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PUCC: भारत में 50% वाहन बिना बीमा के, कई राज्यों में 30% से भी कम गाड़ियों के पास प्रदूषण प्रमाण पत्र

Wed, 30 Jul 2025 05:24 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भले ही देश में गाड़ियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन वाहन रखने से जुड़ी बुनियादी कानूनी शर्तों जैसे बीमा (इंश्योरेंस) और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUCC) की अनदेखी की जा रही है।
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Car Pollution - फोटो : Freepik
एक ताजा रिपोर्ट ने भारत में वाहन मालिकों की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भले ही देश में गाड़ियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन वाहन रखने से जुड़ी बुनियादी कानूनी शर्तों जैसे बीमा (इंश्योरेंस) और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUCC) की अनदेखी की जा रही है। कार्स24 की ओर से जारी की गई ORBIT डेटा स्टडी के मुताबिक, देश में 50 प्रतिशत से ज्यादा वाहन बिना वैध बीमा के चल रहे हैं। जिनमें सबसे ज्यादा संख्या दोपहिया वाहनों की है।

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Car Pollution - फोटो : Freepik
प्रदूषण प्रमाण पत्र को लेकर इन राज्यों में बेहद खराब स्थिति
रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्यों में PUCC यानी पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट (प्रदूषण प्रणाम पत्र) (पीयूसीसी) की अनुपालन दर 30 प्रतिशत से भी कम है। ये आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि देश में गाड़ियों की संख्या तो हर साल बढ़ रही है, लेकिन नियमों का पालन उतनी तेजी से नहीं हो रहा।

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Pollution - फोटो : Adobe Stock
दक्षिण भारत थोड़ा बेहतर, उत्तर भारत पिछड़ा
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि दक्षिण भारतीय राज्यों जैसे आंध्र प्रदेश और केरल की स्थिति थोड़ी बेहतर है। जहां पीयूसीसी और बीमा जैसे नियमों के अनुपालन की औसत दर लगभग 9.6 प्रतिशत है। वहीं, उत्तर भारत में यह अनुपालन सिर्फ 5.6 प्रतिशत है। रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर भारत में सबसे बड़ी समस्या एक्सपायर्ड इंश्योरेंस की है। जबकि दक्षिण भारत में पीयूसीसी का न होना अधिक देखने को मिल रहा है।

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Pollution - फोटो : अमर उजाला
महाराष्ट्र की हालत सबसे खराब, राजस्थान थोड़ा बेहतर
महाराष्ट्र में नियमों के अनुपालन की दर सिर्फ 1.9 प्रतिशत है, जो कि सबसे कम है। वहीं राजस्थान इस मामले में थोड़ा बेहतर है, जहां यह दर 6.74 प्रतिशत है। इससे साफ पता चलता है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में वाहन नियमों की अनदेखी का स्तर अलग-अलग है।

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Toll Plaza - फोटो : PTI
फास्टैग में बढ़त, लेकिन जरूरी दस्तावेजों में कमी
रिपोर्ट में FASTag (फास्टैग) इस्तेमाल पर भी रोशनी डाली गई है। जून 2024 से जून 2025 के बीच फास्टैग टोल कलेक्शन में 17.53 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है और औसत फास्टैग वॉलेट बैलेंस 408 रुपये है। इससे यह तो साफ है कि लोग डिजिटल पेमेंट को अपना रहे हैं, लेकिन जरूरी कागजात जैसे बीमा और प्रदूषण प्रमाण पत्र को लेकर अभी भी लापरवाही बरती जा रही है।

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Traffic Police - फोटो : PTI
ट्रैफिक चालान का भारी बकाया
एक और बड़ी चिंता की बात यह है कि देश में ट्रैफिक चालान का भारी बैकलॉग है। 2015 से अब तक 5.11 लाख करोड़ रुपये के चालान जारी किए जा चुके हैं। लेकिन इनमें से सिर्फ 1.92 लाख करोड़ रुपये ही वसूले जा सके हैं। बाकी 3.18 लाख करोड़ रुपये अदालतों में लंबित हैं। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 7.69 करोड़ चालान अब भी कोर्ट में अटके हुए हैं। 

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