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EV: 2035 तक भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री 2.2 करोड़ यूनिट्स तक पहुंचने का अनुमान, जानें डिटेल्स

Mon, 15 Dec 2025 07:48 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) की बिक्री 2035 तक 22 मिलियन यूनिट तक पहुंच सकती है। और ज्यादातर गाड़ियों के सेगमेंट में ईवी की पहुंच 50 प्रतिशत को पार कर जाएगी।
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Electric Car - फोटो : Freepik
भारत में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) की बिक्री वर्ष 2035 तक 2.2 करोड़ यूनिट तक पहुंच सकती है। एक नई रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई है। इस दौरान अधिकांश वाहन सेगमेंट में ईवी की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक होने की संभावना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह तेज वृद्धि अनुकूल मांग रुझानों, मजबूत होती सप्लाई चेन और प्रगतिशील नियामकीय नीतियों के चलते संभव होगी। जो भारत को स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन के रास्ते पर मजबूती से आगे बढ़ा रही हैं।

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Tesla Model Y Performance - फोटो : Tesla
मजबूत सप्लाई चेन बनेगी ईवी विस्तार की रीढ़
केपीएमजी इंडिया की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के पास सप्लाई चेन से जुड़े संभावित जोखिमों को अवसर में बदलने का बड़ा मौका है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिए जरूरी कच्चे माल- जैसे लिथियम, निकेल, कोबाल्ट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स की मांग आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ने वाली है। ऐसे में भारत को अपनी ईवी इकोसिस्टम में मजबूती और प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बनाने के लिए दीर्घकालिक रणनीतियों पर काम करने की जरूरत है।

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Electric Car Charging - फोटो : Freepik
पारंपरिक वाहनों से कहीं ज्यादा खनिजों की जरूरत
रिपोर्ट के अनुसार, एक इलेक्ट्रिक वाहन में पारंपरिक आईसी इंजन वाले वाहन की तुलना में लगभग छह गुना अधिक खनिजों का इस्तेमाल होता है। वैश्विक स्तर पर ईवी अपनाने की रफ्तार बढ़ने के साथ लिथियम, निकेल, कोबाल्ट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स की मांग में तेज उछाल आने की संभावना है। हालांकि, चिंता की बात यह है कि इन अहम खनिजों की वैश्विक रिफाइनिंग क्षमता का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा कुछ ही देशों में केंद्रित है। जिससे भू-राजनीतिक और व्यापारिक जोखिम पैदा होते हैं।

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Electric Car Charging - फोटो : Freepik
घरेलू संसाधनों से घट सकती है आयात पर निर्भरता
रिपोर्ट में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में खनिज भंडारों की खोज, साथ ही देश के भीतर प्रोसेसिंग और रीसाइक्लिंग पहलों को बढ़ावा देकर भारत अपनी आयात निर्भरता को काफी हद तक कम कर सकता है। इस दिशा में घरेलू रिफाइनिंग को प्रोत्साहन देना, दीर्घकालिक सप्लाई अनुबंध सुनिश्चित करना और वैकल्पिक रसायनों के लिए अनुसंधान एवं विकास में निवेश करना बेहद जरूरी कदम साबित हो सकते हैं।

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Electric Car Charging - फोटो : Freepik
कच्चे माल की सुरक्षा ईवी लक्ष्य की कुंजी
केपीएमजी इंडिया में ऑटोमोटिव और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लीड पार्टनर रोहन राव ने कहा कि भारत की ईवी महत्वाकांक्षाएं केवल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता पर नहीं, बल्कि कच्चे माल की मजबूत आपूर्ति व्यवस्था पर भी निर्भर करती हैं। अगर सप्लाई चेन लचीली और सुरक्षित नहीं हुई, तो ईवी में बदलाव की प्रक्रिया में देरी या बाधा आ सकती है।

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Electric Car Charging - फोटो : Freepik
भारत बन सकता है ईवी लीडर
रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि भारत की ईवी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह कच्चे माल से जुड़ी चुनौतियों से कितनी प्रभावी तरीके से निपटता है। घरेलू पहलों को वैश्विक साझेदारियों के साथ जोड़कर भारत न केवल अपनी सप्लाई चेन को सुरक्षित कर सकता है। बल्कि कमजोरियों को कम करते हुए टिकाऊ मोबिलिटी के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर भी बढ़ सकता है।

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Electric Car Charging - फोटो : Freepik
दीर्घकालिक निवेश होंगे निर्णायक
केपीएमजी इंडिया में डील एडवाइजरी पार्टनर राघवन विश्वनाथन ने कहा कि खनिजों की खोज, रिफाइनिंग और रीसाइक्लिंग में रणनीतिक निवेश भविष्य के लिए निर्णायक साबित होंगे। उनके मुताबिक, भारत को अभी से साझेदारियां और क्षमताएं विकसित करनी होंगी। ताकि वैश्विक ईवी इकोसिस्टम में दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता सुनिश्चित की जा सके।

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