मां दुर्गा यूं तो हर पल अपने भक्तों का ख्याल रखती है लेकिन नवरात्र के दिनों में माता की पूजा विशेष फलदायी होती है और इसका लाभ भी जल्दी मिलता है। इसका कारण यह है कि माता नवरात्र के दिनों में पृथ्वी पर निवास करती हैं और जहां जहां इनकी मूर्ति या तस्वीर सजाकर पूजा होती है उन सभी में निवास करती हैं और अपने भक्तों की पूजा प्रत्यक्ष स्वीकार करती हैं। इसलिए नवरात्र शुरु होने से पहले माता के आने की तैयार कर लीजिए ताकि मां खुशी-खुशी आपके घर में आएं और सुख समृद्धि बरसाए।
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नवरात्र से पहले कर लें यह तैयारी, मां दुर्गा भर देगी आपकी झोली
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दुर्गा पूजा
माता के आगमन की तैयारी को लेकर वास्तु विज्ञान में कुछ नियम बताए गए हैं। इनके अनुसार हर दिशा के अपने खास देवी-देवता होते हैं, इसलिए विभिन्न देवी-देवताओं के क्षेत्र के लिए जो दिशा निर्धारित हो, उनकी पूजा उसी दिशा में होनी चाहिए इससे पूजा पूर्ण फलदायी होती है।
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durga puja
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता का क्षेत्र दक्षिण दिशा है, इसलिए यह बेहद जरूरी है कि माता की पूजा करते समय हमारा मुख दक्षिण या पूर्व दिशा में ही रहे। पूर्व दिशा की ओर मुख करके मां का ध्यान पूजन करने से हमारी प्रज्ञा जागृत होती है जबकि दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पूजन करने से मानसिक शांति मिलती है और हमारा सीधा जुड़ाव माता से होता है।
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नवरात्र कलश पूजन
- फोटो : rakesh jha
माता की प्रसन्नता की कामना रखने वालों को पूजन सामग्री दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना चाहिए। इस कमरे में हल्के पीला, हरा या फिर गुलाबी रंग होना वास्तु के अनुसार शुभ फलदायी होता है क्योंकि इससे पूजा कक्ष में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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दुर्गा पूजा
कई बार पूजा करते समय अचानक ही ध्यान भटकने लगता है। इस समस्या से बचने के लिए घर के उत्तर-पूर्व दिशा में प्लास्टिक या लकड़ी से बने पिरामिड रख सकते हैं। पिरामिड रखते समय इस बात का ध्यान रखें कि पिरामिड नीचे से खोखला हो।
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स्वास्तिक गणेश
वास्तुशास्त्र के प्राचीन ग्रंथों में मंदिरों और घरों में किसी भी शुभ काम को करने से पूर्व हल्दी से या फिर सिंदूर से स्वातिस्क का प्रतीक चिन्ह बनाए जाने का नियम है। इसलिए पूजन शुरु करने से पहले स्वास्तिक जरूर बनाएं।