फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भारत की वे 5 कारें जिनसे हमारा रिश्ता था 'घरेलू'

Mon, 13 Feb 2017 01:23 PM IST
अमित द्विवेदी, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 6
भारत की आइकॉनिक कारें
अब आप जिधर नजर उठाओगे ढेर सारी कारों की भीड़ नजर आएगी। इसमें ढेर सारे ब्रांड व न जाने कितनी कंपनियों की गाड़ियां सड़क पर दौड़ रही हैं। लेकिन इसके पहले जिन कारों ने भारतीय ऑटोमोटिव इंडस्ट्री की तकदीर बदल दी हम उन कारों को कभी नहीं भूल पाएंगे। आइए हम आपको यहां मिलवाते हैं उन 10 कारों से जिनका भारतीय ऑटोमोबाइल के इतिहास में बहुत बड़ा योगदान है और जिनके जाने से हमारा हृदय द्रवित हो उठा। 
विज्ञापन

हिंदुस्तान मोटर्स अंबेस्डर 

2 of 6
आइकॉनिक कारें
इस नाम के बगैर यह कहानी अधूरी रह जाएगी। हिंदुस्तान मोटर्स की अंबेस्डर ब्रिटिश मोरिस ऑक्सफोर्ड पर आधारित थी तथा यह देश में निर्मित होने वाली पहली कार बनी। यह कार आम लोगों के साथ नेताओं की लोकप्रिय कारों में शामिल हो गई। उस समय इसकी कीमत 10 हजार रुपये थी। 1980 तक यह कार लोगों के दिलों पर तब तक राज करती रही जब तक मारुति ने 800 को बाजार में नहीं उतारा। धीरे-धीरे इसकी चमक जाती रही और घाटे में आकर कंपनी ने इस ब्रांड को ही बेच दिया। लेकिन इस कार के योगदान को भारतीय ऑटो इंडस्‍ट्री कभी नहीं भुला सकती। 

 
विज्ञापन

मारुति जिप्सी 

3 of 6
आइकॉनिक
मारुति जिप्सी की लोकप्रियता की गाथाएं हमारे सैन्य सुरक्षा बलों के जुबान पर चढ़ी हुई हैं। यह कार आर्म्ड फोर्सेस और सिक्योरिटी फोर्सेस दोनों ही जगह काफी लोकप्रिय हैं। यह ऑफरोडिंग के लिए एक मजबूत वाहन है और अपनी इस उपयोगिता के चलते अभी भी इसे ढेर सारी रैलियों में प्रयोग किया जाता है। लेकिन सिर्फ पेट्रोल इंजिन विकल्प, अनकंफर्टेबल सीटों के कारण यह खरीदारों की च्वाइस से बाहर होती चली गई। लेकिन अभी भी ऑटो उत्साहियों की यह फेवरेट कार है और लोग पुरानी जिप्सी खरीदने के लिए विकल्प ढूंढते रहते हैं। किसी भी बॉर्डर पर आप जाएंगे वहां आपको ढेर सारी जिप्सी अभी नजर आएगी जो सेना के उपयोग में आ रही हैं। इसे भारतीय बाजार में 1985 में 4 सिलेंडर 1 लीटर इंजिन के साथ उतारा गया था। 

 

प्रीमियर पद्मिनी 

4 of 6
आइकॉनिक
अगर आप कभी मुंबई गए होंगे तो अभी भी इक्का-दुक्का पद्मिनी कारें आपको देखने को मिल जाएंगी जो टैक्सियों में चल रही हैं। काली-पीली टैक्सी के रूप में मशहूर ये सेडान कारें मुंबई की पहचान बन गई थीं। पद्मिनी को भारत में 1973 से लेकर 1998 के बीच मैन्यूफैक्चर किया गया। बहुत सारी बॉलीवुड फिल्मों में इन कारों का जलवा नजर आया है। लेकिन जापानीज कंपनियों के भारत में पदार्पण ने इस आईकॉनिक कार की चमक फीकी कर दी। मुंबई की पहचान मानी जानी वाली ये कारें अब सिर्फ सुनहरी यादों में सिमट गई हैं। अभिनेता रजनीकांत, ममूटी व आमिर खान जैसे सितारे भी पद्मिनी के मालिक हुआ करते थे। यह एक सबफोर मीटर सेडान थी।

 
विज्ञापन

मारुति 800

5 of 6
आइकॉनिक
इस कार ने पद्मिनी और अंबेस्डर को बहुत जख्म दिया और खुद यह कार बोले तो मारुति 800 बन गई। बदलते समय के साथ नए बदलावों व हल्के बॉडी वेट के साथ आई यह कार आम आदमी की हसरत पूरी करने में सफल रही। 14 दिसंबर 1984 को भारत में मारुति उद्योग ने 800 को भारतीय बाजार में अपने गुड़गांव स्थित प्लांट में लॉन्च किया था। इसमें 796 सीसी का 3 सिलेंडर, 4-सट्रोक, वाटर कूल्ड इंजिन लगा था। इस कार को सबसे पहले दिल्ली के हरपाल सिंह ने 48000 रुपये में खरीदी थी और इसकी चाभी उस समय की प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्रीमती इंदिरागांधी ने उन्हें सौंपी थीं। 1984 में मारुति उद्योग ने 842 गाड़ियां बेची थीं। बाद में ऑल्टो के आने के बाद यह कार अपने आप अस्तित्व से बाहर हो गई।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

हिंदुस्तान मोटर्स कंटेसा 

6 of 6
आइकॉनिक
कंटेसा हिंदुस्तान मोटर्स की एक ऐसी कार है जो लोगों के दिलों में अभी भी जिंदा है। इसे लोग प्यार से कांटी बुलाते थे। ढेर सारी जगह, एयरकंडीशन के साथ इस कार में ढेर सारी शक्ति भी थी। ये चार दरवाजों वाली फेमिली सेडान थी जिसका प्रोडक्‍शन टाइम 1984 से 2002 तक रहा। यह लगभग 5 मीटर लंबी सेडान थी। 
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें