वास्तुशास्त्र भारत की प्राचीन विधाओं में से एक ऐसी विधा है, जिसमें नकारात्मक ऊर्जा को दूर करके सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा दिया जाता है ताकि जीवन को सुगम और समृद्ध बनाया जा सके। वास्तु शास्त्र में प्रत्येक दिशा का अपना एक अलग महत्व बताया गया है। जिसके अंतर्गत किसी भी चीज रसोई, मंदिर, शयनकक्ष, बाथरूम, शौचालय आदि का निर्माण करने के लिए दिशा और स्थान से संबंधित महत्वपूर्ण निर्देश दिए जाते हैं। यदि किसी व्यक्ति के जीवन में परेशानियां आ रही हो तो इसका संबंध घर के वास्तु से भी होता है। वास्तु में निर्माण को लेकर ऐसी बातें बताई गई हैं, यदि जिनका ध्यान रखा जाए तो आसपास की नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सुख-शांति से जीवन व्यतीत किया जा सकता है। इसी तरह से बाथरूम और शौचालय बनाने को लेकर भी बहुत महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए हैं। यदि इनका निर्माण करते हुए वास्तु को ध्यान में न रखा जाए तो नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। आइए जानते हैं इस बारे में।