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Car Tips: कार के ओडोमीटर के साथ छेड़छाड़, इन तरीकों से तुरंत लगाएं पता

Mon, 18 Mar 2019 03:23 PM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला
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car odometer temporing
अगर आप पुरानी कार खरीदने की सोच रहे हैं, तो जान लें यह राह इतनी आसान नहीं है। पुरानी कार खरीदने की राह में तमाम रोड़े हैं। कई तरह के स्कैम से आपका सामना हो सकता है। इसी में एक बेहद कॉमन चीटिंग है गाड़ी की मीटर यानी ओडोमीटर पीछे करना। हम बता रहे हैं कि इस स्कैम को आप कैसे पहचान सकते हैं।
 
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डिजिटल ओडोमीटर भी हो सकता है हैक

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car odometer temporing
पुरानी कार खरीदने वाले इस स्कैम से दोचार जरूर होते हैं। आमतौर पर लोग सोचते हैं कि डिजिटल ओडोमीटर को हैक नहीं का जा सकता, लेकिन ऐसा सोचना बिल्कुल गलत है। किसी भी गाड़ी के मीटर को पीछे किया जा सकता है। कई बार ऐसे धोखेबाज इतनी सफाई से ओडोमीटर पीछे करते हैं कि पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
 
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एनालॉग ओडोमीटर से छेड़छाड़

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Analogue odometer tampering
बात करते हैं पहले एनालॉग ओडोमीटर की। एनालॉग मीटर में कई नंबर होते हैं, जो दूरी को दर्शाते हैं। हांकि नई आ रही कारों में एनालॉग मीटर नहीं मिलते हैं। वहीं एनालॉग मीटर के साथ छेड़छाड़ करना बेहद आसान होता है। कार के इंस्ट्रूमेंट कंसोल या स्पीडोमीटर को अलग को करके ओडोमीटर के डिजिट व्हील्स को पीछे किया जा सकता है। ओडोमीटर के साथ छेड़छाड़ करके लोग सोचते हैं कि गाड़ी की रीसेल वैल्यू बढ़ जाएगी।

हालाँकि, अकसर कई बार इस तरह के ओडोमीटर के साथ ठीक से टेंपरिंग नहीं की जाती है और ओडोमीटर में डिजिट सीरीज़ को गलत बताया जाता है। वहीं इस तरह की धोखाझड़ी का तुरंत पता नहीं चलता है, लेकिन जब कार का नया मालिक लगभग 10,000 किमी कार चला लेता है, तो कई बार डिजिट काम करना बंद कर देते हैं।
 

डिजिटल ओडोमीटर के साथ छेड़छाड़

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Analogue odometer tampering mobile
सभी नई कारों में डिजिटल ओडोमीटर लगा होता है। लोगों का सोचना होता है कि डिजिटल ओडोमीटर के साथ छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है, लेकिन ऐसा सोचना गलत है। 10-15 साल पहले यह असंभव प्रतीत होता था, लेकिन अब यह संभव है और इतनी सफाई से किया जाता है कि पता लगाना मुश्किल हो जाता है। कार सॉफ्टवेयर और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की जानकारी रखने वाला कोई भी इसे आसानी से हैक कर सकता है।  
 
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कंसोल की चिप से होती है छेड़छाड़

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Analogue odometer tampering laptop
डिजिटल ओडोमीटर के साथ छेड़खानी करने वाले कार से कंसोल को खोल कर लैपटॉप या स्मार्टफोन से कनेक्ट कर देते हैं और कंसोल की चिप को हैक करके अपनी मर्जी के मुताबिक ओडोमीटर रीडिंग को सेट कर देते हैं। ओडोमीटर में प्रिटेंड सर्किट बोर्ड होता है, जिसमें से चिप को निकाल कर री-सोल्डरिंग की जाती है। ओडोमीटर के ग्लास पर या इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर पर पेंचकस के निशान देख कर टेंपरिंग का पता लगाया जा सकता है, लेकिन अगर किसी प्रोफेशनल ने किया होगा, तो यह भी मुश्किल हो जाता है।
 
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स्पीडोमीटर की तार निकालना आम

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Car speeometer console
वहीं स्पीडोमीटर की केबल निकालना भी बेहद आम है और अधिकतर थर्ड पार्टी डीलर ऑरिजनल सेलर से कार खरीदने के बाद ऐसा करते हैं। स्पीडोमीटर की तार निकालने के बाद वे खूब व्हीकल को घुमाते हैं, कुछ दिन के बाद कार किसी ग्राहक को बेच देते हैं।     
 
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ओडोमीटर से छेड़छाड़ का कैसे पता लगाएं

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how to find odometer tampering
गाड़ी के ओडोमीटर से छेड़छाड़ का पता लगाना हालांकि मुश्किल होता है, लेकिन थोड़ा सा लॉजिक लगा कर इस धोखाधड़ी को पकड़ा जा सकता है। कार खरीदने से पहले कार की डिटेल सर्विस हिस्ट्री जरूर मांगे। वहीं हो सके, तो जहां कार की सर्विस होती है वहां खुद जा कर पता लगाएं। सर्विस सेंटर के नंबर पर फोन करके भी आखिरी सर्विस के दौरान की रीडिंग का पता लगाया जा सकता है। इससे तरीके से आपको अंदाजा मिल सकता है कि मीटर के साथ छेड़छाड़ हुई है या नहीं।
 

स्टीयरिंग व्हील, ब्रैक, क्लच पेडल देख कर लगाएं पता

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Car wear and tear
वहीं कार के ग्लोव बॉक्स, डोर फ्रेम या विंड स्क्रीन पर अगली सर्विस की डेडलाइन का स्टीकर भी लगा होता है, जिसे देख कर पता लगाया जा सकता है। वहीं उसमें सर्विस स्टेशन के नंबर का फोटो जरूर ले लें और फोन करके पूछ लें। इसके अलावा 1 लाख किमी चल चुकी कारों के पार्ट्स पर इस्तेमाल के निशान होते हैं, जैसे स्टीयरिंग व्हील, ब्रैक, क्लच पेडल, टायर, नोब, सीट कुशनों को देख कर कार कितनी चली हो सकती है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। वहीं इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर को खुलवा कर भी देख सकत हैं कि चिप के साथ छेड़छाड़ की गई है या नहीं।
 
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कारों के ऑथराइज्ड शोरूम्स से लें कार

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Old Car, Used car, Second Hand Car, Maruti True value
वहीं अगर आप पुरानी कार खरीदने की सोच रहे हैं, तो इसका एक दूसरा तरीका भी है। प्राइवेट डीलर्स के पास जाने की बजाय आप कंपनी के पुरानी कारों के शोरूम्स विजिट करें। आजकल मारुति, होंडा, टोयोटा, ह्यूंदै ने पुरानी कारों के ऑथराइज्ड शोरूम भी खोले हुए हैं। हालांकि वहां कारें मार्केट रेट से थोड़ी महंगी मिलती हैं, लेकिन धोखाधड़ी न होने का सुकून भी रहता है। साथ ही कंपनी एक साल की वारंटी के साथ फ्री सर्विस भी देती हैं।     
 
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