क्या आपने सोचा है कि वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के प्रयासों में पेट्रोल और डीजल कारों को छोड़कर इलेक्ट्रिक वाहनों पर स्विच करना उतना कारगर नहीं होगा। भारत के सबसे लोकप्रिय आध्यात्मिक नेताओं में से एक जग्गी वासुदेव ने इस पुरानी बहस को एक बार फिर छेड़ दिया है कि क्या ईवी वास्तव में प्रदूषण को कम करने का दीर्घकालिक समाधान है?
क्या आपने सोचा है कि वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के प्रयासों में पेट्रोल और डीजल कारों को छोड़कर इलेक्ट्रिक वाहनों पर स्विच करना उतना कारगर नहीं होगा। भारत के सबसे लोकप्रिय आध्यात्मिक नेताओं में से एक जग्गी वासुदेव ने इस पुरानी बहस को एक बार फिर छेड़ दिया है कि क्या ईवी वास्तव में प्रदूषण को कम करने का दीर्घकालिक समाधान है? उनकी टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब केंद्र ईवी अपनाने को बढ़ावा देने के लिए निर्माताओं को प्रोत्साहन योजनाएं दे रहा है। क्योंकि इसका लक्ष्य 2030 तक कम से कम 50 प्रतिशत कार्बन तटस्थ और 2070 तक पूरी तरह से कार्बन तटस्थ बनना है।
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Electric Car
- फोटो : Freepik
ईशा फाउंडेशन के संस्थापक वासुदेव ने रविवार, 22 दिसंबर को चिक्काबल्लापुर में पर्यावरण पर इलेक्ट्रिक वाहनों के दीर्घकालिक प्रभावों के बारे में बताते हुए अपनी बात कही। उन्होंने कहा कि जब तक भारत बिजली पैदा करने के लिए कोयले और डीजल पर निर्भर रहेगा। तब तक देश में दीर्घकालिक इकोलॉजिकल सॉल्यूशन नहीं हो सकता।
कोयला भारत में बिजली पैदा करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला सबसे बड़ा जीवाश्म ईंधन बना हुआ है। ताजा अनुमानों के अनुसार, कोयला हर साल देश में उत्पादित कुल बिजली का लगभग 50 प्रतिशत योगदान देता है। ऊर्जा उत्पादन में डीजल का योगदान न्यूनतम है।
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Jaggi Vasudev
- फोटो : X/@SadhguruJV
पत्रकारों के एक समूह से रविवार को बात करते हुए वासुदेव ने कहा, "हमें बताया जाता है कि ईवी चलाने से पर्यावरण को बचाने में मदद मिलेगी। बेशक, चूंकि ये वाहन धुआं नहीं छोड़ते, इसलिए इलेक्ट्रिक वाहन शहरी पर्यावरण और शहरी निवासियों के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए बेहतरीन हैं। लेकिन पर्यावरण के दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए ऐसा नहीं है। यह एक इकोलॉजिकल सॉल्यूशन (पारिस्थितिक समाधान) नहीं हैं। क्योंकि हम बिजली पैदा करने के लिए वैसे भी जीवाश्म ईंधन जला रहे हैं।"
वासुदेव की टिप्पणी व्यापक रूप से चर्चित तर्क को बल देती है कि इलेक्ट्रिक वाहन तब तक वास्तव में पर्यावरण के अनुकूल नहीं हो सकते, जब तक कि ईवी बैटरी और बिजली के स्रोत में इस्तेमाल होने वाले घटक प्रदूषण का कारण न बनें। जबकि भारत बिजली उत्पादन के लिए ज्यादातर कोयले पर निर्भर है। हाइड्रो, पवन और सौर ऊर्जा जैसे अन्य अधिक पर्यावरण के अनुकूल स्रोत हैं जो हर साल उत्पादित ऊर्जा का लगभग 41 प्रतिशत योगदान देते हैं।
जग्गी वासुदेव का कार और बाइक कलेक्शन
जग्गी वासुदेव आध्यात्म के अलावा एक ऑटोमोबाइल प्रेमी के तौर पर भी जाने जाते हैं। उन्हें महंगी कारों और दोपहिया वाहनों की सवारी करते देखा गया है। कहा जाता है कि उनके पास महंगी कारों और बाइकों का कलेक्शन भी है, जो सभी पेट्रोल या डीजल से चलती हैं। उनके पास मौजूद कुछ लोकप्रिय कारों और बाइक्स में एक मर्सिडीज-एएमजी जी-क्लास, एक बीएमडब्ल्यू के 1600 जीटी डुकाटी, डुकाटी मल्टीस्ट्राडा 1260 और एक स्क्रैम्बलर डेजर्ट स्लेड शामिल हैं। जिस पर उन्हें भारत के एक और लोकप्रिय आध्यात्मिक हस्ती रामदेव को सवारी कराते देखा गया था।