मानसून का मौसम पूरे जोरों पर है। चिलचिलाती गर्मी से राहत तो मिल गई लेकिन, बारिश का पानी भारतीय सड़कों पर चलने वाले वाहन चालकों की परेशानियों को और बढ़ा देता है। पिछले कुछ दिनों में देश के कई हिस्सों में भारी बारिश हो रही है। जिससे शहरों में भारी जलभराव हो रहा है और आने-जाने और दैनिक जीवन में व्यवधान आ रहा है। देश में सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले शहरों में नई दिल्ली और मुंबई जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं। जलभराव न सिर्फ लोगों की आवाजाही को प्रतिबंधित करता है। बल्कि हमारे वाहनों को भी नुकसान पहुंचाता है, जो अक्सर बर्बाद हो सकता है।
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जलभराव में ड्राइविंग
- फोटो : अमर उजाला
दोपहिया वाहन पानी के नुकसान की चपेट में जल्दी आ जाते हैं। क्योंकि इनमें कई खुले मैकेनिकल पुर्जे होते हैं जो जंग लगने और खराब होने की संभावना रखते हैं। भारी मानसून ट्रैफिक के दौरान प्रभावी ढंग से निकलने के लिए दोपहिया वाहन सबसे अच्छे विकल्प होते हैं। वहीं, इसके साथ ही उन्हें सबसे ज्यादा जोखिम भी उठाना पड़ता है। इलेक्ट्रिकल या मैकेनिकल कंपोनेंट्स को होने वाला कोई भी नुकसान दोपहिया वाहन को चलाने में असमर्थ बनाने की क्षमता रखता है। और इसकी वजह से, यह सवारों के लिए असुरक्षित हो जाता है। लगातार बारिश के साथ, हमारे वाहन लगातार वातावरण के संपर्क में रहते हैं। और नतीजतन, जब भी हम उन पर सवार होते हैं तो उनके खराब होने की संभावना ज्यादा होती है।
जब भी ऐसी परिस्थितियां पैदा हों, तो उनसे निपटने के लिए दोपहिया वाहन की कमजोरियों और बदलते मौसम का उन पर पड़ने वाले असर को समझना जरूरी है।
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बीकानेर में जलभराव में ड्राइविंग
- फोटो : PTI
इंजन और एग्जॉस्ट पाइप में पानी भरना
अगर कोई दोपहिया वाहन बाढ़ के पानी में फंस जाता है, तो उसके इंजन में हवा के इनलेट या स्पार्क प्लग कैविटी जैसी खुली जगहों के जरिए पानी भरने की बहुत ज्यादा संभावना होती है। इससे हाइड्रोलॉक हो सकता है। जहां इंजन के भीतर अनियमित कंप्रेशन होता है और यह इंजन को सीज कर सकता है। पानी हवा/ईंधन मिश्रण की तरह कंप्रेस नहीं होता है जिसकी इंजन को जरूरत होती है। जब सिलेंडर के अंदर पानी है और आप इंजन स्टार्ट करते हैं, तो पिस्टन इंजन ब्लॉक के अंदर अत्यधिक दबाव बनाते हैं जिससे यह बर्बाद हो सकता है।
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जलभराव में ड्राइविंग
- फोटो : अमर उजाला
इंजन में पानी भरने से तेल खराब हो सकता है। जब पानी इंजन के तेल के साथ मिल जाता है, तो यह तेल के लुब्रिकेशन का खासियत को कम कर देता है। जिससे इंजन के इंटरनल कंपोनेंट्स , जैसे बियरिंग्स और क्रैंकशाफ्ट के बीच गर्मी और घर्षण (फ्रिक्शन) का स्तर बढ़ जाता है। इतना ही नहीं, पानी इंजन के कंपोनेंट्स को तेजी से जंग लगाने का कारण बनता है। जिससे कुल मिलाकर इंजन की लाइफ कम हो जाती है। और समय से पहले ही घिसावट हो जाती है।
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पटना में जलभराव में ड्राइविंग
- फोटो : PTI
इलेक्ट्रिक कंपनोंट्स और उनकी कमजोरियां
अगर दोपहिया वाहन को जलभराव वाले क्षेत्र में छोड़ दिया जाता है, तो पानी उसके इलेक्ट्रिक सिस्टम में रिस सकता है। जिससे उसकी पूरी कार्यप्रणाली खराब हो सकती है। इंटरनल वायरिंग, सेंसर और जरूरी फीचर्स सभी इस बात पर निर्भर करती हैं कि वे सीधे पानी के संपर्क में न हों। जो पानी के लंबे समय तक संपर्क में रहने के कारण जंग खा सकते हैं। जंग इलेक्ट्रिक कंपोनेंट्स की कंडक्टिविटी (चालकता) को कम कर देता है। जिसकी वजह से यह पूरी तरह फेल हो सकती है। जिससे दोपहिया वाहन चलाने लायक नहीं रहता।
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जलभराव में ड्राइविंग
- फोटो : अमर उजाला
पानी का रिसाव दोपहिया वाहन के संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को नुकसान पहुंचा सकता है। इस समय, दोपहिया वाहन दिन-ब-दिन अधिक तकनीक से चलने वाले बन रहे हैं और एबीएस, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी मैनेजमेंट और ट्रैक्शन कंट्रोल जैसे फीचर्स के साथ आता है। मॉडर्न दोपहिया वाहन ईसीयू के साथ आते हैं जो वाहन पर सवार किसी भी या सभी इलेक्ट्रॉनिक सबसिस्टम का मैनेजमेंट करते हैं। और वाहन की कार्यक्षमता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। इन कंपोनेंट्स को होने वाली कोई भी क्षति उन्हें खराब कर सकती है और दुर्घटनाओं का कारण बन सकती है।
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जलभराव में ड्राइविंग
- फोटो : अमर उजाला
अन्य भौतिक कंपोनेंट्स को नुकसान
जलभराव वाले क्षेत्रों से गुजरना या बाढ़ के पानी में दोपहिया वाहन फंस जाना वाहन के मैकेनिकल कंपोनेंट्स के लिए हानिकारक हो सकता है। दोपहिया वाहन के ब्रेक में पानी लीक होने का सामना करना पड़ सकता है। यदि पानी ब्रेक कैलीपर्स, डिस्क और व्हील बेयरिंग में घुस जाता है, तो इससे ये कंपोनेंट खराब हो सकते हैं। जिससे वाहन की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। भले ही रिसाव की सीमा कम हो और दिखाई देने वाला जंग न लगे। फिर भी दोपहिया वाहन की जांच करवाना महत्वपूर्ण है क्योंकि पानी ब्रेक पैड को तेजी से खराब कर सकता है।
यात्रा के दौरान बाढ़ के पानी से गुजरने से दोपहिया वाहन की चेन और स्प्रोकेट खराब हो सकते हैं। गाड़ी चलाते समय पानी के साथ लंबे समय तक संपर्क में रहने से चेन का लुब्रिकेंट धुल सकता है। और जल्दी खराब हो सकता है या टूट भी सकता है। बाढ़ का पानी आगे फोर्क सील और शॉक एब्जॉर्बर को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे सवारी की गुणवत्ता खराब हो सकती है।