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भूलकर भी न करें दिशाओं की अनदेखी, घर में खुशहाली लाएंगी वास्तु की यह बातें

Wed, 09 Sep 2020 07:09 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन, वास्तुविद
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vastu tips
वास्तुशास्त्र के अनुसार जीवन में तरक्की व खुशहाली बनाए रखने के लिए कई सरल उपाय बताए गए हैं। जिससे आपके घर, जीवन और कार्यक्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर जाती है। वास्तु की मानें तो दिशाओं का ध्यान रख और कुछ नियमों का पालन कर कई प्रकार की समस्याओं से बचा जा सकता है।
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ईशान कोण को रखें साफ़-सुथरा
वास्तुशास्त्र के अनुसार उत्तर-पूर्व यानि ईशानकोण को ईश की दिशा मानी गई है।इस दिशा का संबंध जल तत्व से है। इस दिशा को सदैव हल्का और पवित्र रखना चाहिए,ऐसा नहीं होने पर परिवार में शारीरिक और मानसिक अशांति बनी रहती है।
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पूर्व में खुली रखें खिड़कियां
पूर्व दिशा को वास्तु में सूर्य की दिशा मानी गई है। इस दिशा को अधिकाधिक खुला रखें क्योंकि यही से सुबह की धूप घर में अंदर आती है। सुबह के सूरज की पैरा बैंगनी किरणें रात्रि के समय उत्पन्न होने वाले सूक्ष्म जीवाणुओं को खत्म करके घर को ऊर्जावान और सकारात्मक बनाएं रखती हैं। इस दिशा को बंद रखने से जीवन में तरक्की के नए अवसर प्राप्त नहीं होते।

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आग्नेय कोण हो ऐसा
वास्तु में दक्षिण-पूर्व दिशा को अग्निकोण माना गया है एवं इस दिशा के स्वामी अग्नि देवता हैं। इस दिशा में अग्नि तत्व से सम्बंधित वस्तुएं जैसे विद्युत उपकरण एवं गैस चूल्हा रखना शुभ माना गया है। भूलकर भी इस दिशा में जल स्रोत न बनाएं।
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वास्तुशास्त्र में दिशाओं का महत्व - फोटो : vastu tips
बंद और भारी हो ये दिशा
यश और प्रसिद्धि की दक्षिण दिशा के स्वामी यम हैं। इस दिशा को खुला न रखें एवं इस दिशा की दीवारें अपेक्षाकृत मोटी और ऊँची रखना शुभ माना जाता है।
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furniture vastu
नैऋत्य का रखें ध्यान
दक्षिण-पश्चिम दिशा को वास्तु में नैऋत्य कोण कहा जाता है। इस दिशा का सम्बन्ध पृथ्वी तत्व से है और इस दिशा के स्वामी नैरुत हैं। इस दिशा को भी भारी और बंद रखना चाहिए। इस दिशा के दूषित होने से शत्रु भय एवं दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ सकता है।
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लाभ की दिशा है पश्चिम
इस दिशा के स्वामी वरुण देवता और और तत्व वायु है।इस  दिशा को बंद करने से जीवन में असफलता, मेहनत के बावजूद भी उसका पूरा फल नहीं मिलता है।

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उत्तर-पश्चिम दिशा
इस दिशा को वास्तु शास्त्र में वायव्य कोण का नाम दिया गया है। वायु तत्व से सम्बन्ध रखने वाली इस दिशा के स्वामी भी वरुण देवता हैं। इस दिशा के शुद्ध और वास्तुदोषमुक्त रहने से घर के सदस्यों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है और उनकी आयु भी लम्बी रहती है।
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धन की उत्तर दिशा
जल तत्व से संबंध रखने वाली इस दिशा के प्रतिनिधि देव धन के स्वामी कुबेर हैं। यही वजह है कि इस दिशा को समस्त आर्थिक कार्यों के निमित्त उत्तम माना जाता है। इस दिशा में कोई भारी सामान नहीं रखना चाहिए न ही इस दिशा को बंद करना चाहिए।  
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