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EV Charging: भारत का नया ईवी चार्जिंग एप, नहीं लेगा निजी डेटा, निजता को मिलेगी प्राथमिकता

Fri, 29 Aug 2025 07:42 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत में लॉन्च होने वाला नया EV चार्जिंग एप अब यूजर्स की पर्सनल जानकारी नहीं लेगा। BHEL और NPCI द्वारा बनाया जा रहा यह ऐप सिर्फ सामूहिक डेटा का इस्तेमाल कर सर्विस बेहतर करेगा और यूजर्स की प्राइवेसी को सुरक्षित रखेगा।
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EV Charging Stations - फोटो : Freepik
भारत का नया इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) चार्जिंग एप संभवतः अब यूजर्स की पर्सनल जानकारी इकट्ठा करने के बजाय डेटा प्राइवेसी (निजता) को प्राथमिकता देगा। यह एप सिर्फ यूजर के व्यवहार और चार्जिंग पैटर्न का विश्लेषण करेगा ताकि सर्विस और इनोवेशन को बेहतर बनाया जा सके। लेकिन इसके लिए किसी का व्यक्तिगत डेटा स्टोर नहीं होगा।

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Electric Vehicles Charging Station - फोटो : Freepik
एप कैसे काम करेगा
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दो अधिकारियों ने बताया कि यह एप व्यक्तिगत उपयोगकर्ता और लेनदेन डेटा को संग्रहीत करने के बजाय समेकित (एग्रीगेटेड) और अनाम यूजर डेटा पर निर्भर हो सकता है। यानी किसी एक यूजर की जानकारी सेव करने के बजाय, सारे डेटा को मिलाकर विश्लेषण किया जाएगा। 

इस एप को भारी उद्योग मंत्रालय और भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) मिलकर बना रहे हैं। इसमें UPI बनाने वाली NPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) भी पार्टनर है।

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देशभर में लगेंगे 72,000 चार्जिंग स्टेशन - फोटो : AI
बैठक में उठे सवाल
हाल ही में मंत्रालय, BHEL, ईवी चार्जिंग ऑपरेटर और ऑटोमोबाइल कंपनियों के बीच हुई बैठक में डेटा प्राइवेसी को लेकर सवाल उठे। अधिकारियों ने साफ किया कि सभी चार्जिंग पॉइंट ऑपरेटरों को एप से जोड़ा जाएगा। ताकि जनता को पूरे देश में उपलब्ध चार्जिंग स्टेशन का पूरा नक्शा मिल सके। लेकिन इसमें किसी का व्यक्तिगत डेटा नहीं लिया जाएगा।

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Electric car EV charging battery at charger station - फोटो : Freepik
डिजिटल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट से मेल
यह कदम 2023 में पास हुए डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के हिसाब से है। जिसमें कहा गया है कि यूजर के डेटा पर उसका ही कंट्रोल होगा। यानी बिना इजाजत किसी कंपनी को डेटा स्टोर करने का हक नहीं होगा।

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Electric Vehicles - फोटो : Freepik
डेटा का इस्तेमाल कैसे होगा
विशेषज्ञों का कहना है कि ईवी चार्जर से मिलने वाला सामूहिक डेटा यह बताएगा कि कौन-सा चार्जर कितना इस्तेमाल हो रहा है, कहां पर चार्जिंग की सबसे ज्यादा डिमांड है, और कहां दिक्कतें आ रही हैं। इससे देशभर में ईवी चार्जिंग नेटवर्क का बेहतर नक्शा तैयार किया जा सकेगा। हालांकि, इसके साथ साइबर सिक्योरिटी को भी मजबूत बनाना होगा।

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Electric Car - फोटो : Freepik
ईवी मालिकों के लिए वन-स्टॉप सॉल्यूशन
BHEL का यह एप ईवी मालिकों के लिए वन-स्टॉप सॉल्यूशन होगा। इसमें यूजर्स पब्लिक चार्जिंग स्टेशन ढूंढ पाएंगे, चार्जिंग स्लॉट बुक कर पाएंगे और पेमेंट भी सीधे एप से कर सकेंगे।

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Electric Car Charging - फोटो : Freepik
क्यों जरूरी है यह एप
सरकार को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में ईवी की डिमांड कई गुना बढ़ेगी। नीति आयोग का अनुमान है कि 2030 तक यह सेक्टर 49 प्रतिशत की दर से हर साल बढ़ेगा।

फिलहाल, भारत में 1 अगस्त 2025 तक सिर्फ 29,277 पब्लिक चार्जिंग स्टेशन ही मौजूद हैं। जबकि देशभर में 88,500 से ज्यादा पेट्रोल पंप (सरकारी कंपनियों के) हैं। ऐसे में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना बेहद जरूरी है। 

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