दिल्ली सरकार ने अपनी इलेक्ट्रिक वाहन नीति को तीन महीने के लिए बढ़ाने का फैसला किया है, जो 31 दिसंबर को समाप्त होने वाली थी। इस कदम के साथ, दिल्ली ईवी नीति को अब 31 मार्च 2024 तक बढ़ाने का इरादा है। पीटीआई ने यह जानकारी दी है। यह कदम दिल्ली-एनसीआर में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के इच्छुक उपभोक्ताओं के साथ-साथ ईवी उद्योग के अन्य हितधारकों के लिए भी एक बहुप्रतीक्षित राहत प्रदान करेगा।
विज्ञापन
2 of 5
Electric Vehicles
- फोटो : For Reference Only
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दिल्ली सरकार की कैबिनेट दिल्ली ईवी नीति को 31 मार्च 2024 तक बढ़ाने को मंजूरी देगी। इस नीति को अगस्त 2020 में अधिसूचित किया गया था। इसे 2024 तक राष्ट्रीय राजधानी में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत तक बढ़ाने के लक्ष्य के साथ घोषित किया गया था।
विज्ञापन
3 of 5
Electric Vehicles
- फोटो : iStock
दिल्ली ईवी नीति मूल रूप से 8 अगस्त 2023 को खत्म हो गई थी और तब से इसे बार-बार विस्तार दिया गया है। वर्तमान में, दिल्ली सरकार कथित तौर पर नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति पर काम कर रही है। लेकिन यह अभी तक तय नहीं हुआ है कि इसे कब लागू किया जाएगा। ऐसा लगता है, दिल्ली सरकार मौजूदा ईवी नीति को तब तक बढ़ाने का लक्ष्य बना रही है, जब तक नई नीति लागू नहीं हो जाती।
4 of 5
Electric Vehicles
- फोटो : iStock
इससे पहले, दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा था कि दिल्ली ईवी नीति 2.0 उस लागत को देखते हुए वाहनों के रेट्रोफिटिंग को प्रोत्साहित करेगी। इससे ईवी खरीदार अपने मौजूदा पेट्रोल या डीजल-चालित वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदल सकेंगे। जिससे उन्हें एकदम नए ईवी खरीदने की तुलना में काफी कम लागत पर इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने की अनुमति मिलेगी।
मंत्री ने कहा कि एक सामान्य पेट्रोल वाली मारुति सुजुकी जिप्सी को ईवी में बदलने में लगभग 5 लाख रुपये से 6 लाख रुपये का खर्च आता है, जो कि ज्यादा है। गहलोत ने इशारा दिया कि दिल्ली ईवी नीति 2.0 की मदद से उपभोक्ताओं के लिए यह लागत बहुत कम हो जाएगी।