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आजादी से पहले शुरू हुई महिंद्रा एंड मोहम्मद कंपनी कैसे बनी दुनिया की धाकड़ ब्रांड 'Mahindra'

Sun, 12 Jul 2020 06:12 PM IST
श्रीधर मिश्रा ऑटो डेस्क, अमर उजाला
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Mahindra - फोटो : Mahindra
महिंद्रा एंड महिंद्रा आज देश की सबसे ताकतवर कंपनियों में से एक है। महिंद्रा आज डीजल, पेट्रोल से लेकर इलेक्ट्रिक कारें तक बना रही है। कंपनी के बनाए ट्रैक्टर देश के किसानों का दशकों से विश्वास जीत रहे हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि जब यह कंपनी बनी थी तब इसका नाम महिंद्रा एंड महिंद्रा नहीं बल्कि, महिंद्रा एंड मोहम्मद था? भारत की आजादी से पहले बनी यह कंपनी देश की आजादी के बाद दुनियाभर में अपना झंडा फहरा चुकी है। आज हम आपको महिंद्रा से जुड़ी 10 ऐसी बातों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आपको हैरान कर देंगी। 
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Mahindra - फोटो : Mahindra

2 अक्टूबर 1945 को बनी कंपनी


2 अक्टूबर 1945 को महिंद्रा एंड मोहम्मद के रूप में कंपनी की स्थापना हुई थी। कंपनी को महिंद्रा भाइयों और गुलाम मोहम्मद की साझेदारी में शुरू किया गया था। लेकिन साल 1948 में गुलाम मोहम्मद पाकिस्तान में वित्तमंत्री बनने चले गए, जिसके बाद कंपनी का नाम बदलकर महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड (एम एंड एम) कर दिया गया।


1954 में जीप से शुरू हुई कहानी


आपको जान कर हैरानी होगी कि 2 अक्टूबर 1945 को महिंद्रा एंड महिंद्रा की स्थापना एक स्टील ट्रेडिंग कंपनी के रूप में हुई थी। इसके नौ साल बाद यानी की 1954 में महिंद्रा ने भारत में जीप जैसी गाड़ियों को बनाने के लिए Willys Overland Corporation के साथ हाथ मिलाया।


महिंद्रा ब्रांड का उदय


भारत में ट्रैक्टर बनाने के लिए साल 1963 में इंटरनेशनल ट्रैक्टर कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड (आईटीसीआई) के साथ एक संयुक्त उद्यम के रूप में महिंद्रा, इंटरनेशनल हार्वेस्टर इंक (अब यह न्यू हॉलैंड का हिस्सा है) और वोल्टास लिमिटेड शामिल हुए। साल 1977 में, आईटीसीआई का महिंद्रा में विलय हो गया और यह कंपनी का ट्रैक्टर डिविजन बन गया। इसके बाद  कंपनी ने डीजल इंजन और ट्रांसमिशन को बनाने के लिए 1979 में Peugeot के साथ तकनीकी साझेदारी की। वहीं, ट्रांसमिशन एसेंबली को बनाने के लिए महिंद्रा ने 1982 में किया मोटर्स (KIA Motors) के साथ साझेदारी की। साल 1982 में, अंतरराष्ट्रीय हार्वेस्टर ब्रांड (International Harvester brand) बंद हो गया और यहां से उदय हुआ Mahindra ब्रांड का।
 
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Mahindra - फोटो : Mahindra

बाजार में शुरू हुआ महिंद्रा का दबदबा


साल 1991 में, कंपनी ने भारतीय बाजार में अपना दबदबा दिखाना शुरू कर दिया। कंपनी ने इस साल वाहनों के कमांडर रेंज को पेश किया और साल 1993 में वाहनों की आर्मडा (Armada) रेंज को पेश किया।


कॉमन रेल डीजल इंजन वाली पहली भारतीय कंपनी


साल 2005 में कॉमन रेल डीजल इंजन (CRDe) को लॉन्च करने वाली महिंद्रा एंड महिंद्रा पहली भारतीय ऑटो निर्माता बन गई। कंपनी ने इसे स्कॉर्पियो (Scorpio) में पेश किया।


Mahindra Bolero का धमाल 


महिंद्रा बोलेरो, महिंद्रा की सबसे ज्यादा बिकने वाली यूवी बन गई।

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Mahindra - फोटो : Mahindra

साल 2016 में बनी महिंद्रा इलेक्ट्रिक 


महिंद्रा एंड महिंद्रा ने अपनी इलेक्ट्रिक कार के बिजनेस को बढ़ाने के लिए 26 मई 2010 में Reva के 55% शेयर खरीद लिए। इसके बाद कंपनी ने साल 2016 में इसका नाम बदल कर महिंद्रा इलेक्ट्रिक (Mahindra Electric) कर दिया। इस दौरान कंपनी ने Reva का 100 फीसदी स्वामित्व अपने नाम कर लिया।


SsangYong Motor Company पर महिंद्रा का अधिकार


20 जनवरी 2013 को महिंद्रा ने दक्षिण कोरिया की SsangYong Motor Company की 70 फीसदी हिस्सेदारी अपने नाम कर ली।
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Pininfarina - फोटो : Pininfarina

Pininfarina को खरीदा


14 दिसंबर 2015 को Mahindra ने Pininfarina को 28 मिलियन यूएस डॉलर में खरीदा। महिंद्रा एंड महिंद्रा और टेक महिंद्रा (Tech Mahindra) ने स्पेशल परपज व्हीकल (SPV) के माध्यम से, इटली की कार डिजाइनर Pininfarina SpA में लगभग 186.7 करोड़ रुपये में 76.06% हिस्सेदारी खरीदी।


Meru की हिस्सेदारी खरीदी


महिंद्रा ने 5 दिसंबर 2019 को Meru के 36.63 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी।
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