केंद्र सरकार ने शुक्रवार को इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एक नई नीति को मंजूरी दी है। जो भारत में मैन्युफेक्चरिंग यूनिट्स (विनिर्माण इकाइयां) स्थापित करने के लिए कम से कम लगभग 4,150 करोड़ रुपये का निवेश करने वाली कंपनियों को आयातित कारों पर शुल्क रियायत प्रदान करती है।
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Tesla Car Plant
- फोटो : Tesla
नई इलेक्ट्रिक आयात दर में कटौती का क्या प्रावधान है?
सरकार ने एक बयान में कहा कि विदेशी कंपनियों को आयात शुल्क पर रियायत हासिल करने के लिए इस नीति के तहत तीन साल के भीतर कम से कम 500 मिलियन डॉलर या लगभग 4,150 करोड़ रुपये का निवेश और विनिर्माण सुविधाओं में निवेश करना होगा।
कुल आयातित इलेक्ट्रिक वाहनों पर शुल्क रियायतें किए गए निवेश या 6,484 करोड़ रुपये (पीएलआई योजना के तहत प्रोत्साहन के बराबर), जो भी कम हो, उस पर निर्धारित हैं।
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Tesla Car
- फोटो : Tesla
यदि निवेश 800 मिलियन से ज्यादा हो जाता है, तो 15 प्रतिशत के कम टैक्स पर, पांच वर्षों के लिए अधिकतम 40,000 इलेक्ट्रिक वाहनों के आयात की अनुमति दी जाएगी। जिनकी कीमत 35,000 डॉलर और उससे ज्यादा है, लेकिन प्रति वर्ष 8,000 से ज्यादा कारें नहीं। वार्षिक आयात सीमाओं के बचे रहने पर, उतना ही अगले साल बढ़ाने की अनुमति है।
कंपनी की निवेश प्रतिबद्धता को बैंक गारंटी द्वारा समर्थित होना चाहिए, जो छूट वाले सीमा शुल्क को प्रतिस्थापित करती है।
घोषणा में कहा गया है कि योजना के दिशानिर्देशों में उल्लिखित घरेलू मूल्य वर्धन (डीवीए) और न्यूनतम निवेश मानदंड को पूरा करने में नाकाम रहने पर बैंक गारंटी लागू होगी।
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Elon Musk Meets PM Modi
- फोटो : For Reference Only
यह एलन मस्क की टेस्ला के लिए बड़ी जीत कैसे है?
आयात कर दरों में कमी की नीति टेस्ला के लिए एक महत्वपूर्ण जीत है। जिसके लिए कंपनी बड़े पैमाने पर लॉबिंग कर रही थी। इसके प्रमुख एलन मस्क ने इन टैक्स को "दुनिया में सबसे ज्यादा" बताते हुए सवाल किया था।
भारत में एंट्री करने के वर्षों की कोशिशों के बावजूद, टेस्ला को नई दिल्ली से गतिरोध का सामना करना पड़ा। क्योंकि भारत सरकार ने स्थानीय मैन्युफेक्चरंग की प्रतिबद्धता की मांग की। हाल के महीनों में, टेस्ला के प्रतिनिधियों ने भारत का बार-बार दौरा किया, और सीईओ एलन मस्क ने पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की।
इस समय, पूरी तरह से निर्मित इकाइयों (सीबीयू) के रूप में आयातित कारों पर उनकी लागत के आधार पर 60 से 100 प्रतिशत तक सीमा शुल्क लगता है।
कार निर्माता की वेबसाइट के अनुसार, टेस्ला के सबसे सस्ता वाहन मॉडल 3 की कीमत न्यूयॉर्क में 38,990 डॉलर से शुरू होती है। जो भारत की नई ईवी नीति में फ्लोर प्राइस से ऊपर है।
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केंद्रीय वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल
- फोटो : Amar Ujala
'टेस्ला के साथ कोई विशेष व्यवहार नहीं'
हाल ही में, वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत अपनी नीतियों को अमेरिकी ईवी निर्माता टेस्ला के अनुरूप नहीं बनाएगा। उन्होंने कहा कि कानून और शुल्क नियम दुनिया भर के सभी इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में एक आधार स्थापित करने के लिए आकर्षित करने के लिए तैयार किए जाएंगे।
बयान के अनुसार, नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति "भारतीय उपभोक्ताओं को लेटेस्ट टेक्नोलॉजी तक पहुंच प्रदान करेगी, मेक इन इंडिया पहल को बढ़ावा देगी, ईवी कंपनियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देकर ईवी इकोसिस्टम को मजबूत करेगी, जिससे उच्च मात्रा में उत्पादन, पैमाने की अर्थव्यवस्थाएं, उत्पादन लागत में कमी, कच्चे तेल के आयात में कमी, व्यापार घाटे में कमी, खासकर शहरों में वायु प्रदूषण में कमी होगी और स्वास्थ्य और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।"
इसमें कहा गया है कि नीति का लक्ष्य प्रतिष्ठित वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं से ई-वाहन क्षेत्र में निवेश आकर्षित करना है।