आमतौर पर ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) बनवाने को टेढ़ी खीर माना जाता रहा है। डीएल बनवाने के लिए सरकारी विभाग के कई चक्कर लगाने और इसके लिए कई फॉर्म को भरने की सोचकर आवेदक का जोश ठंडा पड़ जाता है और वह परेशानी से बचने के लिए आरटीओ दफ्तर में किसी दलाल को पकड़ता है। लोगों की परेशानी को देखते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वाहन नियम 1989 में कुछ संशोधन किए जिसके बाद अब डीएल बनवाना आसान हो गया है। डीएल बनाने के लिए अब ज्यादा कागजातों की आवश्यकता नहीं होती। आवेदक सिर्फ आधार कार्ड के जरिए ऑनलाइन ड्राइविंग लाइसेंस बनवा सकते हैं।
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ड्राइविंग लाइसेंस।
- फोटो : अमर उजाला
सरकार ने क्या बदलाव किया
आधार कार्ड प्रत्येक भारतीय नागरिक के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज है। यह केवल एक दस्तावेज ही नहीं है, बल्कि पहचान पत्र है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने आधार को लेकर कुछ नए नियम बनाए हैं, जिन्हें लेकर एक नोटिफिकेशन भी जारी किया गया है। इसके अनुसार, अब आधार कार्ड के बायोमेट्रिक डाटा का इस्तेमाल नागरिकों को कुछ ऑनलाइन सेवाएं देने के लिए किया जा सकेगा। इनमें लर्निंग लाइसेंस बनवाना, ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यू करवाना, गाड़ी का रजिस्ट्रेशन करवाना और इन दस्तावेजों में पता बदलना शामिल है।
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आधार कार्ड
आपको कैसे होगा फायदा?
दरअसल सड़क यातायात मंत्रालय ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को आग्रह किया था कि ड्राइविंग लाइसेंस व गाड़ी के रजिस्ट्रेशन से जुड़ी ऑनलाइन सेवाओं को आधार के दायरे में लाया जाए। इससे फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस व अन्य दस्तावेजों के फर्जीवाड़ों को रोकने में मदद मिलेगी और लोगों को बिना ऑफिस जाए ही सुविधाएं मिल सकेंगी।
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आधार
इस संदर्भ में एक सूत्र ने कहा कि अगर कोई ऑनलाइन सेवाएं लेना चाहता है, तो उसके लिए आधार ऑथेंटिकेशन बेहतर रहेगा। आईटीआर फाइल करने के लिए भी ऑनलाइन वेरिफिकेशन की प्रक्रिया आधार आईडी से करना सबसे लोकप्रिय रही है।
मालूम हो कि साल 2018 में ट्रांसपोर्ट मंत्रालय ने डीएल के आवेदन के लिए आधार को आईडी प्रूफ के तौर पर अनिवार्य कर दिया था, जिसे बाद में उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद ड्रॉप कर दिया गया। तब न्यायालय ने कहा था कि सरकारी लाभकारी योजनाओं के अतिरिक्त किसी भी सेवा में आधार को जरूरी नहीं किया जा सकता है।
वाहन में कागजात रखने से भी मिली छूट
दूसरा सबसे बड़ा बदलाव ये है कि अब आप अपने वाहन से संबंधित दस्तावेज जैसे ड्राइविंग लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन डॉक्युमेंट्स, फिटनेस सर्टिफिकेट, परमिट्स जैसे कागजात इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म या डिजीलॉकर में रख सकेंगे। साथ ही उन्हें सबूत के तौर पर ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों को दिखाया जा सकेगा। संशोधन में कहा गया है कि यदि अधिकारी डिजीलॉकर में सुरक्षित दस्तावेजों को सत्यापित करने में सक्षम है, तो लोगों को कागजातों की फिजिकल कॉपी रखने की जरूरत नहीं होगी।