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Royal Enfield: रॉयल एनफील्ड: एशिया में कैसे बढ़ रही है बुलेट मोटरसाइकिलों की बिक्री

Mon, 26 Oct 2020 03:22 PM IST
अमर शर्मा बीबीसी हिंदी
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Royal Enfield - फोटो : For Reference Only
दुनिया के सबसे बड़े मोटरसाइकिल बाजार में अपने पांव जमाने के उद्देश्य से रॉयल एनफील्ड ब्रैंड तेजी से अपना विस्तार कर रही है। रॉयल एनफील्ड दुनिया की सबसे पुराने मोटरसाइकिल ब्रैंड्स में से एक है जो आज भी बेहद पसंद की जाती है। आइए जानते हैं आखिर क्या है इस मोटरसाइकिल की कामयाबी का राज। 

भारतीय बाजार में अच्छी बिक्री दर्ज करने वाली इस कंपनी का मालिकाना हक साल 1994 से भारत के आइशर ग्रुप के पास है।

ये कंपनी अब एशिया में अपनी बिक्री बढ़ाना चाहती है और इसलिए हाल में इसने थाईलैंड में एक नई फैक्ट्री बनाने की योजना का एलान किया है।

रॉयल एनफील्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनोद दसारी ने बीबीसी को बताया कि भारतीय उपभोक्ता इस मोटरसाइकिल का स्टाइल और इसकी विरासत पसंद करते हैं। 
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Royal Enfield Classic 350 - फोटो : For Reference Only
वो कहते हैं, "हम बेहतर मोटरसाइकिलें बनाते हैं जिनकी कीमत भी अधिक नहीं होती। साथ ही हम केवल भारत के लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए मोटरसाइकिलें बनाते हैं।"

उम्मीद की जा रही है कि थाईलैंड में लगने वाली कंपनी की फैक्ट्री में 12 महीनों के भीतर काम शुरू हो जाएगा। माना जा रहा है कि भारत के बाद ये कंपनी की दूसरी सबसे बड़ी फैक्ट्री होगी।

वियतनाम, मलयेशिया और चीन जैसे दक्षिणपूर्व एशिया के देशों को मोटरसाइकिल निर्यात करने के लिए कंपनी इस फैक्ट्री को एक्सपोर्ट हब बनाना चाहती है।

इसके लिए विनोद दसारी की बड़ी योजनाएं हैं। वो अगले तीन से पांच सालों तक हर तिमाही में एक नई मोटरसाइकिल लॉन्च करना चाहते हैं।

वो कहते हैं, "हमारे लिए एशिया प्रशांत बेहद अहम बाजार है और हमारे उपभोक्ता महत्वाकांक्षी हैं और उन्हें हमसे कुछ बेहतर की अपेक्षा है। 
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Royal Enfield Classic 350 - फोटो : For Reference Only
आगे बढ़ने की लड़ाई
मोटरसाइकिल सवारी की एशिया में एक मजबूत परंपरा है। मोटरसाइकिल की बिक्री के मामले में भारत दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है। इसके बाद इस मामले में थाईलैंड, इंडोनेशिया और वियतनाम आगे हैं।

इन देशों की भीड़भाड़ वाली सड़कों पर, खासकर बड़े शहरों में, ट्रैफिक जाम से बच कर आगे जाने का मोटरसाइकिल सबसे आसान तरीका है।

मोटरसाइकिल बिक्री के बीते साल के आंकड़ों को देखें तो रॉयल एनफील्ड की बिक्री इस पूरे इलाके में 88 फीसदी बढ़ी है। ये कंपनी केवल 250-750 सीसी क्लास के मिड-सेगमेंट मार्केट के लिए मोटरसाइकिल बनाती है।

लेकिन एशिया में सभी मोटरसाइकिल कंपनियां कामयाब नहीं रही हैं।

एक तरफ जहां रॉयल एनफील्ड एशिया के इलाके में और विस्तार करने की योजना बना रही है, वहीं दूसरी तरफ हाल में हार्ले-डेविडसन ने इस इलाके से अपना काम समेटने की घोषणा की है। 

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Royal Enfield - फोटो : For Reference Only
फ्रॉस्ट एंड सुलिवन में ट्रांसपोर्ट एक्सपर्ट विवेक वैद्य बताते हैं, "हार्ले-डेविडसन की मोटरसाइकिलों को भारत में लोग महंगा मानते हैं। यहां की सड़कें, स्पीड और ट्रैफिक को लेकर सरकार के नियम, हाई स्पीड में मोटरसाइकिल चलाने के लिए अनुकूल नहीं हैं।"

वो कहते हैं, "कंपनी ने कम ताकत वाले इंजन बनाना शुरू तो किया, लेकिन इस मामले में वो अधिक कामयाब साबित नहीं सकी। इस सेगमेन्ट में रॉयल एनफील्ड को चुनौती देना कतई आसान नहीं था।"

