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कार कबाड़ नीति के तहत ब्रिटेन पौने छह लाख रुपये दे सकता है, क्या भारत को भी यह राह अपनानी चाहिए

Mon, 08 Jun 2020 07:51 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ब्रिटेन एक प्रस्ताव पर विचार कर रहा है जिसके तहत डीजल या पेट्रोल वाहनों के मालिक यदि अपने कार को किसी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (ईवी) से बदल देते हैं तो उन्हें 6,000 पाउंड (करीब 5 लाख 74 हजार रुपये) तक मिल सकते हैं।
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old vehicles scrap - फोटो : Social
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विस्तार
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ब्रिटेन इस कदम से दो फायदे की संभावना को देख रहा है। पहला इससे नए वाहनों की मांग पैदा होगी जो सुस्त ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में जान फूंक सकती है। दूसरा इससे पर्यावरण की रक्षा होगी। ब्रिटेन ने इस तरह का कदम ऐसे समय में उठाने का निर्णय लिया है, जब फ्रांस और जर्मनी जैसे देश ज्यादा से ज्यादा इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को बढ़ावा दे रहे हैं। 
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ब्रिटेन के टेलीग्राफ ने बताया कि ब्रिटेन के प्रधान मंत्री बोरिस जॉनसन मौजूदा संक्रमण के दौर में ऑटोमोटिव क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कार कबाड़ नीति पर विचार कर रहे हैं। ब्रिटेन और दुनिया भर के कार निर्माता लॉकडाउन की वजह से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इसने न केवल आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित किया है, बल्कि इसकी वजह से मांग में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई है। नई ईवी खरीदने के लिए दिए जाने वाले ऐसे प्रोत्साहन, ब्रिटेन में इलेक्ट्रिक कारों के निर्माताओं के लिए भी एक उत्प्रेरक का काम कर सकते हैं। 

इस बार में बोरिस जॉनसन 6 जुलाई तक एक औपचारिक एलान कर सकते हैं। लेकिन इस बीच ऐसी खबरें सुर्खियों में है कि अमेरिका की दिग्गज इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी Tesla (टेस्ला) ब्रिटेन में एक फैक्ट्री लगाने की योजना बना रही है। टेस्ला के इलेक्ट्रिक व्हीकल्स दुनिया भर में बेहद लोकप्रिय हैं और कंपनी के कारखाने बड़े पैमाने पर राजस्व उत्पन्न करने और रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए जाने जाते हैं। पिछले हफ्ते, टेस्ला के मालिक एलन मस्क कथित तौर पर ब्रिटेन में प्लांट के लिए एक साइट देखने आए थे। यह बैटरी के लिए अनुसंधान और विकास केंद्र और प्रॉडक्शन प्लांट के रूप में कार्य कर सकता है। 

हालांकि टेस्ला और अन्य ऑटो निर्माता अपने इलेक्ट्रिक कार के मॉडल्स को बाजार में पेश कर सकते हैं लेकिन इस समय ऐसे वाहनों की मांग होना महत्वपूर्ण है। ऐसे में कार कबाड़ नीति OEMs (ओरिजनल इक्यूप्मेंट मैन्युफैक्चर्रस) के लिए एक प्रमुख सहयोगी बनने का वादा करती है।

फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों ने आने वाले महीनों और वर्षों में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की लोकप्रियता को बढ़ावा देने के अपने इरादों को साफ कर दिया है। 
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भारत भी कार कबाड़ नीति पेश करने के अंतिम चरण में है जो पुराने और / या प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के मालिकों को नए वाहन खरीदने के लिए ठोस प्रोत्साहन प्रदान कर सकता है। हालांकि इसके तहत सिर्फ इलेक्ट्रिक व्हीक्लस ही नहीं बल्कि सभी नए वाहनों को शामिल किए जाने की संभावना है। फिर भी इस नीति में भारतीय ऑटोमोबाइल क्षेत्र की मदद करने की क्षमता हो सकती है। एमएसएमई और सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पिछले महीने कहा था, "अब हम नई कबाड़ नीति शुरू करने जा रहे हैं, जिसके जरिए पुरानी कारों, ट्रकों और बसों को कबाड़ में तब्दील किया जाएगा।" 

गडकरी ने यह भी कहा था कि सरकार ने देश के बंदरगाहों की गहराई 18 मीटर तक बढ़ाने का फैसला किया है, और रीसाइक्लिंग प्लांट वाले ऑटोमोबाइल क्लस्टर्स बंदरगाहों के पास स्थापित किए जा सकते हैं। 
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