वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने अगले पांच वर्षों में दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण से लड़ने के लिए एक नई नीति का एलान किया है। यह नई नीति तुरंत लागू करने के साथ ही सेक्टर के आधार पर एक्शन प्लान के साथ आती है।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने अगले पांच वर्षों में दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण से लड़ने के लिए एक नई नीति का एलान किया है। यह नई नीति तुरंत लागू करने के साथ ही सेक्टर के आधार पर एक्शन प्लान के साथ आती है। नई नीति के मुताबिक यदि वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 450 से ऊपर चला जाता है, तो दिल्ली और उसके आसपास और एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) के सीमावर्ती जिलों में आवश्यक सेवाओं में इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों को छोड़कर, सभी बीएस-4 चार पहिया डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की गई है।
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ऑटो
- फोटो : अमर उजाला
डीजल ऑटो रिक्शा होंगे बंद
वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए नई नीति के अनुसार, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद में डीजल ऑटो रिक्शा को 31 दिसंबर, 2024 तक चरणबद्ध तरीके से बंद कर दिया जाएगा। जबकि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के अन्य जिलों में इसे 31 दिसंबर, 2026 तक चरणबद्ध तरीके से पालन किया जाएगा। नीति कहती है कि 1 जनवरी, 2023 से एनसीआर में सिर्फ सीएनजी और इलेक्ट्रिक ऑटो का रजिस्ट्रेशन (पंजीकरण) होगा।
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PUC
- फोटो : Amar Ujala
PUC नहीं तो तेल नहीं
नीति इस बात पर भी रोशनी डालती है कि दिल्ली-एनसीआर में स्थित पेट्रोल-पंपों को 1 जनवरी, 2023 से उन वाहनों को ईंधन देने की इजाजत नहीं दी जाएगी जिनके पास वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र (पीयूसी सर्टिफिकेट) नहीं है। दिल्ली और सभी एनसीआर राज्यों को एक विकसित करने के लिए सूचित किया गया है।
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IGL CNG Pump
- फोटो : For Reference Only
बनेगा सीएनजी नेटवर्क
लंबी दूरी के ट्रकों और अन्य वाणिज्यिक वाहनों को धीरे-धीरे गैस में बदलने (शिफ्ट) करने के लिए हाईवे के साथ-साथ एनसीआर में सीएनजी और एलएनजी ईंधन नेटवर्क बनाने की योजना है। राज्य सरकारों को उन वाहनों के लिए स्क्रैपेज नीति लागू करने का भी निर्देश दिया गया है जिनका अब इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।
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Air Pollution
- फोटो : अमर उजाला
नीति का स्वागत है
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के संचालन समिति के सदस्य प्रो एसएन त्रिपाठी ने कहा कि वायु प्रदूषण को नियंत्रण करने के लिए CAQM द्वारा विकसित क्षेत्रवार नीति एक स्वागत योग्य कदम है। त्रिपाठी ने कहा, "वायु प्रदूषण के आंकड़ों की गुणवत्ता को मजबूत करने और ग्रामीण और उपनगरीय क्षेत्रों को कवर करने के लिए सेंसर-आधारित निगरानी के जरिए अंतराल को भरने पर ध्यान देने से अधिकारियों को बेहतर शमन और उपशमन उपायों के लिए साक्ष्य-संचालित निर्णय लेने में मदद मिलेगी।"
कुछ ने आलोचना भी की
हालांकि इस निर्देश की कुछ आलोचना हुई क्योंकि राजधानी में कई रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) ने साझा किया कि यह कदम गैर-जरूरी लगता है। डिफेंस कॉलोनी के एक निवासी ने पीटीआई की रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि, "यह एक हास्यास्पद नीति है। जब प्रदूषण नियंत्रण (पीयूसी) प्रमाणपत्रों के लिए पहले से ही एक नीति है और लोगों को पीयूसी करवाने के लिए लगातार परेशान किया जा रहा है, तो डीजल वाहनों पर प्रतिबंध क्यों लगाया जाए।"