पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस और आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा, भारत Global Biofuels Alliance (वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन) के जरिए दुनिया को बायोफ्यूल (जैव ईंधन) पर एक नया रास्ता दिखाएगा। पुरी ने कहा, जी20 की अध्यक्षता के ठोस परिणाम के रूप में, यह विश्व स्तर पर भारत की स्थिति को मजबूत करने में मदद करेगा।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (जो पहले ट्विटर के नाम से जाना जाता था) पर पोस्ट की एक सीरीज के जरिए अपने विचार व्यक्त करते हुए, मंत्री जी ने कहा कि यह कोशिश निश्चित रूप से दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता को कम करेगा।
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Global Biofuel Alliance
- फोटो : ANI
नई दिल्ली में G20 शिखर सम्मेलन के मौके पर, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस (वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन) (GBA) के शुभारंभ का एलान किया। कम से कम 19 देश और 12 अंतर्राष्ट्रीय संगठन पहले ही गठबंधन में शामिल होने के लिए सहमत हो चुके हैं। लॉन्च के दौरान सिंगापुर, बांग्लादेश, इटली, अमेरिका, ब्राजील, अर्जेंटीना, मॉरीशस और यूएई के नेता मौजूद थे।
यह जैव ईंधन को अपनाने की सुविधा के लिए विकसित की जाने वाली भारत के नेतृत्व वाली पहल है।
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Ethanol
- फोटो : Social Media
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि G20 देशों और ऊर्जा से संबंधित वैश्विक संगठनों जैसे अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA), अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO), विश्व आर्थिक मंच (WEO), और विश्व एलपीजी एसोसिएशन द्वारा समर्थित दूरदर्शी वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन मजबूत होगा। वैश्विक जैव ईंधन व्यापार और सर्वोत्तम प्रथाओं से सदस्यों को Energy Quadrilemma (ऊर्जा चतुर्भुज) का सफलतापूर्वक सामना करने में मदद मिलती है।
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Ethanol
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पुरी ने कहा, 2025 तक ई20 के कार्यान्वयन से भारत को तेल आयात में लगभग ₹45,000 करोड़ और सालाना 63 मिलियन टन तेल की बचत होगी। E20 ईंधन 20 प्रतिशत इथेनॉल और बाकी फॉसिल (जीवाश्म) आधारित ईंधन का मिश्रण है।
भारत ने पहले ही इस वर्ष चरणबद्ध तरीके से 20 प्रतिशत मिश्रित ईंधन का उत्पादन शुरू कर दिया है और दो वर्षों में व्यापक उपलब्धता की उम्मीद है। गौरतलब है कि सरकार ने ई20 ईंधन का लक्ष्य 2030 से बढ़ाकर 2025 कर दिया है।
2022 में वैश्विक इथेनॉल बाजार का मूल्य 99.06 बिलियन अमेरिकी डॉलर था और 2032 तक 5.1 प्रतिशत की सीएजीआर से बढ़ने और 2032 तक 162.12 बिलियन अमेरिकी डॉलर को पार करने का अनुमान है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के अनुसार, नेट जीरो लक्ष्य के कारण 2050 तक 3.5-5x जैव ईंधन विकास की संभावना होगी, भारत के लिए एक बड़ा अवसर पैदा करेगा।