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वास्तु के अनुसार नया फ्लैट खरीदने में बरतें सावधानियां, तभी होगी सुख-समृद्धि की बरसात

Fri, 11 Sep 2020 06:00 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन, वास्तुविद
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वास्तुु घर
अपने सपनों का घर खरीदने की चाहत भला किसकी नहीं होती। हर कोई चाहता है कि उसका घर ऐसा हो जिसमें वह अपने परिवार के साथ आनंद पूर्वक रह सके। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर हमें न केवल रहने का स्थान प्रदान करता है,बल्कि उसके भीतर या उसके आसपास की ऊर्जा हमारे जीवन को प्रभावित करती है। इसलिए यह आवश्यक हो जाता है कि घर या फ्लैट खरीदने हेतु अच्छे स्थान का चयन करें। साथ ही उसकी आंतरिक व्यवस्था वास्तु के अनुरूप हो।
 
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वास्तुशास्त्र में दिशाओं का महत्व - फोटो : अमर उजाला
प्रवेश द्वार
घर या फ्लैट खरीदने से पहले ये ध्यान रहे  कि मुख्य द्वार पूर्वी ईशान, उत्तरी ईशान, दक्षिणी आग्नेय और पश्चिमी वायव्य में हो। दक्षिण-पश्चिम दिशा द्वार वाला मकान उधार, गरीबी और आपसी संबंधों में समस्याएं पैदा करता है वहीं उत्तर दिशा में पश्चिम की ओर का द्वार धन और करियर में सफलता प्रदान करता है। ध्यान रहे घर के मुख्य द्वार के सामने बिजली का खंभा, बड़ा वृक्ष, गड्ढा, अस्पताल और मंदिर न हो।
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vastu tips
कमरों की दिशा
मास्टर बेडरूम हमेशा घर के दक्षिण-पश्चिम में होना शुभ रहता है। संबंधों, जुड़ाव और दक्षता के जोन दक्षिण-पश्चिम में बेडरूम होने से पति-पत्नी लगातार अपने-अपने कार्यों में दक्षता हासिल करते हैं और दोनों  मिलकर अपने परिवार का भी पूरा ध्यान रखते हैं। पश्चिम जोन लाभ और प्राप्तियों का है, इसलिए इस जोन में बना बेडरूम दंपत्ति के लिए जीवन के हर क्षेत्र में लाभ और धन की प्राप्ति के लिए श्रेयस्कर है। बच्चों का कमरा उत्तर, पूर्व और पश्चिम दिशा में होना लाभकारी है।

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वास्तुशास्त्र में दिशाओं का महत्व - फोटो : vastu tips
शौचालय
फ्लैट खरीदने से पहले ये जरूर देख लें कि टॉयलेट उत्तर-पूर्व में बना हुआ न हो। इस दिशा में टॉयलेट होना अनेक शारीरिक और मानसिक कष्टों का कारण बन सकता है,ऐसा घर न खरीदें। टॉयलेट और बाथरूम घर के मध्य में या मुख्य द्वार के सामने अशुभ होते हैं। इसलिए फ्लैट लेने से पहले इस बात का ध्यान अवश्य रखें।
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वास्तु उपाय
किचन
फ्लैट खरीदते वक्त रसोई की सही दिशा देखना अति आवश्यक है। किचन के लिए घर की दक्षिण-पूर्व दिशा (आग्नेय-कोण) को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। विकल्प के रूप में आग्नेय दिशा की तरफ पूर्व में या फिर उत्तर-पश्चिम दिशा की तरफ पश्चिम दिशा में भी रसोई हो सकती है। लेकिन भूलकर भी दक्षिण-पश्चिम दिशा में किचन नहीं होनी चाहिए। यहां किचन का होना एक बड़ा वास्तु दोष है। इस दिशा में किचन होने से व्यक्ति अपने कौशल का इस्तेमाल नहीं कर पाता है जिस वजह से उसे अपने करियर में अस्थायित्व और घर-परिवार में खराब रिश्तों का सामना करना पड़ सकता है। रसोई घर ईशान कोण में भी न हो।
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Vastu aur panchtatva
पंचतत्व 
पंचतत्वों का संतुलन किसी भी मकान में सुख-समृद्धि लाने में बहुत अहम होता है। आदर्श तौर पर सभी पंचतत्व अपनी निर्धारित जगह पर होने चाहिए जैसे जल उत्तर या उत्तर-पूर्व में, अग्नि दक्षिण-पूर्व में, पृथ्वी तत्व से सम्बंधित चीजें दक्षिण-पश्चिम में और आकाश पश्चिम दिशा में। इनका सही दिशा में होना आपके जीवन में स्वास्थ्य, धन और आर्थिक स्थिरता को आकर्षित करता है।
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vastu tips
अन्य जरूरी बातें-
- बालकनी की दिशा भवन के मुख्य दरवाजे की दिशा के अनुसार ही निर्धारित की जाती है। घर में अगर बालकनी है तो उत्तर और पूर्व दिशा में बालकनी शुभ होती है। बालकनी बनाते समय सर्वप्रथम तो यह बात ध्यान रखनी चाहिए कि घर में सूर्य का प्रकाश उचित तरीके से आए।    
- खंडहर मकानों के आसपास या वीरान पड़े घरों के पास फ्लैट लेना चाहिए। वास्तु के अनुसार इन जगहों के आसपास घर लेना  मानसिक दोष उत्पन्न करता है। साथ ही इन घरों से निकलने वाली नकारात्मक उर्जा आपके घर-परिवार को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।
- वास्तु के अनुसार, घर खरीदते समय इस बात को देखें कि यह वर्गाकार या आयताकार आकार का ही हो,अन्य किसी भी आकार का घर शुभ नहीं माना जाता है।
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