प्रतीकात्मक तस्वीर
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बैटरी स्वैपिंग भी पीछे
इतना ही दिल्ली में तो अभी बैटरी स्वैपिंग स्टेशन भी जरूरत के हिसाब से कम हैं। फिलहाल राजधानी में अभी 948 बैटरी स्वैपिंग स्टेशन हैं, जबकि जरूरत 1606 की है। हालांकि सरकार ने साल के अंत तक इसे 1,268 तक पहुंचाने का लक्ष्य बनाया है।
एक्सपर्ट्स का क्या मानना है?
सीएसई की अनुमिता रॉयचौधरी का कहना है कि सिर्फ चार्जिंग स्टेशन बनाना काफी नहीं है। इन्होंने कहा कि चार्जिंग नेटवर्क, बैटरी स्वैपिंग और ‘राइट टू चार्ज’ कानून को एक साथ लागू करना जरूरी है। ताकि लोग अपने पार्किंग स्लॉट में बिना किसी बाधा के चार्जर लगा सकें। साथ ही, नई इमारतों को अनिवार्य रूप से ईवी-रेडी बनाना होगा। वहीं आईसीसीटी के अमित भट्ट मानते हैं कि घर और ऑफिस चार्जिंग (डेस्टिनेशन चार्जिंग) पर भी उतना ही ध्यान देना होगा, जितना पब्लिक चार्जिंग पर देने की जरूरत है।