शयन कक्ष अर्थात बेडरूम हमारे घर की सबसे महत्वपूर्ण जगह है। जहां हमें सुकून और शांति भरी नींद मिलती है। कई बार शयन कक्ष में सभी तरह की सुविधाएं होने के कारण भी चैन की नींद नहीं आती। किसी भी प्रकार का तनाव नहीं होता है फिर भी अच्छी नींद नहीं आती है। यदि आपके साथ भी ऐसा होता है तो यकीन मानिए आपके बैडरूम में वास्तुदोष है। आइए जानते है आपके शयनकक्ष में कौन-कौन से वास्तुदोष हो सकते हैं।
- दीवारें कभी भी सफेद या लाल रंग की नहीं होनी चाहिए। गहरे रंग की अपेक्षा हल्का रंग बेहतर होता है। हरा, गुलाबी या आसमानी रंग अच्छा प्रभाव छोड़ता है, कमरे में सकारात्मक ऊर्जा पैदा करता है। आपसी मतभेदों को कम करने के लिए आप इन रंगों का प्रयोग पर्दे और बेडशीट के रूप में भी कर सकते हैं।
- मुख्य शयन कक्ष, जिसे मास्टर बेडरूम भी कहा जाता है वह घर के दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए।
- शयन कक्ष में सोते समय हमेशा सिर दीवार से सटाकर सोना चाहिए, यानि पलंग का सिराहना दीवार की ओर रखें।
- कभी भी पैर दक्षिण और पूर्व दिशा में करने नहीं सोना चाहिए। उत्तर दिशा की ओर पैर करके सोने से स्वास्थ्य तथा आर्थिक लाभ की संभावना रहती है। पश्चिम दिशा की ओर पैर करके सोने से शरीर की थकान निकलती है। बौद्धिक क्षमता में वृद्धि होती है।
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