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कभी 35 रुपये रोजी में मजदूरी करता था यह खिलाड़ी, फिर भारत को 2011 विश्व कप दिलाया

Sun, 12 Jul 2020 03:35 PM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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2011 विश्व कप - फोटो : सोशल मीडिया
साल 1983, कपिल देव की अगुवाई में जब भारतीय टीम ने पहला विश्व कप जीतकर इतिहास रचा था, उसी साल गुजरात के सूदूरवर्ती जिले भरूच के एक बेहद गरीब परिवार में मुनाफ पटेल का जन्म हुआ। 35 रुपये रोजी में काम करके अपना बचपन जीने वाले मुनाफ आज 37 साल के हो गए।
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मुनाफ पटेल - फोटो : social media
किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि एक अनजान गांव इखार से निकलकर भारत को 28 साल बाद 2011 विश्व कप जिताने में मुनाफ अहम रोल निभाएगा। वाकई एक दिहाड़ी मजदूर के लिए भारतीय टीम के तेज गेंदबाज बनने का सफर किसी खूबसूरत सपने से कम नहीं होगा।
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मुनाफ पटेल
कभी 35 रुपये दिहाड़ी में काम करने वाले मुनाफ पटेल ने खुद कहा था कि अगर उन्होंने बचपन में गेंद, बल्ला नहीं थामा होता तो आज शायद अफ्रीका की किसी कंपनी में मजदूरी कर रहे होते क्योंकि उनके गांव के अधिकतर लोग जीवन-यापन के लिए वहीं जाकर टाइल फैक्टरियों में काम करते हैं।

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मुनाफ पटेल - फोटो : getty
धीरे-धीरे मुनाफ ने खुद को क्रिकेट के करीब पाया। खेलने लगे, उनकी किस्मत तब चमकी जब दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों के अलावा छोटे शहरों से क्रिकेटर तलाशे जाने लगे। नैसर्गिक पेस से आकर्षित होकर तब मुख्य चयनकर्ता रहे किरण मोरे ने उन्हें MRF पेस फाउंडेशन बुलाया।
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- फोटो : ट्विटर
उस वक्त संस्थान के डायरेक्टर रहे डेनिस लिली और दौरे पर पहुंचे स्टीव वॉ दोनों का ध्यान खींचने में लंबा कद या गेंदबाज सफल रहा। सचिन तेंदुलकर को जब उनकी खबर लगी तो उन्होंने अपने पास मुंबई बुला लिया। मास्टर-ब्लास्टर ही उनका सारा खर्च उठाते थे।
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2011 विश्व कप में मुनाफ पटेल - फोटो : सोशल मीडिया
2003 में बिना गुजरात के लिए एक भी मैच खेले उन्हें ट्रांसफर डील के तहत मुंबई जैसी प्रतिष्ठित टीम में खेलने का मौका मिला। सधी लाइन-लेंथ और दमदार पेस के बूते तुलना महान ऑस्ट्रेलियाई पेसर ग्लेन मैक्ग्रा से होने लगी और 2006 में इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू दौरे में पहले टेस्ट फिर वन-डे डेब्यू किया।
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मुनाफ पटेल
किसी आम भारतीय तेज गेंदबाज की ही तरह मुनाफ इंजरी से घिर गए। धीरे-धीरे वह रफ्तार भी जाने लगी, लेकिन एक ही टप्पे पर लगातार गेंद फेंकने की अद्भुत कला और विकेट दिलाने की काबिलियत टीम में वापसी करवा ही देती।

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2011 विश्व कप विजेता भारतीय टीम - फोटो : सोशल मीडिया
2011 वर्ल्ड कप की जीत में मुनाफ का रोल बड़ा था, लेकिन सचिन, युवराज, गौतम और जहीर खान जैसे खिलाडियों के सामने चमक दब गई। 8 मैच में उन्होंने 11 विकेट लिए थे, सेमीफाइनल में पाकिस्तान की बैंड बजाई थी। फाइनल में जरूर विकेट नहीं मिल पाया, लेकिन 9 ओवर्स में महज 41 रन दिए थे।
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मुनाफ पटेल
इंडिया के लिए 13 टेस्ट (35 विकेट) और 70 वन-डे इंटरनेशनल (86 विकेट) खेलने वाले मुनाफ आईपीएल में भी बराबर जलवा बिखेरते रहे। पहला खिताब जीतने वाली राजस्थान रॉयल्स टीम के सदस्य थे। फिर गुजरात लॉयंस और फिर मुंबई इंडियंस के लिेए भी खेलते नजर आए।
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