कारें अब नए तेल पर चलती हैं: आपका डेटा। चौंकिए मत। भविष्य में आने वाली हर कार इंटरनेट कनेक्टेड होगी। फिलहाल बाजार में उपलब्ध इंटरनेट कनेक्टेड कारें भी आपका डेटा रिकॉर्ड करती है। डेटा दुश्मन नहीं है। कनेक्टेड कारें सुरक्षा में सुधार जैसी अच्छी चीजें करती हैं और आपको सेवा अलर्ट भेजती हैं। जो आपके डैशबोर्ड में चेक-इंजन लाइट की तुलना में बहुत अधिक सहायक होती हैं। लेकिन इस डेटा का इस्तेमाल किस तरह से होता है।
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internet connected cars
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डेटा कैसे है तेल से ज्यादा मूल्यवान
कुछ समय पहले प्रकाशित एक रिपोर्ट में यह बताया गया था कि मौजूदा समय में कंपनियां ग्राहकों को स्मार्ट टेलीविजन उसके उत्पादन की लागत पर भी बेचे जा सकते हैं। कंपनियां अपनी कमाई डेटा कलेक्शन के जरिए कर सकती हैं। स्मार्ट टीवी, रेफ्रिजरेटर्स, स्पीकर्स और आपके स्मार्टफोन फोन भी आपका डेटा कलेक्ट करते हैं। एक बार हमारे जीवन के बारे में इकट्ठा की गई जानकारी साझा, बेच या चोरी हो जाने के बाद, हम उस पर से नियंत्रण खो देते हैं।
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Smartphone Suvillance
- फोटो : सांकेतिक
कार ऐसे कर रही हैं जासूसी
वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट में यह समझाया गया है कि किस तरह से कारें पहियों पर चलने वाली स्मार्टफोन बनती जा रही हैं, जो बीमा फर्मों को और कार के निर्माता जहां भी चाहें उन्हें, एप्स के जरिये डेटा भेज और प्राप्त कर रही हैं। आलम तो यह है कि यदि आप अपने बिलों का भुगतान नहीं करते हैं तो, कुछ कार निर्माता तो आपक पर नजर रखने के लिए डेटा का उपयोग करने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं।
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Data Leak
कारें कैसे बनीं जासूस
पिछले दो दशकों में लगातार कारों में नए सेंसर्स जुड़ते जा रहे हैं। ये कार निर्माताओं के साथ सीधे तब तक संपर्क नहीं कर सकती जब तक कार में 'बिल्ट इन इंटरनेट' न हो। अब ज्यादातर नई कार बिल्ट इन इंटरनेट के साथ आती हैं। आर्टिकल में बताय गया है कि अमेरिका में कार निर्माता कंपनियां Ford, GM और BMW की 100 फीसदीकार मॉडलें इंटरनेट कनेक्टिविटी के साथ आ रही हैं।
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DATA LEAK
- फोटो : SELF
क्या है बिल्ट इन इंटरनेट
रिपोर्ट के मुताबिक कार सबसे सोफेस्टिकेटेड कंप्यूटर है। भले ही आपके पास लैपटॉप हो लेकिन कार के मल्टिपल कनेक्टेड ब्रेन होते हैं जो हर घंटे 25GB तक डेटा जनरेट कर सकते हैं। यानी आप 1TB हार्ड डिस्क एक महीने में भर सकते हैं। एक कनेक्टेड कार में खुद का डेटा सिम लगा होता है। GM 1.1 करोड़ से ज्यादा ऐसी कारें बेच चुकी है। अब इंडिया में भी कई कनेक्टेड कारें बाजार में दस्तक दे चुकी हैं। यानी भारत में कारों से जासूसी के मामले बढ़ेंगे।
कारों द्वारा जमा किया गया सभी डेटा नुकसान नहीं है जैसे कार की एक्सेलरेशन और रफ्तार का आंकड़ा। कार कंपनियां इन आकड़ों का उपयोग कार की मकैनिकल इंप्रूवमेंट्स के लिए कर सकती हैं। लेकिन मामला तब बदल जाता है जब स्मार्टफोन से कनेक्ट करते ही आपकी लोकेशन का डेटा, फोन का डेटा, कॉन्टैक्ट्स जैसी जानकारियां भी इंफोटेंटमेंट सिस्टम कॉपी करता है। कार कंपनियां इस बारे में जानकारी नहीं देती कि कंपनी ग्राहक की कौन-कौन सी डेटा जमा कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार इंटरनेट कनेक्टेड कारें ग्राहक की लोकेशन तब भी रिकॉर्ड करती हैं जब वह कार की नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल नहीं कर रहे होते हैं।