Royal Enfield
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फ्रॉस्ट एंड सुलिवन में ट्रांसपोर्ट एक्सपर्ट विवेक वैद्य बताते हैं, "हार्ले-डेविडसन की मोटरसाइकिलों को भारत में लोग महंगा मानते हैं। यहां की सड़कें, स्पीड और ट्रैफिक को लेकर सरकार के नियम, हाई स्पीड में मोटरसाइकिल चलाने के लिए अनुकूल नहीं हैं।"
वो कहते हैं, "कंपनी ने कम ताकत वाले इंजन बनाना शुरू तो किया, लेकिन इस मामले में वो अधिक कामयाब साबित नहीं सकी। इस सेगमेन्ट में रॉयल एनफील्ड को चुनौती देना कतई आसान नहीं था।"
जानकार मानते हैं कि हार्ले-डेविडसन के विपरीत एशिया के मोटरसाइकिल उपभोक्ताओं के लिए रॉयल एनफील्ड के उत्पाद बेहतर रहे हैं।
मोटर स्पोर्ट कंसल्टेंट स्कॉट लुकाएटिस कहते हैं, "इस्तेमाल में आसानी, साधारण डिजाइन और अपने क्लासिक विंटेज स्टाइल के लिए उपभोक्ता रॉयल एनफील्ड की मोटरसाइकिलें पसंद करते हैं।"
"वो कम खर्च पर अपने उपभोक्ताओं को स्पोर्ट्स बाइक खरीदने का मौका देते हैं। साथ ही उनके उपभोक्ताओं को उन मोटरसाइकिलों के बारे में अधिक तकनीकी जानकारी की जरूरत नहीं होती, न ही उनके रखरखाव में अधिक खर्च करना पड़ता है।"
लेकिन विनोद दसारी मानते हैं कि रॉयल एनफील्ड की विरासत उपभोक्ताओं को आकर्षित करती हैं। वो कहते हैं "कंपनी केवल एक उत्पाद नहीं बेच रही बल्कि उस उत्पाद के साथ उसका सालों का अनुभव है।"