Electric Car
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भारत पर इसका क्या असर पड़ेगा?
भारत फिलहाल रेयर अर्थ मैग्नेट्स के लिए आयात पर निर्भर है, जो ईवी निर्माण का एक छोटा लेकिन बेहद जरूरी हिस्सा है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने करीब 870 टन रेयर अर्थ मैग्नेट्स का आयात किया, जिसकी कीमत 306 करोड़ रुपये थी।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चीन दुनिया के लगभग 70 प्रतिशत रेयर अर्थ खनन और 90 प्रतिशत उत्पादन में अकेले भागीदार है। ऐसे में उसका निर्यात रोकना ईवी इंडस्ट्री के लिए बड़ा संकट बन सकता है। इसकी वजह से इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतें लगभग 8 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं, जिसका बोझ ग्राहकों पर पड़ेगा।
अब भारत के ऑटो निर्माता कंपनियों को मैग्नेट्स का 'एंड यूज' यानी इनके अंतिम इस्तेमाल की स्वयं घोषणा करनी होगी, तभी शिपमेंट क्लियर किया जाएगा। यह प्रक्रिया काफी लंबी है और इसे चीनी दूतावास से मंजूरी लेनी होती है। खबरों के मुताबिक, भारत की तरफ से 30 एप्लिकेशन भेजी गई हैं जो अभी भी चीन की मंजूरी का इंतजार कर रही हैं।
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