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BS-6 फ्यूल आपकी कार या बाइक में कैसे करेगा काम, क्या होगा इसका असर माइलेज पर

Thu, 08 Nov 2018 09:40 AM IST
ऑटो डेस्क, अमर उजाला
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Bs-6
देश में लगातार प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है और सबसे बुरा हाल दिल्ली एनसीआर में है। इसी को देखते हुए सरकार ने भी कड़ा रवैया अपना लिया है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने 31 मार्च 2020 तक सभी BS-4 वाहनों पर रोक लगाए जाने की घोषणा की। जिसके बाद से ही वाहन कंपनियां BS6 वाहनों पर तेजी से काम कर रही हैं। 

अक्सर आप सुनते होंगे बीएस-2 वाहन, बीएस-3 वाहन और बीएस-4 वाहन। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन संख्याओं का मतलब क्या है? बीएस के आगे संख्या के बढ़ते जाने का मतलब है उत्सर्जन के बेहतर मानक, जो पर्यावरण के अनुकूल हैं। भारत में गाड़ियों के प्रदूषण को मापने के लिए बीएस का इस्तेमाल किया जाता है।
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air pollution - फोटो : file photo
बीएस के आगे जितना बड़ा नंबर लिखा होता है उस गाड़ी से उतने ही कम प्रदूषण होने की संभावना होती है। ये बीएस मानक देश का केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तय करता है। साथ ही देश में चलने वाली हर गाड़ी के लिए यह आवश्यक होता है कि वह इन सभी मानकों पर खरी उतरे। 

बीएस उत्सर्जन मानक वे मानक होते हैं जो भारत सरकार द्वारा स्थापित किए गए हैं। इस उत्सर्जन मानक के जरिये मोटर वाहनों के कारण होने वाले वायु प्रदूषण की मात्रा की व्याख्या की जाती है। 
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Car Pollution

फिलहाल  देश में बीएस-6 वाहनों की चर्चा जोरो पर है। आपके मन में कई सवाल उठ रहे होंगे कि आखिर  बीएस-6 स्तर के फ्यूल को बीएस-4 वाले इंजन में डालने पर क्या होगा? तो आइए आपको बताते हैं कि कैसे ये काम करेगा। 

बीएस-6 नॉर्म्स का फ्यूल जाहिर तौर पर प्रदूषण पर थोड़ी रोक लगाएगा, क्योंकि यह ईंधन काफी हद तक कार्बन मोनोऑक्साइड को रोकेगा। हालांकि दिल्ली-एनसीआर में स्मॉग के लिए सिर्फ गाड़ियां जिम्मेदार नहीं है। आईए जानते हैं दुपहिया वाहनों पर इसका असर-

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bikes under 1.5 Lakhs Rupees in India
दोपहिया वाहनों पर असर-
देश में फिलहाल सबसे ज्यादा संख्या बीएस-3 उत्सजर्न इंजन वाली बाइकों की है। ऐसी बाइकों के लिए बीएस-6 नॉर्म्स का इंजन शानदार काम करेगा। बाइक का मेंटेनेंस कम हो जाएगा और माइलेज थोड़ा बढ़ जाएगा। हालांकि बीएस-2 या बीएस-1 स्तर की बाइकों के लिए नया फ्यूल थोड़ी परेशानी कर सकता है। 
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Cars
कारों पर असर-
दिल्ली-एनसीआर में 2010 के बाद की सभी कारें बीएस-4 मानक वाली हैं। बीएस-3 मानक वाली भी कुछ कारें यहां चलाई जा रही हैं। ऐसे में इन कारों के लिए भी बीएस-6 नॉर्म्स वाला फ्यूल काफी अच्छा रहेगा। इंजन की लाइफ और माइलेज बढ़ जाएगा, मेंटेनेंस कम हो जाएगी। 
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crude oil
इन लोगों के लिए है परेशानी
सरकार के इस फैसले से सबसे ज्यादा परेशानी तेल कंपनियों को होगी। उन्हें बीएस-6 नॉर्म्स वाले ईंधन के लिए नई तकनीक और उपकरण लगाने होंगे। कंपनियों का निवेश बढ़ जाएगा, जिसकी वजह से तेल के दाम भी बढ़ सकते हैं।
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