(प्रतीकात्मक तस्वीर)
भाव नाश योग
यदि किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में किसी भाव का स्वामी त्रिक स्थान यानी छठे, आठवें और 12वें भाव में बैठा हो तो उस भाव के सारे प्रभाव नष्ट हो जाते हैं। जिस भाव के प्रभाव नष्ट होते हैं उससे संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जैसे यदि किसी जातक के धन स्थान का प्रभाव नष्ट हो जाता है तो व्यक्ति को आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
दुष्परिणाम से बचने के उपाय
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिस ग्रह को लेकर भावनाशक योग बन रहा है, उससे संबंधित रत्न धारण करने से आप परेशानियां दूर कर सकते हैं लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि योग्य ज्योतिषी की सलाह से ही रत्न धारण करें। इसके अलावा वार के अनुसार हनुमानजी की आराधना करें।