, बाद में उन्होंने जब दीपाशुं के साथ Jobong में काम शुरू किया तो कैब महंगी महंगी होती थीं और बसों में भीड़ होती थी। इस अनुभव के साथ उन्होंने Shuttl एप सर्विस शुरू की। दिल्ली सरकार ने ऑड-ईवन के दौरान शटल को बस एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म में सबसे बेहतर माना।

आज शटल प्लेटफॉर्म के जरिये तकरीबन हर रोज 700 से ज्यादा बसों और 150 रूट्स पर 45 हजार से ज्यादा सवारियां चढ़ती हैं। दिल्ली-एनसीआर, कोलकाता समेत सात शहरों में इसकी सर्विसेज हैं। सवारियां 1800 से दो हजार रुपये में 20, 30 और 40 तक राइड्स ले सकते हैं। उनकी कंपनी को कई निवेशकों से 48.3 करोड़ रुपये से ज्यादा की फंडिंग मिल चुकी है।

अमित सिंह कहते हैं,

“ईश्वर से अपनी इच्छाओं को मांगते समय बेहद सावधान रहें, हो सकता है कि आपको वह मिल जाए”...
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