जानकार मानते हैं कि हार्ले-डेविडसन के विपरीत एशिया के मोटरसाइकिल उपभोक्ताओं के लिए रॉयल एनफील्ड के उत्पाद बेहतर रहे हैं।

मोटर स्पोर्ट कंसल्टेंट स्कॉट लुकाएटिस कहते हैं, "इस्तेमाल में आसानी, साधारण डिजाइन और अपने क्लासिक विंटेज स्टाइल के लिए उपभोक्ता रॉयल एनफील्ड की मोटरसाइकिलें पसंद करते हैं।"

"वो कम खर्च पर अपने उपभोक्ताओं को स्पोर्ट्स बाइक खरीदने का मौका देते हैं। साथ ही उनके उपभोक्ताओं को उन मोटरसाइकिलों के बारे में अधिक तकनीकी जानकारी की जरूरत नहीं होती, न ही उनके रखरखाव में अधिक खर्च करना पड़ता है।"

लेकिन विनोद दसारी मानते हैं कि रॉयल एनफील्ड की विरासत उपभोक्ताओं को आकर्षित करती हैं। वो कहते हैं "कंपनी केवल एक उत्पाद नहीं बेच रही बल्कि उस उत्पाद के साथ उसका सालों का अनुभव है।"
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Royal Enfield Taurus - फोटो : For Reference Only
रॉयल एनफील्ड का इतिहास
1893 - साइकिल बनाने वाली ये कंपनी पहले एनफील्ड में मौजूद रॉयल स्मॉल आर्म्स फैक्ट्री के लिए कलपुर्जे बनाती थी। बाद में इसने अपना नाम रॉयल एनफील्ड रख लिया।
1901 - ब्रिटेन में कंपनी ने मोटर से चलने वाली अपनी पहली साइकिल बनाई।
1914-18 - प्रथम विश्व युद्ध के दौरान कंपनी ने ब्रितानी सेना के साथ-साथ बेल्जियम, फ्रांस, अमरीका और रूस की सेना को भी मोटरसाइकिल स्पालई की।
1932 - कंपनी ने अपनी पहली "बुलेट" मोटरसाइकिल बनाई जिसमें खास, स्लोपर इंजन का इस्तेमाल किया गया था। इस मॉडल को काफी पसंद किया गया।
1939-1945 - द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान कंपनी ने सेना के लिए मोटरसाइकिल बनाने के साथ-साथ साइकिल, जनरेटर और एंटी-एयरक्राफ्ट गन बनानी शुरू की। पैराशूटिस्ट और ग्लाइडर सैनिकों के इस्तेमाल के लिए कंपनी ने जानेमाने 'फ्लाइंग फ्ली' नाम के ग्लाइडर का भी उत्पादन किया।
1960 - ये पारंपरिक मोटरसाइकिलों का जमाना था। कई कंपनियों ने इस दौरान मोटरसाइकिल बाजार में अपने कदम रखे। इनमें से एक कंपनी रॉयल एनफील्ड थी।
1970 - कंपनी ने ब्रिटेन में अपना काम बंद किया। कंपनी की भारतीय सहायक कंपनी, एनफील्ड इंडिया ने उत्पादन का काम अपने हाथों में लिया।
1994 - भारत की कंपनी आइशर मोटर्स ने एनफील्ड इंडिया को खरीद लिया। कंपनी का दोबारा नामकरण हुआ और इसका नाम रॉयल एनफील्ड मोटर्स लिमिटेड कर दिया गया।
2020 - कंपनी के लिए ब्रिटेन अभी भी महत्वपूर्ण बाजार बना हुआ है। मिडिलवेट मोटरसाइकिल कैटगरी में कंपनी की इंटरसेप्टर 650 यहां सबसे अधिक बिकने वाली मोटरसाइकिल है। 
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Royal Enfield - फोटो : For Reference Only
अगले साल रॉयल एनफील्ड मोटरसाइकिल बनाने के अपने 120 साल पूरे करने जा रही है। कोरोना महामारी से जूझ रहे भारत में कंपनी ने इस संबंध में किसी खास कार्यक्रम की कोई घोषणा नहीं की है।

जानकारों का मानना है कि कोरोना महामारी के बाद एशिया का मोटरसाइकिल बाजार एक बार फिर विकास के रास्ते आगे बढ़ेगा।

विवेक वैद्य कहते हैं, "मिलने जुलने से संक्रमण फैलने के डर से लोग सार्वजनिक परिवहन की बजाय निजी परिवहन पर अधिक जोर देंगे। ऐसे में ग्रामीण इलाकों में सस्ते परिवहन के रूप में मोटरसाइकिल बाजार का भविष्य बेहतर ही दिखता है।"
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