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Train Mileage: एक्सप्रेस से लेकर पैसेंजर तक... जानें ट्रेन चलाने में लगता है कितना डीजल?

Sat, 24 Feb 2024 06:20 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारतीय रेल - फोटो : Social media
चाहे वह कार हो या परिवहन का कोई अन्य साधन, नई गाड़ी खरीदते समय सबसे बड़ी चिंताओं में से एक उसका माइलेज होता है। इसी तरह, हमारे देश में ट्रेनों का माइलेज भी काफी महत्वपूर्ण है। आइए जानते हैं कि ट्रेन को एक किलोमीटर चलाने के लिए कितना डीजल खर्च होता है।
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भारतीय रेल - फोटो : istock
भारतीय रेलवे विभिन्न प्रकार के डीजल से चलने वाले इंजनों का संचालन करता है। ये ट्रेनें अपने वर्गीकरण, वजन, पावर और तय की गई दूरी जैसे कारकों के आधार पर अलग-अलग माइलेज देती हैं।
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भारतीय रेल - फोटो : Social media
उदाहरण के लिए, 12 डिब्बों वाली एक यात्री ट्रेन को एक किलोमीटर चलने के लिए सिर्फ 6 लीटर ईंधन की जरूरत होती है। इसी तरह, 24 डिब्बों वाली एक सुपरफास्ट ट्रेन भी एक किलोमीटर का माइलेज हासिल करने के लिए 6 लीटर ईंधन की खपत करती है। 12 डिब्बों वाली एक्सप्रेस ट्रेन को चलाने के लिए सिर्फ 4.5 लीटर प्रति किलोमीटर ईंधन की आवश्यकता होती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारतीय रेलवे में फिलहाल कोई भी ट्रेन एक किलोमीटर प्रति लीटर डीजल का माइलेज नहीं देती है।

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भारतीय रेल - फोटो : Social media
एक ट्रेन में डिब्बों या कोचों की संख्या उसके माइलेज को काफी प्रभावित करती है। कम डिब्बों वाली ट्रेनों से इंजन पर कम भार पड़ता है। जिसकी वजह से ईंधन की खपत कम होती है।
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भारतीय रेल - फोटो : Social Media
इसके अलावा, ट्रेन का प्रकार भी उसकी ईंधन दक्षता को प्रभावित करता है। उदाहरण के लिए, पैसेंजर ट्रेनें एक्सप्रेस या सुपरफास्ट ट्रेनों की तुलना में ज्यादा तेजी से ईंधन जलाती हैं। यह विसंगति यात्री ट्रेनों द्वारा अपने रूट पर कम अंतराल पर बार-बार रुकने से पैदा होती है। बार-बार रुकने की जरूरत की वजह से लोकोमोटिव की हाई स्पीड हासिल करने की क्षमता सीमित हो जाती है। जिससे एक्सीलरेटर और ब्रेक का ज्यादा इस्तेमाल होता है। नतीजतन, ईंधन की खपत बढ़ जाती है और माइलेज कम हो जाता है। इसके उलट, कम स्टॉप वाली एक्सप्रेस ट्रेनें ज्यादा माइलेज देती हैं क्योंकि वे लंबे समय तक लगातार रफ्तार बनाए रख सकती हैं।
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भारतीय रेल - फोटो : Social Media
भारतीय रेलवे प्रणाली में ट्रेनों का माइलेज ट्रेन के प्रकार, डिब्बों की संख्या और परिचालन जरूरतों जैसे कारकों के आधार पर अलग-अलग होता है। इन अलग-अलग चीजों को समझने से ट्रेनों की फ्यूल एफिशिएंसी और उनके ओवरऑल ऑपरेशन पर उनके प्रभाव के बारे में जानकारी मिलती है।
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